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एनएल चर्चा 191: चीन का कब्जा, कासगंज, कफील खान और कंगना
एनएल चर्चा के इस अंक में कासगंज में पुलिस हिरासत में युवक की मौत, लखीमपुर मामले की जांच में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, डॉक्टर कफील खान की बर्खास्तगी, त्रिपुरा हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों, पत्रकारों समेत 100 से अधिक लोगों पर लगा यूएपीए, पद्मश्री सम्मान के बाद कंगना रनौत का विवादित बयान, समीर वानखेड़े और नवाब मालिक के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप, प्रदूषित यमुना नदी में मनाया गया छठ पर्व और चीन के भारत में अतिक्रमण जैसे विषयों का जिक्र हुआ.
इस बार चर्चा में बतौर मेहमान पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह मौजूद रहे. इसके अलावा न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस और सह संपादक शार्दूल कात्यायन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
चर्चा की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश में चीन द्वारा गांव बसाने के मुद्दे से हुई. अतुल कहते हैं, "भारत सरकार ने एक हफ्ते बाद यह प्रतिक्रिया दी है कि वह चीन के इस क़दम का विरोध करती है और भारत की भूमि पर ऐसे किसी भी निर्माण का पुरज़ोर खंडन करती है. अब तक हमारे सामने लद्दाख या अक्साई चीन को लेकर यह जानकारी थी कि वहां पर चीन ने क़ब्ज़ा कर रखा है लेकिन अरुणाचल प्रदेश में सरकार ने पहली बार परोक्ष रूप से चीन के क़ब्ज़े की बात स्वीकार की है.”
इस मुद्दे पर अतुल, सूर्य प्रताप से सवाल करते हैं, "क्या सरकार इस चीज़ को डाउनप्ले कर रही है? अगर चीन अरुणाचल प्रदेश में घुस गया है तो सरकार का बयान यह होना चाहिए कि चीन ने जो अतिक्रमण किया है हम उसे वापस लेंगे, लेकिन बात यह हो रही है कि जो चीन ने जो किया है हम उसका विरोध करते है और वह अवैध है. तो क्या यह सरकार की चतुराई है?"
जवाब में सूर्यप्रताप कहते हैं, "अमेरिका की जो वार्षिक मिलिट्री रिपोर्ट है, उसे पेंटागन यूएस कांग्रेस को सौंपती है. उसकी सत्यता को कोई चुनौती नहीं दे सकता. उसमें कहा गया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में गांव बनाया है और जो विवादित क्षेत्र है वहां पर बनाया है. इस बात की विश्वसनीयता को चैलेंज करना या इसका खंडन करना बहुत मुश्किल है क्योंकि वह सैटेलाइट इमेज पर आधारित है और इसके पीछे काफी जांच की जाती है.”
वह आगे कहते हैं, “चाहे वह अक्साई चीन का मामला हो या गलवान वैली का और अब अरुणाचल प्रदेश का, सरकार हमेशा ही ‘डिनायल मोड’ में रहती है. अगर सरकार ने स्वीकार कर लिया तो वह छप्पन इंच का सीना, वह लाल आंख और सर्जिकल स्ट्राइक वाला नैरेटिव फेल हो जाएगा. यह सरकार इनकार ही करेगी या तो सरकार बदले तब सच्चाई पता चलेगी. जब तक यह सरकार है, सच पर पर्दा ही रहेगा."
इसी मामले पर बात करते हुए शार्दूल कहते हैं, "वाक़ई यह सरकार का इनकार न करने वाला इनकार है, कुछ महीने पहले एनडीटीवी की रिपोर्ट आई थी उसमें भी यही दावा किया गया था कि सैटेलाइट की तस्वीरों से लगता है कि वहां गांव जैसा कुछ बस गया है जिसे सरकार ने सिरे से ख़ारिज कर दिया था अब पेंटागन की रिपोर्ट में भी वही बातें सामने आई हैं. सरकार ने एक बार भी नहीं कहा कि हम प्रमाणिकता से कहते हैं कि वहां ऐसा कुछ नहीं है."
मेघनाद अपनी टिप्पणी देते हुए कहते हैं, "स्पष्ट रूप से इससे इनकार नहीं किया जा सकता. अभी उत्तर प्रदेश चुनाव आ रहे हैं वहां पर राष्ट्रवाद बड़ा मुद्दा बनने वाला है. आपने देखा होगा अभी योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की बात की और उसका काफी ढिंढोरा पीटा. इसका फायदा चुनाव में उठाएंगे. लेकिन अगर इन्होंने (सरकार) अब अरुणाचल प्रदेश की खबर को बड़ा होने दिया तो यह सरकार के पक्ष में नहीं होगा. इसीलिए सरकार इस पर बात भी नहीं करना चाहती. हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहां यदि आपके सामने कोई खबर नहीं आएगी तो इसका मतलब है वह घटना घटित ही नहीं हुई. ऐसे में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि इस खबर को सामने न आने दें.”
इसके अलावा कंगना रनौत के देश की आज़ादी को लेकर दिए गए बयान पर भी विस्तार से चर्चा हुई. पूरी बातचीत सुनने के लिए हमारा यह पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइमकोड
00 : 00 - इंट्रो
1:07 : 1:39 - जरूरी सूचना
1:40 : 9:43 - हेडलाइंस
9:44 : 14:18 - अरुणाचल प्रदेश में चीन के बढ़ते क़दम
14:21: 32:08 - कंगना रनौत का बयान
32:17: 51:45 - कासगंज मामला और उत्तर प्रदेश की पुलिस पर बढ़ते संदेह
51:46: 1:06:29 - डॉक्टर कफील की बर्खास्तगी
1:06:40 सलाह और सुझाव
पत्रकारों की राय, क्या देखा, पढ़ा और सुना जाए.
मेघनाद
त्रिपुरा हिंसा पर आयुष तिवारी की ग्राउंड रिपोर्ट
कंगना रनौत के विवादित बयान पर अन्विति सिंह का लेख
एनडी वियर की किताब - प्रोजेक्ट हेल मैरी
शार्दूल कात्यायन
एयरफोर्स मैगज़ीन में चीन और ताइवान संबंधों पर प्रकाशित रिपोर्ट
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अतुल चौरसिया
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प्रोड्यूसर- लिपि वत्स
एडिटिंग - उमराव सिंह
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह /तस्नीम फातिमा
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