Assembly Elections 2022
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: निषाद पार्टी के 14 उम्मीदवारों में से 9 भाजपा नेता
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में निषाद पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) शामिल हैं. गठबंधन में इन दोनों दलों को भाजपा ने कितनी सीटें दी हैं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं आई, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपना दल(एस) को 16-18 और निषाद पार्टी को 14-15 सीटें मिली हैं.
13 फरवरी तक निषाद पार्टी ने 14 तो अपना दल (एस) ने 15 उम्मीदवारों की सूची जारी की है. दोनों पार्टियों ने इसकी जानकारी अपने आधिकरिक ट्विटर अकाउंट पर दी है.
निषाद पार्टी ने उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची 30 जनवरी को जारी की थी. पार्टी ने कालपी से छोटे सिंह, कटेहरी से अवधेश द्विवेदी, तमकुहीराज से असीम कुमार तो अतरौलिया से प्रशांत सिंह को टिकट देने की घोषणा की.
उम्मीदवारों की दूसरी सूची दो फरवरी को आई. इस बार चौरी चौरा से सरवन निषाद, हंडिया से प्रताप सिंह राहुल, करछना से पीयूष रंजन निषाद, सैदपुर से सुभाष पासी, मेंहदावल से अनिल कुमार त्रिपाठी और सुल्तानपुर सदर से राज प्रसाद उपाध्याय का नाम उम्मीदवार के रूप में जारी किया गया.
तीसरी सूची पांच फरवरी को आई. बांसडीह से केतकी सिंह, शाहगंज से रमेश सिंह और नवतना से ऋषि त्रिपाठी को निषाद पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया. वहीं चौथी सूची 10 फरवरी को आई, जिसमें सिर्फ एक उम्मीदवार की घोषणा की गई. ऐसे में कुल मिलाकर अब तक निषाद पार्टी की तरफ से 14 उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है. आपको बता दें कि ये तमाम सूची पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के हस्ताक्षर से जारी की गई हैं.
हर सूची में सबसे ऊपर लिखा होता है- उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव, 2022 हेतु राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के प्रत्याशियों की सूची.
संजय निषाद ने हर बार उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए यह दावा तो किया कि ये निषाद पार्टी के प्रत्याशी हैं, लेकिन न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि निषाद पार्टी ने अब तक जिन 14 नामों की घोषणा की है, उसमें से नौ भाजपा के नेता हैं. जिन 14 उम्मीदवारों की घोषणा हुई है, उसमें से सात भाजपा के तो सात निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह से मैदान में हैं.
पहली सूची
निषाद पार्टी ने की पहली सूची में चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हुई. न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि इसमें से दो उम्मीदवार भाजपा के नेता है. इस सूची में पहला नाम छोटे सिंह का है. इन्हें जालौन जिले के कालपी विधानसभा से उम्मीदवार बनाया गया है, सिंह दरअसल भाजपा नेता हैं. बहुजन समाज पार्टी से 2007 में विधायक बने सिंह अक्टूबर 2021 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. वह निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं.
2017 में कालपी सीट, भाजपा के कुंवर नरेंद्र पाल सिंह ने जीत दर्ज की थी.
पार्टी ने अंबेडकर नगर जिले के कटेहरी विधानसभा क्षेत्र से अवधेश कुमार द्विवेदी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. द्विवेदी 2017 विधानसभा चुनाव में यहीं से भाजपा के उम्मीदवार थे, हालांकि चुनाव हार गए थे. द्विवेदी का फेसबुक भी उनके भाजपा नेता होने की गवाही देता है. 30 जनवरी तक द्विवेदी के किसी भी पोस्टर में निषाद पार्टी का कोई जिक्र नहीं था. हर जगह भाजपा नेता के तौर पर उनकी पहचान नजर आती है. द्विवेदी, निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स में भी इन्हें भाजपा नेता ही बताया गया है.
दूसरी सूची
2 फरवरी को निषाद पार्टी ने छह उम्मीदवारों की सूची जारी की. न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि इसबार घोषित तीन उम्मीदवार भाजपा के नेता हैं, वहीं बाकी दो निषाद पार्टी से हैं.
