Assembly Elections 2022
यूपी चुनाव 2022: गोरखपुर के बदहाल बुनकर क्यों चुनावी मुद्दा नहीं हैं
न्यूज़लॉन्ड्री की चुनावी यात्रा उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में है. दो साल पहले तक गोरखपुर और उसके आसपास के इलाकों में दस हजार से ज्यादा हथकरघा और पावरलूम हुआ करते थे. जहां पर कई तरह के कपड़ों का बनाया जाता था और नेपाल भेजा जाता था. कोरोना और लॉकडाउन के कारण हथकरघा के मालिकों ने इन्हे बंद कर दिया और पावरलूम को बेच दिया. इसके कारण यहां पर काम करने वाले मजदूरों को बेरोजगारी की मार झेलनी पड़ी. इलाके की करीब ढाई लाख से ज्यादा आबादी हथकरघा के उद्योग पर निर्भर थी. हमने हथकरघा के मालिकों और मजदूरों से इस उद्योग की स्थित और समस्याओं को समझने की कोशिश की है.
उबैदुर्रहमान बताते हैं, "इस लॉकडाउन में मैंने अपना उद्योग बंद कर दिया. मेरे पास छह लूम थे, जो कि मैंने बेच दिए. हम माल खरीद कर खुद कपड़े बनाते और बेचते थे. कांग्रेस की सरकार में हमारी बिरादरी आगे बढ़ रही थी लेकिन भाजपा के आने के बाद धर्म और जातिवाद पर जोर दिया गया. जिससे तमाम लोगों के अहम मुद्दे पीछे छूट गए. हमारा कारोबार भी डूबता चला गया. जब हमारी पूंजी खत्म होने लगी तो हमने मारवाड़ी लोगों के यहां मजदूरी करनी शुरू कर दी और समय के साथ हमारी मजदूरी भी खत्म होती चली गई."
वहीं हेशामुल हसन बताते हैं, "कोरोना की वजह से कपड़े की सप्लाई बंद कर दी गई. सरकार ने भी माल की सप्लाई को लेकर कोई निर्देश नहीं दिए. हमारा करोड़ों रूपए का सामान खराब हो गया है. अगर उस सामान का हमें उचित दाम मिल जाता तो हम कोई दूसरा काम खोल लेते.”
एक अन्य शख्स कहते हैं, "जब हम किसी भी पार्टी का घोषणा पत्र देखते हैं तो उसमें बुनकर के लिए कुछ नहीं होता. हमें उम्मीद थी कि चुनाव आ रहे हैं शायद कोई पार्टी बुनकर के लिए काम करेगी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. इसलिए अब उम्मीद भी खत्म हो गई है.”
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