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सिद्दीकी कप्पन चार्जशीट: जी श्रीदाथन और व्हाट्सएप नाम का एक सूत्र

न्यूज़लॉन्ड्री के द्वारा पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर चल रहे मामले पर आधारित सीरीज का यह तीसरा भाग है, आप पहला और दूसरा भाग भी पढ़ सकते हैं.

कप्पन व उनके साथ तीन अन्य लोगों को 5 अक्टूबर 2020 को हाथरस जाते हुए मथुरा में टोल प्लाजा पर यूपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. 7 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार कप्पन के खिलाफ, धारा 124ए (राजद्रोह), 153ए (वैमनस्य फैलाना) और धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) के साथ-साथ यूएपीए और आईटी एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया.

बचाव पक्ष के वकील मधुवन दत्त चतुर्वेदी के द्वारा आरोप पत्र के अवलोकन के आधार पर न्यूज़लॉन्ड्री को पता चला है कि यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स या एसटीएफ, इंडस स्क्रोल्स नाम की वेबसाइट के प्रधान संपादक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी पत्रिका ऑर्गेनाइजर के एसोसिएट संपादक जी श्रीदाथन के एक बयान पर काफी हद तक निर्भर रही. अपनी गिरफ्तारी से महीनों पहले कप्पन ने श्रीदाथन को मानहानि का एक नोटिस भेजा था.

कप्पन को पीएफआई से जोड़ना

18 नवंबर 2020 को कप्पन के मामले के जांच अधिकारी ने अपनी दैनिक डायरी में एक एंट्री की, जिसमें उन्होंने लिखा कि कप्पन के लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच में डॉक्यूमेंट फोल्डर में एक कानूनी नोटिस की प्रति मिली है. यूपी एसटीएफ ने इस कानूनी नोटिस को कप्पन की जांच करने के कारण के रूप में पेश किया है, जिन पर इस्लामिक एजेंडा बढ़ाने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नाम की संस्था के लिए काम करने का आरोप है. हालांकि कप्पन ने पीएफआई से अपना कोई भी संबंध होने से लगातार इंकार किया है.

श्रीदाथन के नाम यह नोटिस, उन्हें तुरंत एक लेख को हटाने के लिए कहता है क्योंकि वह लेख मानहानि के बराबर है. यह देखना बाकी है कि क्या अदालत इस दस्तावेज को कप्पन की जांच के लिए पर्याप्त कारण मानती है.

अधिवक्ता अभिनव सेखरी कहते हैं, "किसी मुकदमे में, कोई भी दस्तावेज कथानक के हिसाब से प्रासंगिक हो सकता है. इस नजरिए से अगर देखें तो इसके कानूनी नोटिस होने से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन किसी कानूनी संवाद के, किसी मुकदमे में सबूत के रूप में मान्य होने में कुछ खास अड़चनें हो सकती हैं."

कप्पन के वकील विल्स मैथ्यूज ने कहा कि उनके मुवक्किल का पीएफआई से सीमित तौर पर केवल पत्रकार के रूप में लेना देना था. मैथ्यूज ने कहा, "वे (कप्पन) एक पत्रकार हैं और पत्रकार होने के नाते उन्हें समाज में हर तरह के व्यक्ति से मिलने का अधिकार प्राप्त है."

कप्पन का मानहानि का दावा

वह कानूनी नोटिस जिसने यूपी एसटीएफ की जिज्ञासा बढ़ाई, वह कप्पन ने श्रीदाथन को 5 अप्रैल 2020 को भेजा था, जिसकी वजह इंडस स्क्रोल्स में छपा एक लेख था जिसमें दावा किया गया था कि कप्पन "जामिया विश्वविद्यालय के दो छात्रों की मौत की झूठी खबर फैलाने में और पीएफआई से मिले पैसों की मदद से हिंदू विरोधी खबरें प्रचारित करने में लिप्त थे." जिस घटना का जिक्र हो रहा है वह 15 दिसंबर 2019 की है, जब दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया के कैंपस पर धावा बोल दिया था, जिसमें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 125 लोग घायल हो गए थे.

यह लेख इंडस स्क्रोल्स पर 1 मार्च 2020 को प्रकाशित हुआ जिसका शीर्षक था "पॉपुलर फ्रंट के फंड और सिद्दीकी [sic] दोस्तों ने खबर दंगे पैदा किए."

लेख में आरोप लगाया कि, "सिद्दीकी ने, मलयालम मीडिया में दो जामिया छात्रों के पुलिस से सामने में गोली लगने से मौत होने की खबर प्रकाशित होने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की." उसमें यह दावा भी किया गया कि पीएफआई "केरल में हिंसा भड़काने" की योजना बना रही थी और कप्पन "अपने प्रभाव और धनराशि का उपयोग मलयालम मीडिया में हिंदू विरोधी खबरें पैदा करने" के लिए कर रहे थे.

इंडस स्क्रोल्स का लेख आगे यह भी कहता था कि "सिद्दीक कप्पन के प्रभाव" के चलते, "आईबी अफसर अंकित शर्मा और दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल रतन लाल की निर्मम हत्याओं की खबरों को मलयालम मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिली."

