Media
राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद पत्रकारों ने कहा- ‘अमित मालवीय ने झूठ ही नहीं महाझूठ बोला’
केंद्र सरकार ने एक बार फिर रसोई गैस की कीमतों में 25 रुपए की वृद्धि कर दी है. इसके अलावा लगातार पेट्रोल, डीजल के दामों में भी इजाफा हो रहा है. जिसके चलते कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की. लेकिन यह प्रेस कांफ्रेंस बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के एक ट्वीट के बाद विवादों में आ गई.
प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘2014 में रसोई गैस की कीमत 410 रुपए प्रति सिलेंडर थी, जो आज 885 रुपए प्रति सिलेंडर हो गई है. पेट्रोल की कीमत 2014 में 71.51 रुपए थी, जो आज 101.34 रुपए यानी 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वहीं तब डीजल 57.28 रुपए प्रति लीटर था जो आज 88.77 रुपए हो गया है.’’
अक्सर होता है कि राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद सरकार के कोई मंत्री या बीजेपी के प्रवक्ता प्रेस कांफ्रेंस करके जवाब देते हैं और उनके आरोप को निराधार बताते हैं. हालांकि बुधवार को ऐसा नहीं हुआ. लेकिन प्रेस कांफ्रेंस खत्म होने के थोड़ी देर बाद ही बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट किया.
मालवीय ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया कि राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस में सवाल पूछने के कारण एक पत्रकार को बाहर निकाल दिया. वे लिखते हैं, ‘‘आज एक कांग्रेस बीट के अनुभवी पत्रकार, जो लंबे समय से कांग्रेस पार्टी को कवर कर रहे हैं, को राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस से केवल एक सवाल पूछने के कारण बाहर कर दिया गया. क्या इसी प्रेम और सहिष्णुता की राजनीति की बात करते हैं आरजी?’’
मालवीय का आरोप कितना सच?
अमित मालवीय के ट्वीट के बाद इसपर चर्चा होने लगी कि आखिर किस पत्रकार के साथ ऐसा किया गया. ऐसा हुआ भी या नहीं क्योंकि अमित मालवीय पर अक्सर झूठ फ़ैलाने का आरोप लगता रहा है.
सीएए प्रदर्शन के दौरान भी मालवीय ने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया था कि मुस्लिम महिलाओं को प्रदर्शन में आने के बदले हर रोज 500 रुपए दिए जा रहे हैं. इसके आधार पर तमाम मीडिया चैनलों ने यह खबर चलाई थी और प्राइम टाइम शो किए गए. बाद में न्यूज़लॉन्ड्री और ऑल्ट न्यूज़ के साझा पड़ताल में यह आरोप गलत साबित हुआ. वह वीडियो बीजेपी से जुड़े तुगलकाबाद के एक शख्स ने मजाक में बनाया था, जिसे मालवीय ने शेयर किया और बिना जांच के चैनलों ने चला दिया था.
वहीं अभी हाल ही में मालवीय द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो के आधार पर बनाई गई खबर को लेकर रिपब्लिक टीवी और न्यूज़ 18 को शर्मिंदगी का समाना करना पड़ा. दरअसल मालवीय ने उमर खालिद का एक एडिटेड वीडियो साझा किया था. जिसके आधार पर इन दोनों मीडिया संस्थानों ने खबर चलाई और दिल्ली पुलिस ने उसी के आधार पर खालिद को आरोपी बना दिया.
चूंकि अमित मालवीय का कहना है कि सवाल पूछने के कारण पत्रकार को निकाला गया. इसकी सत्यता जानने के लिए सबसे आसान तरीका था, प्रेस कांफ्रेंस का वीडियो देखना जो कांग्रेस के यू-ट्यूब पर मौजूद है. 27 मिनट के इस वीडियो में सबसे पहले कांग्रेस के मीडिया प्रमुख रणदीप सुरजेवाला आते हैं और पत्रकारों का स्वागत करते हुए, प्रेस कांफ्रेंस के विषय में बताकर माइक राहुल गांधी को पकड़ा देते हैं.
00:50 सेकेंड से राहुल गांधी बोलना शुरू करते हैं और 11:00 मिनट तक बोलते हैं. इस दौरान राहुल गांधी जीएसटी का नया फूल फॉम, पेट्रोल, डीजल और गैस बताते हुए कहते हैं, “इंटरनेशनल मार्केट में गैस प्राइस, डीजल प्राइस, पेट्रोल पाइस, ऑयल प्राइस गिर रहे हैं और हिंदुस्तान में बढ़ते जा रहे हैं. दूसरी तरफ हमारे जो एसेट हैं, उनको बेचा जा रहा है. 23 लाख करोड़ रुपए सरकार ने ‘जीडीपी’ से कमाया है. जीडीपी वो ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट नहीं, जीडीपी मतलब गैस, डीजल, पेट्रोल. मेरा सवाल है कि ये 23 लाख करोड़ रुपए गए कहां?”
अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में मीडिया में बात करने के बाद राहुल गांधी पत्रकारों से सवाल पूछने के लिए कहते हैं. इसके बाद रणदीप सुरजेवाला एक-एक कर पत्रकारों के सवाल लेते हैं और राहुल गांधी उसका जवाब देते हैं. सबसे पहले अरुण गिल सवाल करते हैं. फिर विजय लक्ष्मी, एनडीटीवी के उमाशंकर सिंह, आज तक से मौसमी सिंह, दैनिक जागरण से एक पत्रकार सवाल करते हैं. सबसे आखिरी में एबीपी न्यूज़ के जैनेन्द्र कुमार सवाल करते हैं. इन तमाम सवालों का जवाब देकर राहुल गांधी लौट जाते हैं.
इन 27 मिनट में कोई भी ऐसी घटना नहीं होती नजर आती जिसका दावा अमित मालवीय अपने ट्वीट में करते दिख रहे हैं.
प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद रहे पत्रकार क्या कहते हैं
न्यूज़लॉन्ड्री ने बुधवार शाम प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद रहे कुछ पत्रकारों से बात की. उसमें भी यही सामने आया कि मालवीय के दावे में कोई सच्चाई नहीं है.
एक नेशनल टीवी के रिपोर्टर जो बीते करीब पांच सालों से कांग्रेस कवर कर रहे हैं वे कहते हैं, ‘‘अमित मालवीय ने झूठ ही नहीं महाझूठ बोला. ऐसा कोई वाकया हुआ ही नहीं. हमारे किसी पत्रकार साथी को निकाला जाता और हम लोग चुप रह जाते. यह तो मुमकिन नहीं है.’’
एक चर्चित न्यूज़ वेबसाइट के लिए बीते तीन सालों से कांग्रेस कवर कर रहीं पत्रकार प्रेस कांफ्रेस शुरू होने के एक घंटे पहले पहुंच गई थीं. न्यूज़लॉन्ड्री से कहती हैं, ‘‘राहुल गांधी की पीसी से पहले सुरक्षाकर्मी जांच करते हैं, जिस कारण मैं कुछ देर पहले ही चली गई थी. जो बात अमित मालवीय ने लिखी है वो हमारे सामने तो नहीं हुई जबकि मैं वहां अंत तक मौजूद थी. मेरी समझ से मालवीय झूठ बोल रहे हैं. अक्सर ही लोग प्रेस कांफ्रेस में क्रॉस सवाल करते हैं, लेकिन कल पीसी के विषय के इर्द-गिर्द ही सवाल किया गया. कोई हो-हल्ला नहीं हुआ.’’
वहां मौजूद रहे स्वतंत्र पत्रकार आदेश रावल कहते हैं, ‘‘मैं आधे घंटे पहले से वहां मौजूद था. जिनको मौका मिला उन्होंने सवाल किया. एक दो लोग सवाल नहीं पूछ पाए तो उन्होंने सुरजेवाला से बोला. जिसपर सुरजेवाला ने कहा कि अगली प्रेस कांफ्रेस में सवाल आपसे ही शुरू करेंगे. इसके अलावा वहां कुछ हुआ ही नहीं. दरअसल मालवीय झूठ बोलकर निकल गए और लोग सफाई दे रहे हैं. हम आप बात कर रहे हैं. किसी को सवाल पूछने के कारण निकाला गया यह 2000 प्रतिशत झूठी खबर फैलाई गई है.’’
मालवीय के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया कोऑर्डिनेटर संजीव सिंह ने लिखा, ‘‘बेवकूफ़ों को जवाब ना देना ही समझदारी है.’’
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए सिंह कहते हैं, ‘‘मालवीय के ट्वीट में कोई सच्चाई नहीं है. ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई है. झूठी खबर है. वो उस रिपोर्टर का नाम बताये, जिनके साथ ऐसा हुआ है.’’
इस पूरे मामले पर अमित मालवीय का पक्ष लेने के लिए हमने कई बार उन्हें फोन किया, लेकिन हमारी बात नहीं हो पाई. हमने उन्हें कुछ सवाल व्हाट्सएप किए हैं. अगर उनका जवाब आता है तो खबर में जोड़ दिया जाएगा.
Also Read
-
Hey Cockroaches, while you were protesting, Godi-Jeevis were eating Melody 🪲 TV Newsance 343
-
Hafta 590: The Norway question that shook Modi’s tour and Press Freedom
-
CJP can endure the meme cycle. But can it articulate what kind of India it’s fighting for?
-
Your favourite viral column might have been written by AI. Now what?
-
A trail of grief, little accountability: The Marion Biotech story after 68 children deaths