प्रयागराज के करछना विधानसभा सीट पर निषाद पार्टी ने पीयूष रंजन 'निषाद' को उतारा है. पीयूष भी उत्तर प्रदेश भाजपा के कार्यसमिति के सदस्य हैं. ये 2017 में करछना से ही भाजपा के उम्मीदवार थे, हालांकि इन्हें हार का सामना करना पड़ा था. पीयूष का नाम भले ही निषाद पार्टी के उम्मीदवारों की सूची में शामिल है लेकिन अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक ये भाजपा के ही चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं.
इस सूची में सुभाष पासी का नाम गाजीपुर जिले के सैदपुर विधानसभा क्षेत्र से निषाद पार्टी के उम्मीदवार के रूप में है. समाजवादी पार्टी से लगातार दो बार विधायक रहे सुभाष पासी नवंबर 2021 में भाजपा शामिल हुए थे. हालांकि भाजपा की सदस्यता लेने से पहले ही, सपा ने सुभाष पासी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया था. पीयूष की तरह सुभाष पासी भी कमल चुनाव चिन्ह के ही साथ मैदान में हैं.
निषाद पार्टी ने संतकबीर नगर के मेंदाहवल से अनिल कुमार त्रिपाठी का नाम बतौर उम्मीदवार घोषित किया. 2012 में पीस पार्टी और 2017 में बसपा से चुनाव लड़ चुके त्रिपाठी, मई 2019 में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की मौजूदगी में भाजपा की सदयस्ता ग्रहण की थी. त्रिपाठी के फेसबुक पर 23 जनवरी तक निषाद पार्टी में होने का कोई जिक्र तक नहीं नजर आता है. त्रिपाठी भी भाजपा के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं.
2017 में मेंदाहवल सीट से भाजपा के राकेश सिंह बघेल चुनाव जीते थे. ऐसा लगता है कि भाजपा ने अपने विधायक का टिकट काटकर यह सीट निषाद पार्टी को दी, पर सच तो यह है कि चुनाव भाजपा के नेता ही लड़ रहे हैं.
तीसरी सूची
7 फरवरी को निषाद पार्टी ने उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी की. जिसमें तीन उम्मीदवारों की घोषणा की गई. तीनों ही उम्मीदवार भाजपा नेता हैं.
बलिया के बांसडीह से निषाद पार्टी ने केतकी सिंह को उम्मीदवार बनाया है. हकीकत यह है कि केतकी सिंह 2012 में भाजपा से और 2017 में भाजपा से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ चुकी हैं. दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि 2018 में भाजपा में इनकी दोबारा वापसी हुई. सिंह भले ही उम्मीदवार निषाद पार्टी की हैं, लेकिन भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल के साथ मैदान में हैं. बांसडीह से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोविंद चौधरी चुनाव जीतते रहे हैं.
निषाद पार्टी ने जौनपुर के शाहगंज विधानसभा से रमेश सिंह को प्रत्याशी बनाया है. रमेश सिंह, अपना दल (एस) से प्रतापगढ़ के सांसद रहे हरिवंश सिंह के पुत्र हैं. 26 जनवरी तक सिंह खुद का परिचय, पूर्व ब्लाक प्रमुख खुटहन - भारतीय जनता पार्टी (भावी विधायक पद प्रत्याशी, शाहगंज) लिखते थे. हालांकि अब वे अपना दल के उम्मीदवार हैं. यहां से सपा सरकार में मंत्री रहे शैलेन्द्र यादव ललई चुनाव जीतते रहे हैं. सिंह निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं.
महराजगंज के नौतनवा से निषाद पार्टी ने ऋषि त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. त्रिपाठी भाजपा के जिला महामंत्री हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सीट से भाजपा कभी जीत नहीं पाई है. वर्तमान में यहां से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमन मणि त्रिपाठी निर्दलीय विधायक हैं.
त्रिपाठी निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह, खाने की थाली पर चुनाव मैदान में हैं.
चौथी सूची
निषाद पार्टी ने अपनी चौथी सूची 11 फरवरी को जारी की. इस सूची में केवल एक ही प्रत्याशी, कुशीनगर के खड्डा विधानसभा क्षेत्र से विवेकानंद का नाम था. विवेकानंद पांडेय भी भाजपा के ही नेता हैं. इनके फेसबुक काउंट के मुताबिक वे कुशीनगर के जिला महमंत्री हैं.
