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दैनिक जागरण को छोड़ अन्य अखबारों ने आईटी रेड को दी पहले पेज पर जगह
हिंदी पट्टी के सबसे बड़े अखबार में से एक दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश के चैनल भारत समाचार पर गुरुवार सुबह से इनकम टैक्स ने छापेमारी की. इस दौरान विभाग ने दोनों संस्थानों के दफ्तरों के अलावा मलिकों के घर और कर्मचारियों के घर पर भी छापेमारी की.
जिस तरह आपातकाल के समय अख़बारों को छपने से पहले सरकार की अनुमति लेनी पड़ती थी, कुछ इसी तरह दैनिक भास्कर में हुआ. भास्कर पर रेड को लेकर कोई भी खबर प्रकाशित करने से पहले आयकर विभाग के अधिकारियों को दिखाना पड़ रहा था. जिसके बाद ग्रुप ने अपनी अन्य खबरों में भी लिखना शुरू कर दिया कि, “भास्कर दफ्तर में बैठे अधिकारियों का निर्देश है कि छापे से जुड़ी हर खबर दिखाकर पब्लिश करनी है.''
मीडिया की आवाज दबाने के मुद्दे पर संसद भी बाधित रहा. वहीं सोशल मीडिया पर लोग समाचार संस्थानों के पक्ष में खड़े रहे और इनकम टैक्स की रेड को गलत बताया. इसलिए हमने सोचा क्यों ना हिंदी और अंग्रेजी के अखबारों का विश्लेषण कर लिया जाए कि, किस अखबार ने आयकर विभाग के छापे वाली खबर को अपने अखबार में कहां जगह दी है.
दैनिक जागरण -
हिंदी पट्टी का सबसे बड़ा अखबार माने जाने वाला दैनिक जागरण ने हमेशा की तरह ही निराश किया. सत्ता के गठजोड़ के कारण अखबार ने, एक अन्य अखबार (भास्कर) पर पड़े छापे को भी प्रमुखता से प्रकाशित नहीं किया. जागरण ने अपने 10वें पेज अर्थ जागरण पर सबसे नीचे एक छोटे से कॉलम में “दैनिक भास्कर समूह पर आयकर का छापे” को लेकर खबर प्रकाशित की.
इतने बड़े अखबार पर उसकी रिपोर्टिंग को लेकर पड़े आयकर छापे पर जागरण ने अपने संपादकीय में भी कुछ नहीं लिखा.
हिंदुस्तान -
हिंदुस्तान अखबार ने दैनिक भास्कर समूह पर पड़े छापे को पहले पेज पर जगह तो दी लेकिन एक छोटे से कॉलम में. पहले पेज पर आठ लाइन में लिखी इस खबर में भारत समाचार के बारे में भी बताया गया है. साथ ही अनुराग ठाकुर का बयान भी प्रकाशित किया गया है. बाकी विस्तार में 11वें नंबर पर बताया गया है. जैसे की भास्कर के 30 परिसरों पर छापा, भारत समाचार चैनल पर छापा और भाजपा विधायक के परिसर पर कार्रवाई.
हालांकि हिंदुस्तान ने संपादकीय में आयकर छापे को लेकर कुछ नहीं लिखा.
एनबीटी अखबार -
टाइम्स ग्रुप के हिंदी अखबार एनबीटी अखबार ने आयकर छापे वाली खबर को अखबार के दूसरे पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है. आधे पेज की इस खबर में भास्कर ग्रुप के साथ-साथ भारत समाचार के बारे में भी बताया गया है. साथ ही विपक्ष द्वारा कहे गए मीडिया को दबाने की कोशिश वाले बयान को भी प्रकाशित किया.
एनबीटी ने अपनी खबर में विस्तार से कार्रवाई को प्रकाशित किया है, साथ ही विपक्ष और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया द्वारा छापे को लेकर किए गए ट्वीट का भी जिक्र किया है.
दूसरे पेज पर प्रमुखता से खबर छापने वाले एनबीटी ने भी संपादकीय में दोनों मीडिया संस्थानों को लेकर कुछ नहीं लिखा.
अमर उजाला -
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से निकलने वाले अमर उजाला ने “दो मीडिया संस्थानों पर आयकर छापे” शीर्षक से पहले पेज पर इस खबर को प्रकाशित किया है. संतुलित दिख रही इस खबर में भास्कर अखबार, भारत समाचार और अनुराग ठाकुर का बयान प्रकाशित किया गया है.
अखबार ने अपने दूसरे सबहेड में लिखा है, “दूसरी लहर में प्रशासन की खामियां की थी उजागर” इसके नीचे सूत्रों के हवाले से बताया गया कि, कोविड में की गई रिपोर्टिंग के कारण यह छापा पड़ा है. साथ ही यूपी चुनाव को भी छापे का एक कारण बताया गया है.
पहले पेज के साथ ही 13वें पेज पर भी इस खबर को प्रकाशित किया गया है.
जनसत्ता -
देश के सबसे पुराने अखबारों में से एक जनसत्ता ने भी भास्कर पर पड़े आयकर के छापे को पहले पन्ने पर जगह दी है. दोनों मीडिया संस्थानों पर पड़े छापे के बारे में इस खबर में बताया गया है. पहले पन्ने पर बहुत विस्तार से नहीं बल्कि कार्रवाई को लेकर हुई जानकारी के बारे में ही बताया गया है.
वहीं दूसरे पेज पर इस खबर की अन्य जानकारी दी गई है. अन्य अखबारों की तरह ही जनसत्ता ने भी इस पर कोई संपादकीय नहीं लिखा.
अंग्रेजी अखबार - इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिंदू
दैनिक भास्कर और भारत समाचार दोनों हिंदी भाषी हैं, इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि, हिंदी अखबार इस मामले पर अच्छे से कवरेज करेंगे और मीडिया को दबाने को लेकर की जा रही इन कोशिशों पर कड़े शब्दों में निंदा करेंगे. लेकिन वैसा कहीं नहीं देखने को मिला.
कवरेज के मामले में हिंदी अखबारों के आगे निकल गए अंग्रेजी अखबार.
इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिंदू, इन तीनों ही अखबारों ने भास्कर और भारत समाचार पर पड़े छापे को पहले पेज पर प्रमुखता से जगह दी है.
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी हेडलाइन में भास्कर की कोविड रिपोर्टिंग को लेकर, लाइन का उपयोग किया है. वहीं जनसत्ता में यह गायब था. वहीं हिंदू ने विपक्ष के बयान को सबहेडिंग दी है कि, मीडिया की आवाज को दबाया जा रहा है.
हिंदी अखबारों की तरह ही अंग्रेजी के इन अखबारों में भी संपादकीय में आयकर विभाग के छापे को लेकर कुछ नहीं लिखा गया
(नोट: उपरोक्त सभी अखबारों के दिल्ली संस्करण का विश्लेषण किया है.)
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