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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अनिल धारकर

74 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अनिल धारकर का ह्रदय की बीमारी के चलते निधन हो गया. उनके एक पूर्व सहयोगी ने बताया कि गुरुवार को मुंबई के एक अस्पताल में उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी.

पांच दशक से भी अधिक लंबे करियर में वह स्तंभकार और लेखक के रूप में सक्रिय रहे तथा फिल्म सेंसर बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य समेत कई अन्य पदों पर भी रहे. वह हर साल नवंबर में आयोजित होने वाले मुंबई अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के संस्थापक और निदेशक थे तथा साथ ही लिटरेचर लाइव के संस्थापक एवं निदेशक भी थे जो मुंबई में साल भर साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करता है.

अनिल धारकर कई प्रकाशनों के संपादक भी रहे जिनमें देबोनायर, मिड-डे, संडे मिड-डे, द इंडीपेंडेंट और द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया शामिल हैं. वह इंडियन एक्सप्रेस के स्तंभकार भी थे.

सोशल मीडिया पर कई वरिष्ठ पत्रकारों ने उनके निधन पर शोक जताया है. पत्रकार शोभा डे, कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर और लेखक प्रसून जोशी समेत कई अन्य लेखकों और पत्रकारों ने दुख जाहिर किया.

अनिल धारकर दूरदर्शन, चिल्ड्रन्स फिल्म सोसाइटी ऑफ इंडिया और भारत में फिल्मों के निर्माण के लिए कई फिल्म फंडों के सलाहकार बोर्डों के सदस्य रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है.

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