Khabar Baazi
‘सुल्ली डील्स’: पत्रकार फातिमा खान का फोटो और नाम इस्तेमाल करने पर एडिटर्स गिल्ड ने जारी किया बयान
पत्रकार फातिमा खान का फोटो और नाम 'सुल्ली डील्स' नामक एक एप पर गलत तरीके से उपयोग करने को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने निंदनीय कृत्य बताते हुए बयान जारी किया है.
गिल्ड ने अपने बयान में कहा है कि, "वह डिजिटल और सोशल मीडिया के महिला पत्रकारों के खिलाफ गलत उपयोग से बेहद चिंतित हैं. गिल्ड राष्ट्रीय महिला आयोग और जांच एजेंसियों को इस मामलों को उठाने की मांग करती है, ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके."
इस मामले पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर दोषी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. आयोग ने पुलिस से आरोपी के गिरफ्तार नहीं होने की स्थिति में उनकी गिरफ्तारी के लिए उठाए गए कदम और विस्तार से एक्शन टेकन रिपोर्ट देने के लिए कहा है.
वहीं कांग्रेस सांसद और संसदीय आईटी कमेटी के अध्यक्ष शशि थरुर ने भी इस मामले पर दिल्ली पुलिस को कार्रवाई करने को कहा है, साथ ही कहा है कि वह आईटी पैनल की बैठक में इस मामले को उठाएंगे.
पत्रकार फातिमा के अलावा कई अन्य मुस्लिम महिलाओं की फोटो इस वेबसाइट पर है. जिसे बोली लगाने के लिए रखा गया है. इस मामले पर कई पत्रकार फातिमा के पक्ष में खड़े हुए हैं जिन्होंने पुलिस को इस मामले पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.
बता दें कि यह वेबसाइट गिटहब पर बनी थी. गिटहब एक होस्टिंग प्लेटफॉर्म है जो अपने यूजर्स को व्यक्तिगत या प्रशासनिक नामों के तहत एप बनाने की अनुमति प्रदान करता है.
यूजर्स को इन एप्स को गिटहब मार्केट प्लेस में साझा करने या बेचने की भी अनुमति है. लेकिन 'सुल्ली डील्स' एप किसने बनाया, इस पर अभी भी गिटहब की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आया. हालांकि गिटहब के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर एरिका ब्रेशिया ने ट्विटर पर पुष्टि करते हुए बताया, कि एप को हटा दिया गया है.
Also Read
-
Uttarakhand ERO refused BJP worker’s bulk Form 7 objections. After ECI complaint, 5,359 were accepted
-
A BJP worker in Uttarakhand objected. Voters in Kichha who never knew him are off the roll
-
Inside Brazil’s divided democracy
-
The Starlink controversy explained: What an Indian licence can and can’t control
-
‘People scared of economics’: Sarthak Pradhan on your money, GST and Fiscal Fables