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एआरटीबीआई के विलय के बाद एनबीएफ बना सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन ने एसोसिएशन ऑफ रीजनल टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया (एआरटीबीआई) के साथ विलय करने का फैसला किया है. इस विलय के बाद वह देश में समाचार टेलीविजन चैनलों के व्यावसायिक हितों और संपादकीय स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करने वाला सबसे बड़ा संस्था बन गया.
एआरटीबीआई के साथ विलय के प्रस्ताव को 18 जून को एनबीएफ के गवर्निंग बोर्ड की बैठक में पारित किया गया. इस विलय के बाद क्षेत्रीय समाचार चैनलों और उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म को रेगुलेटरी नियमों को समझने और उनका पालन करने में मदद मिलेगी.
इस विलय पर एनबीएफ के अध्यक्ष अर्णब गोस्वामी ने कहा, “एआरटीबीआई के विलय से एनबीएफ देश में सबसे बड़ा प्रसारण संस्था बन गया है. जो कि मौजदूा ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन से दोगुना बड़ा है. एनबीएफ नए समाचार मानकों और संपादकीय मानकों को स्थापित करेगा.”
एसोसिएशन ऑफ रीजनल टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स ऑफ इंडिया के संस्थापक कार्तिकेय शर्मा ने कहा, “हम भारत के पहले मान्यता प्राप्त एसोसिएशन ऑफ़ रीजनल टेलीविज़न ब्रॉडकास्टर्स ऑफ़ इंडिया के एनबीएफ के साथ हुए विलय से खुश हैं.”
इस विलय पर एसोसिएशन ऑफ़ रीजनल टेलीविज़न ब्रॉडकास्टर्स ऑफ़ इंडिया के संयोजक राकेश शर्मा ने कहा, “एआरटीबीआई पिछले एक दशक से अधिक समय से सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर क्षेत्रीय चैनलों के मुद्दों के समाधान के लिए काम कर रहा है. क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्रसारकों के मुद्दे लगभग एक समान हैं. ऐसे में एआरटीबीआई का एनबीएफ में विलय के संस्था के मजबूत प्रदान करेगा. मुझे यकीन है कि यह पहल क्षेत्रीय चैनलों के कारण को मजबूत करेगी.”
बता दें कि एआरटीबीआई एकमात्र क्षेत्रीय समाचार प्रसारण संस्था है जो चैनलों कों नियमों का पालन कराने के लिए बने पैनल में शामिल है जिसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार से मान्यता प्राप्त है.
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