एक फेसबुक लाइव के दौरान, पत्रकार ने सवाल किया कि भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में आपने लम्बा वक्त गुजारा है. निषाद पार्टी की तरफ से गठबंधन के प्रत्याशी हैं. क्या मुद्दे हैं? इसके जवाब में पांडेय कहते हैं, ‘‘जहां तक भाजपा का मुद्दा रहा. हमारा संकल्प पत्र हम लोगों का जारी है. जो भाजपा का संकल्प पत्र है उसी को पूरा करना है.’’
पत्रकार ने अगला सवाल किया कि यहां पहले भी भाजपा के विधायक थे. उनसे क्या छूट गया जिसे आप पूरा करेंगे. इस पर पांडेय कहते हैं, ‘‘जो अधूरे काम हैं उसे पूरा करना है. बड़े भाई थे वो. यहां तीन चीज मुख्य हैं, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य.’’
पांडेय निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में है. पत्रकार ने चुनाव चिन्ह को लेकर भी सवाल किया तो वे कहते हैं, ‘‘पार्टी का ही गठबंधन धर्म है. हमारे हर बूथ पर कार्यकर्ता हैं. हमें लग रहा है कि ज्यादातर लोग अब जान गए हैं. हमारे जो बूथ अध्यक्ष और कार्यकर्ता हैं, उनके माध्यम से सब तक पहुंच जाएगा. भाजपा गठबंधन के बारे में पूरा प्रदेश जानता है.’’
बाकी बचे पांच उम्मीदवार कौन हैं?
अब तक आपने देखा कि निषाद पार्टी की तरफ से घोषित 14 में से 9 उम्मीदवार भाजपा के ही नेता हैं. बाकी बचे पांच उम्मीदवारों में से एक निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे सरवन निषाद हैं. निषाद पार्टी के प्रदेश संयोजक सरवन को गोरखपुर जिले की चौरी चौरा से उम्मीदवार बनाया गया है. सरवन भी कमल चुनाव चिन्ह से ही मैदान में हैं.
निषाद पार्टी ने सुल्तानपुर सदर से राज प्रसाद उपाध्याय को अपना उम्मीदवार बनाया है. उपाध्याय 2012 और 2017 में बसपा से चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि इन्हें हार का सामना करना पड़ा था. कहने को तो राजबाबू निषाद पार्टी के उम्मीदवार हैं लेकिन वे कमल के चुनाव चिन्ह पर मैदान में हैं.
समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक प्रशांत सिंह 'राहुल' निषाद को निषाद पार्टी ने प्रयागराज के हंडिया से उम्मीदवार घोषित किया है. प्रशांत सिंह के पिता महेश नारायण 2012 में समाजवादी पार्टी से हंडिया विधायक बने थे. उनका निधन 2013 में हो गया. जिसके बाद उपचुनाव हुए और प्रशांत विधायक बने. हालांकि 2017 में पार्टी ने इन्हें टिकट नहीं दिया. जिसके बाद ये निषाद पार्टी में शामिल हो गए. ये निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह से मैदान में हैं.
कुशीनगर के तमकुहीराज विधानसभा से डॉ. असीम कुमार राय को निषाद पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया. इस सीट से 2017 में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू विधायक चुने गए थे. राय भाजपा के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं.
आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से निषाद पार्टी ने इंजीनियर प्रशांत कुमार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है. सिंह, निषाद पार्टी के चुनाव चिन्ह से मैदान में हैं.
निषाद पार्टी का क्या कहना है?
निषाद पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव यादव ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, ‘‘गठबंधन में निषाद पार्टी को मिली 15 सीटों में से पांच हमने भाजपा को दी हैं. हमने अपने पांच विश्वासपात्र उम्मीदवार भाजपा को दे दिए. ऐसे ही भाजपा के विश्वासपात्र हमारे सिंबल पर लड़ रहे हैं, क्योंकि कल को जो भी स्थिति होती है, उसमें हमारा गठबंधन न टूटे.’’