कप्पन के द्वारा श्रीदाथन को भेजे गए कानूनी नोटिस में कप्पन की तत्कालीन वकील निशा अंबानी ने उनके और पीएफआई के बीच किसी भी संबंध होने से इंकार कर दिया. नोटिस में कहा गया था, "यह शर्मनाक और निंदनीय है कि आपके जैसा एक प्रकाशन, इस तरह का एक अपमानजनक लेख चला रहा है जो अपने आप में 'झूठी खबर' है." उसमें इंडस स्क्रोल्स के लेख को तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया क्योंकि वह मानहानि के बराबर था. न्यूज़लॉन्ड्री को पता चला है कि वह लेख उस समय नहीं हटाया गया, हालांकि कप्पन इस मामले को आगे नहीं ले गए.

श्रीदाथन का बयान

कप्पन के लैपटॉप में कानूनी नोटिस मिलने के बाद यूपी एसटीएफ ने श्रीदाथन से संपर्क किया. 18 नवंबर 2020 को जांच अधिकारी की डायरी की एंट्री में लिखा है कि टेलीफोन पर हुई बातचीत में, श्रीदाथन ने "कप्पन और केयूडब्ल्यूजे (केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्टस्) पर गंभीर आरोप लगाए." अपनी गिरफ्तारी के समय कप्पन केयूडब्ल्यूजे की दिल्ली इकाई के सेक्रेटरी थे.

जांच अधिकारी के साथ अपनी शुरुआती बातचीत के दौरान श्रीदाथन ने यह आरोप भी लगाया कि कप्पन के "पीएफआई से तार जुड़े हैं" और "वह पीएफआई की विचारधारा को बढ़ाने के लिए पत्रकार के भेष में" काम करते हैं. इसके बाद श्रीदाथन ने केयूडब्ल्यूजे के द्वारा सरकारी निधि के कथित दुरुपयोग को लेकर शिकायतों का जिक्र किया और कहा कि वह यूपी एसटीएफ की जांच में सहयोग करेंगे.

श्रीदाथन इंडस स्क्रोल्स नाम की वेबसाइट के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं, और ट्विटर पर उनका परिचय कहता है कि वह आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर के एसोसिएट संपादक भी हैं. ऑर्गेनाइजर अपुष्ट खबरों को चलाने के लिए भी जाना जाता है. 2016 में ऑर्गेनाइजर ने उत्तर प्रदेश के कैराना से हिंदुओं के पलायन की एक कवर स्टोरी की थी. इस खबर को कई मीडिया संस्थानों ने गलत साबित कर दिया था, जिनमें से एक न्यूज़लॉन्ड्री भी था.

इंडस स्क्रोल्स अपने आपको फेसबुक पर लाभ रहित मीडिया उद्यम बताता है और उसकी टैगलाइन "हम मूल तक राष्ट्रवादी हैं" है. यूपी एसटीएफ के आरोप पत्र में श्रीदाथन से जुड़े प्रकाशनों के दक्षिणपंथी विचारधारा की तरफ झुकाव का कोई जिक्र नहीं है.

यूपी एसटीएफ को श्रीदाथन के द्वारा दिए गए वक्तव्य की शुरुआत इससे होती है, "सिद्दीक कप्पन दिल्ली में पीएफआई के एजेंडे को बढ़ाने के लिए रह रहा था. इसमें देश में दरार पैदा करने के लिए सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काना शामिल है." इसके बाद वे यह दावा भी करते हैं कि कप्पन ने यह कहकर "झूठी खबरें फैलाने की कोशिश की", कि दिसंबर 2019 में पुलिस की फायरिंग में जामिया के तीन छात्रों की मौत हो गई थी.

लेकिन कप्पन ने ऐसा कुछ भी रिपोर्ट नहीं किया था.

श्रीदाथन ने आगे यह दावा भी किया कि कप्पन की जामिया के छात्र प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़पों की खबरों का परिणाम, "15 और 16 दिसंबर को केरल में प्रदर्शनों के रूप में सामने आया." बयान में यह भी था कि "जामिया छात्रों की मौत की झूठी खबर" को लेकर एक समाचार, ऑर्गेनाइजर के द्वारा 16 दिसंबर 2019 को चलाया गया.

दिसंबर 2019 में दिल्ली पुलिस ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन कर रहे जामिया छात्रों के ऊपर फायरिंग से इनकार किया था, लेकिन सफदरजंग हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने एनडीटीवी को बताया की प्रदर्शनकारियों को गोली लगने के घावों के साथ भर्ती किया गया. बाद में दिल्ली पुलिस की एक जांच में यह पाया गया कि पुलिस के दो लोगों ने उस‌ दिन तीन गोलियां चलाईं. गोलियों के घावों से किसी भी मौत की खबर नहीं मिली.

