Khabar Baazi
पत्रकार दीप श्रीवास्तव ने न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्टर निधि सुरेश के खिलाफ किया मानहानि का केस
न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्टर निधि सुरेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. यह केस पत्रकार दीप श्रीवास्तव के आवेदन पर किया गया है.
दीप श्रीवास्तव ने जो मानहानि केस दायर किया है उसी को आधार बनाकर आईपीसी की धारा 500 और 501 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
निधि सुरेश के खिलाफ केस उनके ट्वीट को लेकर दर्ज किया गया है. हालांकि एफआईआर में नहीं बताया गया कि कौन से ट्वीट को लेकर यह केस दर्ज किया गया.
बता दें कि क्रिमिनल मानहानि केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट का नियम है कि शिकायतकर्ता को सबसे पहले मजिस्ट्रेट के सामने धारा 200 के तहत शिकायत दर्ज कराना होता है.
5 जुलाई को सुबह 11.07 बजे निधि सुरेश को जांच अधिकारी ने फोन कर कहा कि वह शाहजहांपुर आकर अपना बयान दर्ज कराएं. यह कॉल बिना किसी पूर्व नोटिस के की गई है.
उसी दिन फिर शाम को 6.05 मिनट पर निधि को दोबारा कॉल किया गया. इस बार कहा गया कि “वह पुलिस स्टेशन खुद आकर अपना बयान दर्ज कराएं.” जब निधि ने कहा की मैं उत्तर प्रदेश में नहीं दिल्ली में हूं, तब पुलिस अधिकारी ने कहा, “आप को यहां आना होगा”.
निधि ने 1 जुलाई को आईशा अल्वी पर एक रिपोर्ट की थी. आईशा ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में बताया कि मीडिया द्वारा मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद “परेशान” किया गया. अल्वी ने अपनी याचिका में कहा है, “मुझे एक नंबर से फोन कर धर्म परिवर्तन पर खबर लिखने की धमकी दी गई, और पैसों की मांग भी की गई. इस दौरान मुझसे जबरन 20 हजार रुपए लिए गए.”
अपनी रिपोर्ट में निधि ने लिखा हैं कि जब उन्होंने उस नंबर पर कॉल किया तो उसने खुद को “दीप श्रीवास्तव पत्रकार न्यूज 18” के तौर पर बताया.
रिपोर्ट में कहा गया हैं कि, "श्रीवास्तव ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में पैसे लेने की बात से इंकार किया गया. जब पूछा गया कि क्या शुरुआत में आईशा ने वीडियो बयान देने से इंकार कर दिया था. तब पत्रकार ने कहा, वह फोन पर बात नहीं कर सकते और कॉल काट दिया.”
Also Read
-
TV Newsance 323 | Distraction Files: India is choking. But TV news is distracting
-
‘Talks without him not acceptable to Ladakh’: Sonam Wangchuk’s wife on reality of normalcy in Ladakh
-
When media ‘solves’ terror cases, Kashmiris are collateral damage
-
Public money skewing the news ecosystem? Delhi’s English dailies bag lion’s share of govt print ads
-
Month after govt’s Chhath ‘clean-up’ claims, Yamuna is toxic white again