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एनएल चर्चा 151: अर्णब गोस्वामी का व्हाट्सप चैट और कृषि कानूनों पर अड़ी सरकार
एनएल चर्चा के 151वें एपिसोड में विशेष तौर पर अर्णब गोस्वामी और बार्क के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता की बातचीत के लीक हुए व्हाट्सप चैट पर बात हुई. साथ ही बाइडेन का राष्ट्रपति पद का शपथ ग्रहण, मणिपुर के गिरफ्तार दो पत्रकारों की दबाव के बाद रिहाई, परंजय गुहा के खिलाफ जारी वांरट और कृषि कानूनों पर डेढ़ साल की लिए रोक के लिए तैयार हुई सरकार आदि विषयों का भी विशेष जिक्र हुआ.
इस बार चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार सैकत दत्ता, न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस और सह संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
अतुल चर्चा की शुरूआत करते हुए कहते हैं, “यह बहुत ही मजेदार हैं कि जिस कानून को किसान पूरी तरह से खत्म करने की मांग कर रहे हैं, सरकार उसे डेढ़ साल के लिए टालने की बात कर रही है. क्या डेढ़ साल बाद यह कानून किसानों के लिए मान्य हो जाएगा. इसके पीछे क्या लॉजिक है, मैं यह नहीं समझ पाया? इस पर आप लोगो की क्या राय है.”
इसका जवाब देते हुए मेघनाथ कहते हैं, “जैसा हमने पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर बात की. मुझे लगता हैं कि सरकार रिपब्लिक डे के दिन होने वाली परेड को लेकर दवाब में है. टैक्ट्रर मार्च को सब मीडिया कवर करेंगे, तो इसलिए उससे पहले इसे खत्म करने की नीयत से ये सब हो रहा है.”
यहां अतुल हस्तक्षेप करते हुए कहते हैं, “सरकार की यह सोच भी हो सकती है कि एक बार अगर यह जमावड़ा और संगठन खत्म हो जाएगा तो फिर दोबारा से इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन नहीं जुट पाएगा. खासकर एक ऐसे संगठनों के लिए जिनकी न कोई पार्टी है और ना ही सरकार का समर्थन है. ऐसे में दोबारा से उनके लिए ऐसी भीड़ जुटाना मुश्किल होगा.”
इस मेघनाथ कहते हैं, “जब मैं बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर गया तो मुझे लगा कि थोड़ी भीड़ कम हुई है. लेकिन एक बात अच्छी लगी कि जैसे सरकार हेडलाइन मैनेज कर रही हैं उसी तरह किसान भी सरकार को जवाब देने के लिए उसी तरह के तौर तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं.”
यहां पर सैकत अपनी बात रखते हुए कहते हैं, “मुझे जो समझ में आता है, वह यह हैं कि सरकार थोड़ा समय देना चाहती है. अगर आप पहले देखे तो पाएंगे की सोशल मीडिया या संसद में होने वाले प्रोटेस्ट को सरकार दबा सकती है, लेकिन जब लोग सड़क पर आ जाते हैं तो सरकार बौखला जाती है. कई विपक्षी नेता बहुत सालों से बोलते आए हैं कि जब सरकार के पास पूर्ण बहुमत है तो ऐसे में सड़क पर आंदोलन करके ही सरकार पर दवाब बनाया जा सकता है.”
शार्दूल को चर्चा में शामिल करते हुए अतुल पूछते हैं कि, “यह जो सरकार की पूरी स्ट्रेटजी है किसानों से निपटने की. अभी तक सरकार यह परसेप्शन बना रही थी कि वह तो बातचीत कर रही है लेकिन किसान ही अड़े हुए है. हालांकि अब जिस तरह के प्रस्ताव आ रहे है, उससे यह लोगो को लगने लगा हैं कि सरकार की नीयत कुछ और है, वह झूठ बोल रही थी, यानी की परसेप्शन की लड़ाई में भी सरकार पीछे छूट रही है.”