यह थोड़ी हैरान करने वाली बात है. हमने आगे पूछा कि जिन 14 उम्मीदवारों की सूची अब तक पार्टी ने जारी की है, उसमें से नौ भाजपा के नेता हैं. इसमें से कुछ नेताओं को राजीव भाजपा का मानते हैं. बाकी के नामों पर इधर उधर घुमाने वाला जवाब देते हैं. वे कहते हैं, ‘‘जो भी उम्मीदवार हमारे चुनाव चिन्ह से मैदान में हैं, उन्होंने हमारी पार्टी की सदस्यता ली है. बिना सदस्यता लिए वे उम्मीदवार हो ही नहीं सकते हैं.’’
राजीव आगे कहते हैं, ‘‘हमें इस विधानसभा चुनाव में जीतना है. जो जीत लाकर देगा उसे उम्मीदवार बनाया जाएगा. हमारे पास कई ऐसी सीट भी हैं, जो भाजपा 2017 विधानसभा चुनाव के समय एक अच्छी लहर के बावजूद नहीं जीत पाई. हमने वो सीटें चुनी हैं, जहां भाजपा बेहतर परफॉर्मेंस नहीं की है. चाहे नौतनवा हो या शाहगंज. हमने जीतने के इरादे से टिकट दिया है. ऐसे में मायने नहीं रखता कि वो भाजपा से आए हैं या निषाद पार्टी से. हमारे सिंबल पर लड़ रहा है तो हमारा व्यक्ति है, उनके सिंबल पर लड़ रहा तो उनका व्यक्ति है.’’
निषाद जाति की राजनीति करने वाली निषाद पार्टी ने अब तक जारी 14 उम्मीदवारों में से सिर्फ दो ही निषाद जाति के व्यक्तियों को टिकट दिया है. इसमें से एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे हैं. इसको लेकर हमारे सवाल पर राजीव कहते हैं, ‘‘हमने दो निषाद, एक पासी, चार ब्रह्मण और पांच ठाकुर को टिकट दिया है. हमने कई सीटों पर निषाद समाज के कई कद्दावर नेताओं से संपर्क किया. वे नेता तो जो दूसरे दलों में हैं और उन्हें टिकट नहीं मिला है. उनसे कहा कि आप आकर चुनाव लड़िए, लेकिन जब व्यक्ति ही नहीं आना चाहे तो क्या कर सकते हैं. जरूरी नहीं है कि सभी सीटों पर निषाद उतार देते. हमें देखना है कि हम जीत कैसे रहे हैं.’’
हालांकि यह वास्तविकता भी है कि कई सीटें जो निषाद पार्टी को मिली हैं, 2017 में वहां से भाजपा जीती थी.
वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान इसको लेकर कहते हैं, ‘‘सारा मामला भरोसे का है. चुनाव के समय निजी हितों को देखकर जो गठबंधन होता है, उसमें भरोसे की कमी होती है.’’
वहीं इसको लेकर स्वतंत्र पत्रकार समीरात्मज मिश्र कहते हैं, ‘‘जो गठबंधन हुआ है, उसमें दोनों की अपनी विवशता थी. निषाद पार्टी को ज्यादा सीटें चाहिए थीं और भाजपा का था कि उसके ज्यादा से ज्यादा लोग चुनाव जीतें. यहां सीटें तो निषाद पार्टी को दे दीं. निषाद पार्टी को लगा कि हमारे चुनाव चिन्ह पर लड़ रहे हैं. हकीकत में लड़ तो भाजपा के नेता रहे हैं.’’
मिश्र आगे कहते हैं, ‘‘अगर हंग एसेंबली हो जाती है तो ये विधायक, जो भाजपा के प्रति समर्पित हैं, वो भाजपा के साथ ही जाएंगे. निषाद पार्टी छोटा दल है. ऐसे में वहां एंटी डिफेक्शन लॉ लागू भी न हो, क्योंकि हो सकता है कि उनकी संख्या उतनी न हो. हालांकि इसका दूसरा पहलू भी होता है. हंग एसेंबली की स्थिति में ये विधायक भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होंगे. कोई और अगर सरकार बनाने की स्थिति में रहे, तो टूटकर उधर भी जा सकते हैं.’’
(तहज़ीब-उर रहमान के सहयोग से)
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