27 नवंबर 2020 को रिकॉर्ड किए गए एक और बयान में श्रीदाथन ने दावा किया कि कप्पन जब मलयालम अखबार थेजस के खाड़ी अंक के लिए रिपोर्टर थे, तब 2011 में की गई एक कवर स्टोरी में ओसामा बिन लादेन, जो सबसे कुख्यात आतंकवादी था को "अल्लाह की राह पर चलने वाला एक शहीद" बताया गया. आरोपपत्र में कवर पेज का केवल एक अनुवाद शामिल है जिसमें बिन लादेन की फोटो और कुरान से शहीदी का एक वाक्य लिखा है. ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह दिखाए कि यह खबर कप्पन के द्वारा लिखी गई.

एक 'झूठी खबर योजना'

एक और पत्रकार जो मलयालम टीवी न्यूज़ चैनल एशियानेट में रिपोर्टर हैं, का जिक्र श्रीदाथन के बयान में है. उन्होंने दावा किया है कि एशियानेट रिपोर्टर एक पीएफआई समर्थक है और वह फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान झूठी खबरें फैलाने में शामिल था.

एशियानेट के एक कर्मचारी ने, अपनी पहचान गुप्त रखने का निवेदन करते हुए इस आरोप को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "क्या यह मजाक है? केवल वही रिपोर्टिंग केंद्र को अच्छी नहीं लगी जब उस रिपोर्टर ने अपने लाइव प्रसारण में दिल्ली पुलिस की भूमिका का जिक्र किया."

मलयालम न्यूज़ चैनल मीडिया वन को भी श्रीदाथन ने कथित "झूठी खबर योजना" का हिस्सा बताया. उन्होंने दावा किया कि मीडिया वन के "एक दूसरे कट्टरवादी इस्लामी समूह, जमात-ए-इस्लामी से तार जुड़े हुए हैं."

अपने बयान को सत्यापित करने के लिए, श्रीदाथन ने एशियानेट और मीडिया वन के फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों के कवरेज और मार्च 2020 में सूचना व प्रसारण मंत्रालय के द्वारा दोनों चैनलों पर 48 घंटे के प्रतिबंध का उल्लेख किया. मंत्रालय के अनुसार दोनों चैनलों ने 1995 के केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन अधिनियम का उल्लंघन किया.

दोनों चैनलों के दंगों के कवरेज और प्रतिबंध का कप्पन के खिलाफ मामले या पीएफआई और जमात-ए-इस्लामी से कोई भी संबंध से क्या लेना देना है, यह स्पष्ट नहीं है. खबर में गलती हो जाने के कुछ और उदाहरण हो सकते हैं, लेकिन कप्पन और इन दोनों चैनलों के बीच कोई सीधा संबंध दिखाई नहीं पड़ता.

न्यूजलॉन्ड्री ने एशियानेट और मीडिया वन के संपादकों से उनकी टिप्पणी लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया. उनकी तरफ से जवाब आने पर यहां जोड़ दिया जाएगा.

व्हाट्सएप नाम का एक सूत्र

न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में, श्रीदाथन ने कहा कि कप्पन पर हमला करने वाली इंडस स्क्रोल्स की कहानी की शुरुआत व्हाट्सएप से हुई.

उन्होंने बताया, "एक पत्रकारों के व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक झूठा मैसेज भेजा गया की दो तीन छात्रों को दिल्ली पुलिस ने गोली मारी है. जल्द ही, एक मय्यत नमस्कारम् (शोक सभा) त्रिवेंद्रम में आयोजित की गई. कई मीडिया संस्थानों ने इस झूठी खबर को खूब चलाया. यह जानबूझकर सामाजिक विद्वेष पैदा करने के लिए किया गया. हमारे अनुसार जिस ग्रुप से यह मैसेज भेजा गया उसके प्रबंधकों में से एक कप्पन भी था."

लेकिन उन्हें उस व्हाट्सएप ग्रुप का नाम याद नहीं आया और उन्होंने कहा कि वह रिपोर्टर से पता करके बताएंगे, जो इंडस स्क्रोल्स को छोड़कर जा चुका है.

यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पास कप्पन को पीएफआई से जुड़ने के सबूत मौजूद हैं, श्रीदाथन ने उत्तर दिया, "मैं खुद पत्रकार रह चुका हूं और मेरे सूत्रों के अनुसार, हमें विश्वास है कि कप्पन पीएफआई के लिए काम करता था."

जिन प्रकाशनों में श्रीदाथन काम करते हैं उनके वैचारिक झुकाव और कप्पन के अपनी गिरफ्तारी से महीनों पहले श्रीदाथन और इंडस स्क्रोल्स पर मानहानि का आरोप लगाने के बावजूद, यूपी एसटीएफ श्रीदाथन को एक विश्वसनीय गवाह के रूप में देखती है. यह पूछने पर कि अदालत श्रीदाथन के वक्तव्यों को किस तरह देख सकती है, अधिवक्ता अभिनव सेखरी ने कहा, "विश्वसनीयता एक महत्वपूर्ण मामला है और इसमें एक पहलू व्यक्तिपरक भी है, अदालत किसी गवाह पर कितना निर्भर करेगी यह केवल उस न्यायाधीश का निर्णय है."

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