इस प्रश्न का जवाब देते हुए शार्दूल कहते हैं, “परसेप्शन की जो लड़ाई है, सरकार वही लड़ रही है सिर्फ. सरकार को रैली से नहीं डर रही हैं बल्कि डर उसे इस बात का हैं कि कहीं उसके कार्यक्रम से ज्यादा दूसरे कार्यक्रमों को महत्व ना मिले. एक तरफ बातचीत हो रही है तो दूसरी तरफ सरकार के लोग ही किसानों को आतंकी, खालिस्तानी और देशद्रोही बोल रहे है. सवाल है कि अगर यह आंतकी हैं तो सरकार फिर इनसे बात क्यों कर रही है.”
इसके अलावा भी अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई साथ ही व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर भी पैनल ने विस्तार से अपनी राय रखी. इसे पूरा सुनने के लिए हमारा पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
1:24 - प्रस्तावना और हेडलाइन
3:46 - किसान आंदोलन
12:26 - तांडव फिल्म के खिलाफ दाखिल पीआईएल
20:50 - अर्णब पार्थो चैट
1:13:19 - सलाह और सुझाव
क्या देखा पढ़ा और सुना जाए.
मेघनाथ
द लाउडेस्ट वाइस फिल्म - डिज्जी हाटस्टार
अर्णब गोस्वामी के लीक चैट्स को पढ़े
टीआरपी स्कैम और आप टीआरपी को कैसे रिग कर सकते है - मेघनाथ का एक्सप्लेनर
सैकत
व्हेन दे सी अस - नेटफ्लिक्स सीरीज
शार्दूल कात्यायन
अनिल अश्वनी शर्मा की रिपोर्ट- बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों में ज्यादा खराब हैं आबो हवा
डीब्लू हिंदी पर कोरोना वैक्सीन को लेकर प्रकाशित लेख
बीजेपी के पूर्व सांसद श्याम चरण गुप्ता का दावा की तंबाकू से कैंसर का कोई लेनादेना नहीं
अतुल चौरसिया
अर्णब गोस्वामी के लीक चैट्स से संबधित न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट्स
डिस्कवरी प्लस पर मौजूद मैराडोना डॉक्यूमेंट्री
***
प्रोड्यूसर- आदित्य वारियर
रिकॉर्डिंग - अनिल कुमार
एडिटिंग - सतीश कुमार
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह.
एनएल चर्चा के 151वें एपिसोड में विशेष तौर पर अर्णब गोस्वामी और बार्क के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता की बातचीत के लीक हुए व्हाट्सप चैट पर बात हुई. साथ ही बाइडेन का राष्ट्रपति पद का शपथ ग्रहण, मणिपुर के गिरफ्तार दो पत्रकारों की दबाव के बाद रिहाई, परंजय गुहा के खिलाफ जारी वांरट और कृषि कानूनों पर डेढ़ साल की लिए रोक के लिए तैयार हुई सरकार आदि विषयों का भी विशेष जिक्र हुआ.
इस बार चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार सैकत दत्ता, न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस और सह संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
अतुल चर्चा की शुरूआत करते हुए कहते हैं, “यह बहुत ही मजेदार हैं कि जिस कानून को किसान पूरी तरह से खत्म करने की मांग कर रहे हैं, सरकार उसे डेढ़ साल के लिए टालने की बात कर रही है. क्या डेढ़ साल बाद यह कानून किसानों के लिए मान्य हो जाएगा. इसके पीछे क्या लॉजिक है, मैं यह नहीं समझ पाया? इस पर आप लोगो की क्या राय है.”
इसका जवाब देते हुए मेघनाथ कहते हैं, “जैसा हमने पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर बात की. मुझे लगता हैं कि सरकार रिपब्लिक डे के दिन होने वाली परेड को लेकर दवाब में है. टैक्ट्रर मार्च को सब मीडिया कवर करेंगे, तो इसलिए उससे पहले इसे खत्म करने की नीयत से ये सब हो रहा है.”
