NL Tippani
रूबिका, नाविका और अमीश की मासूम मूर्खताएं और डंकापति का मौनव्रत
गंगा से लेकर यमुना के किनारों तक तहजीब के नाम पर कुछ बचा नहीं है. चहुओंर मारो काटो का कोरस गूंज रहा है. इसी मसले पर इस हफ्ते का धृतराष्ट्र-संजय संवाद सुनिए. देश के बदले सूरते हाल पर विपक्षी दलों का तीखा हमला और प्रधानमंत्री की चुप्पी पर विशेष टिप्पणी.
पिछला पूरा पखवाड़ा पहले रामनवमी इसके बाद हनुमान जयंती के मौके पर हिंसा और अराजकता की चपेट में रहा. धार्मिक उन्माद ने त्यौहारों से प्यार, मनुहार, उल्लास और भाईचारे को खत्म कर दिया है. मर्यादा पुरुषोत्तम की आड़ लेकर एक तबके ने बहुत सारी मर्यादाएं तोड़ी.
इन तमाम घटनाओं पर देश के घोघाबसंत मीडिया की गदहपचीसियां जस की तस जारी रहीं. गए हफ्ते में हुड़कचुल्लू एंकर-एंकराओं की कुछ मासूम मूर्खताओं को भी दर्ज किया गया.
Also Read
-
Plot twist! The ‘Real Kerala Story’: Keralites converting to Hinduism more than Islam
-
The story behind the viral video that exposed a TV newsroom’s internal war
-
Media can’t kill India’s colonial mindset if it bows before VIPs
-
‘यह रोड मुसलमानों के लिए नहीं’: सहारनपुर में खुलेआम मजहबी नफरत का प्रदर्शन
-
न्यूज़ इंडिया में फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए नियुक्ति और पुराने कर्मचारियों की छुट्टी का असली सच