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पत्रकार के भुगतान संबंधी श्रम विभाग के आदेश को मानने से राजस्थान पत्रिका का इंकार
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर श्रम पदाधिकारी कार्यालय से मजीठिया के अनुसार 35 लाख रुपये बकाया पत्रकारों को देने के आदेश को पत्रिका प्रबंधन ने मानने से इंकार कर दिया है. अब इस केस की सुनवाई राज्य श्रम पदाधिकारी कार्यालय में की जाएगी. पत्रिका पर केस करने वाले एक पूर्व कर्मचारी ने न्यूज़लॉन्ड्री को यह जानकारी दी.
दरअसल कोरोनाकाल में राजस्थान पत्रिका ने अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना ही निकाल दिया था. पत्रिका प्रबंधन में कार्यरत पूनम चंद बनपेला ने अकारण सेवा से बर्खास्तगी और मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन न देने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी. प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जगदलपुर श्रम पदाधिकारी कार्यालय में यह सुनवाई हुई. तीन महीने बाद आए फैसले में श्रम पदाधिकारी ने आवेदक की मांग को उचित मानकर पत्रिका प्रबंधन को मजीठिया के अनुसार बकाया 35 लाख रूपए की राशि को एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया था. साथ ही इस बारे में कार्यालय को सूचित करने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन पत्रिका प्रबंधन ने इसे मानने से इंकार कर दिया है.
पत्रिका में 8 साल तक अपनी सेवाएं देने वाले पूनम चंद बनपेला ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “कोरोनाकाल में हमें नौकरी से निकाल दिया गया था, जिसके बाद हमने केस कर दिया. इस पर श्रम विभाग ने हमारे बीच उपरोक्त समझौता कराया था, जिसे पत्रिका ने मानने से इंकार कर दिया. इंकार करने के बाद अब यह समझौता निरस्त हो गया है. पत्रिका ने कहा कि हम पैसे नहीं देंगे आगे केस चलाओ. ये इतनी आसानी से पैसे नहीं देंगे. जब तक सुप्रीम कोर्ट की फटकार नहीं खाएंगे.”
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर श्रम पदाधिकारी कार्यालय से मजीठिया के अनुसार 35 लाख रुपये बकाया पत्रकारों को देने के आदेश को पत्रिका प्रबंधन ने मानने से इंकार कर दिया है. अब इस केस की सुनवाई राज्य श्रम पदाधिकारी कार्यालय में की जाएगी. पत्रिका पर केस करने वाले एक पूर्व कर्मचारी ने न्यूज़लॉन्ड्री को यह जानकारी दी.
दरअसल कोरोनाकाल में राजस्थान पत्रिका ने अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना ही निकाल दिया था. पत्रिका प्रबंधन में कार्यरत पूनम चंद बनपेला ने अकारण सेवा से बर्खास्तगी और मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन न देने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की थी. प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जगदलपुर श्रम पदाधिकारी कार्यालय में यह सुनवाई हुई. तीन महीने बाद आए फैसले में श्रम पदाधिकारी ने आवेदक की मांग को उचित मानकर पत्रिका प्रबंधन को मजीठिया के अनुसार बकाया 35 लाख रूपए की राशि को एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया था. साथ ही इस बारे में कार्यालय को सूचित करने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन पत्रिका प्रबंधन ने इसे मानने से इंकार कर दिया है.
पत्रिका में 8 साल तक अपनी सेवाएं देने वाले पूनम चंद बनपेला ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “कोरोनाकाल में हमें नौकरी से निकाल दिया गया था, जिसके बाद हमने केस कर दिया. इस पर श्रम विभाग ने हमारे बीच उपरोक्त समझौता कराया था, जिसे पत्रिका ने मानने से इंकार कर दिया. इंकार करने के बाद अब यह समझौता निरस्त हो गया है. पत्रिका ने कहा कि हम पैसे नहीं देंगे आगे केस चलाओ. ये इतनी आसानी से पैसे नहीं देंगे. जब तक सुप्रीम कोर्ट की फटकार नहीं खाएंगे.”
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