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एनएल इंटरव्यू: राहुल पंडिता, उनकी किताब द लवर बॉय ऑफ बहावलपुर और कश्मीर
"जो लोग ये कहते हैं कि मैंने अपनी किताब में एक आतंकवादी का महिमामंडन किया है और उसे लवर बॉय की उपाधि दी है, मैं उनसे कहना चाहूंगा कि लवर बॉय की अंग्रेजी में परिभाषा जानने की कोशिश करें." हाल ही में प्रकाशित द लवर बॉय ऑफ बहावलपुर किताब के लेखक राहुल पंडिता ने शार्दूल कात्यायन से बातचीत में यह बात कही.
राहुल ने पाकिस्तान और कश्मीरी आतंकवादियों में फर्क बताते हुए कहा, "पाकिस्तान से आने वाले आतंकी और कश्मीर में तैयार किए गए आतंकियों की ट्रेनिंग में बहुत बड़ा फर्क होता है. उदाहरण के तौर पर बुरहान वानी (कश्मीर में पनपा हुआ आतंकी) और उमर फारूक (पाकिस्तान का आतंकी) को लिया जा सकता है. जहां एक ओर बुरहान वानी का जिंदगी जीने का ढंग माचिस फ़िल्म के गाने 'चप्पा चप्पा चरखा चले' में दर्शाए गए दृश्यों की तरह है, वहीं दूसरी तरफ उमर फारूक एक उच्च प्रशिक्षित आतंकी है, जो ड्रोन टेक्नोलॉजी और एंटी एयरक्राफ्ट गन जैसी चीजों में माहिर है. साथ ही उमर एक प्रभावी वक्ता भी है और लोग उसकी बातों से प्रभावित हो जाते हैं जबकि बुरहान वानी के साथ ऐसा नहीं है."
किताब के बारे में राहुल कहते हैं, "पाठकों को सिर्फ हीरो के बारे में ही नहीं बल्कि विलेन के बारे में भी बताना चाहिए, पाठकों को यह बताना जरूरी है कि एक 20-22 साल का लड़का आतंकवादी कैसे बना और इतना कट्टरपंथी कैसे हुआ. पाठक तभी सही से जुड़ पाता है जब आप उसके सामने पूरी पृष्ठभूमि रखते हैं."
भारतीय स्टेट की असफलता के बारे में बात करते हुए पंडिता ने कहा, "जो लोग कश्मीर में भारतीय स्टेट के पक्ष में खड़े हैं, उन्हें स्टेट पूरी सुरक्षा नहीं दे पाया जबकि जिन्होंने भारत के हितों को नुकसान पहुंचाया है उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दी जाती है. ऐसा कहा जा सकता है कि ये भारतीय स्टेट की एक बड़ी कमी है."
इस दिलचस्प बातचीत के लिए पूरा इंटरव्यू देखे.
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