यहां अतुल हस्तक्षेप करते हुए कहते हैं, “सरकार की यह सोच भी हो सकती है कि एक बार अगर यह जमावड़ा और संगठन खत्म हो जाएगा तो फिर दोबारा से इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन नहीं जुट पाएगा. खासकर एक ऐसे संगठनों के लिए जिनकी न कोई पार्टी है और ना ही सरकार का समर्थन है. ऐसे में दोबारा से उनके लिए ऐसी भीड़ जुटाना मुश्किल होगा.”
इस मेघनाथ कहते हैं, “जब मैं बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर गया तो मुझे लगा कि थोड़ी भीड़ कम हुई है. लेकिन एक बात अच्छी लगी कि जैसे सरकार हेडलाइन मैनेज कर रही हैं उसी तरह किसान भी सरकार को जवाब देने के लिए उसी तरह के तौर तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं.”
यहां पर सैकत अपनी बात रखते हुए कहते हैं, “मुझे जो समझ में आता है, वह यह हैं कि सरकार थोड़ा समय देना चाहती है. अगर आप पहले देखे तो पाएंगे की सोशल मीडिया या संसद में होने वाले प्रोटेस्ट को सरकार दबा सकती है, लेकिन जब लोग सड़क पर आ जाते हैं तो सरकार बौखला जाती है. कई विपक्षी नेता बहुत सालों से बोलते आए हैं कि जब सरकार के पास पूर्ण बहुमत है तो ऐसे में सड़क पर आंदोलन करके ही सरकार पर दवाब बनाया जा सकता है.”
शार्दूल को चर्चा में शामिल करते हुए अतुल पूछते हैं कि, “यह जो सरकार की पूरी स्ट्रेटजी है किसानों से निपटने की. अभी तक सरकार यह परसेप्शन बना रही थी कि वह तो बातचीत कर रही है लेकिन किसान ही अड़े हुए है. हालांकि अब जिस तरह के प्रस्ताव आ रहे है, उससे यह लोगो को लगने लगा हैं कि सरकार की नीयत कुछ और है, वह झूठ बोल रही थी, यानी की परसेप्शन की लड़ाई में भी सरकार पीछे छूट रही है.”
इस प्रश्न का जवाब देते हुए शार्दूल कहते हैं, “परसेप्शन की जो लड़ाई है, सरकार वही लड़ रही है सिर्फ. सरकार को रैली से नहीं डर रही हैं बल्कि डर उसे इस बात का हैं कि कहीं उसके कार्यक्रम से ज्यादा दूसरे कार्यक्रमों को महत्व ना मिले. एक तरफ बातचीत हो रही है तो दूसरी तरफ सरकार के लोग ही किसानों को आतंकी, खालिस्तानी और देशद्रोही बोल रहे है. सवाल है कि अगर यह आंतकी हैं तो सरकार फिर इनसे बात क्यों कर रही है.”
इसके अलावा भी अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई साथ ही व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर भी पैनल ने विस्तार से अपनी राय रखी. इसे पूरा सुनने के लिए हमारा पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
1:24 - प्रस्तावना और हेडलाइन
3:46 - किसान आंदोलन
12:26 - तांडव फिल्म के खिलाफ दाखिल पीआईएल
20:50 - अर्णब पार्थो चैट
1:13:19 - सलाह और सुझाव
क्या देखा पढ़ा और सुना जाए.
मेघनाथ
द लाउडेस्ट वाइस फिल्म - डिज्जी हाटस्टार
अर्णब गोस्वामी के लीक चैट्स को पढ़े
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सैकत
व्हेन दे सी अस - नेटफ्लिक्स सीरीज
शार्दूल कात्यायन
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डीब्लू हिंदी पर कोरोना वैक्सीन को लेकर प्रकाशित लेख
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अतुल चौरसिया
अर्णब गोस्वामी के लीक चैट्स से संबधित न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट्स
डिस्कवरी प्लस पर मौजूद मैराडोना डॉक्यूमेंट्री
***
प्रोड्यूसर- आदित्य वारियर
रिकॉर्डिंग - अनिल कुमार
एडिटिंग - सतीश कुमार
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह.
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