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एडिटर्स गिल्ड: 'स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए किया जा रहा सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल'
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने दैनिक भास्कर और भारत समाचार पर पड़े छापे पर बयान जारी किया है. गिल्ड ने बयान में कहा, “वह स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए सरकारी एजेंसियों को एक जबरदस्त उपकरण के रूप में इस्तेमाल किए जाने' पर चिंतित है.”
संपादकों के सबसे बड़े संगठन गिल्ड ने एक बयान में कहा, ‘‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया 22 जुलाई को देश के प्रमुख समाचार पत्र समूह दैनिक भास्कर के साथ-साथ लखनऊ के एक समाचार चैनल भारत समाचार के कार्यालयों पर आयकर विभाग के छापों को लेकर चिंतित है. दैनिक भास्कर द्वारा कोविड-19 महामारी पर की गई उस गहन रिपोर्टिंग की पृष्ठभूमि के खिलाफ ये छापेमारी की गई है, जिसमें सरकारी अधिकारियों द्वारा कुप्रबंधन और मानवीय जीवन को हुए भारी नुकसान को सामने लाया गया था.’’
गिल्ड ने आगे कहा, ‘‘हम इसलिए चिंतित है क्योंकि सरकारी एजेंसियों को स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. यह पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर पत्रकारों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं की व्यापक निगरानी पर हालिया मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए और अधिक परेशान करने वाला है.”
बता दें कि कल से की जा रही छापेमारी अभी तक चालू है. भारत समाचार के एंकर और पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने ट्वीट करते हुए कहा, “कल सुबह 8 बजे से आज दूसरे दिन की दोपहर हो चुकी है. आयकर विभाग की छापेमारी भारत समाचार के दफ्तर, संपादक और डायरेक्टर्स के घरों पर चल रही है. आयकर विभाग को अभी तक कुछ नहीं मिला है. सच परेशान हो सकता है पराजित नहीं.”
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