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एनएल चर्चा 149: स्वदेशी वैक्सीन पर छिड़ी जंग और अमेरिकी संसद में भीड़ का हमला
एनएल चर्चा के 149वें एपिसोड में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा अमेरिकी संसद पर किया गया हमला, ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा दो वैक्सीन के आपात उपयोग की मंजूरी, किसान संगठनों द्वारा ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया, भारत सरकार ने बर्ड फ्लू के फैलाव की खबर आदि का विशेष जिक्र हुआ.
इस बार चर्चा में एनडीटीवी इंडिया के फॉरेन अफेयर एडिटर उमाशंकर सिंह, न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस और सह संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
वैक्सीन के मुद्दे पर अतुल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “पूरे विश्व में एक बार फिर से कोरोना को लेकर स्थिति गंभीर हो रही है. दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है, तो वही जापान में भी लॉकडाउन लगाना पड़ा.” भारत की बात करते हुए वो आगे कहते हैं “ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने यहां दो वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. पहली वैक्सीन हैं सीरम इंस्टीट्यूट की जो ऑक्सफ़ोर्ड जेनेका का स्वदेशी संस्करण है जिसकी वैक्सीन का नाम हैं कोविशील्ड, वहीं दूसरी वैक्सीन का निर्माण भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने किया है जिसका नाम हैं कोवैक्सीन.”
भारत बायोटेक के इस वैक्सीन की प्रभाव क्षमता को लेकर कई सवाल उठ रहे है. कुछ विशेषज्ञों का कहना हैं कि बिना तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किए, सरकार ने जल्दबाजी में इसे मंजूरी दे दी है. इन सबके बीच हमने देखा कि भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट के बीच एक कॉरपोरेट वार भी शुरू हो गया है. एक कंपनी ने दूसरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है बाकि कंपनियों की वैक्सीन पानी की तरह सुरक्षित है. इन बयानों से ऐसा लग रहा हैं वैक्सीन के बड़े बाजार और मुनाफ़े को देखते हुए दोनों कंपनियों में होड़ लग गई है. अतुल कहते हैं, “कोरोना वैक्सीन बहुत ही महत्वपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है, पूरे देश के नागरिकों को इसे लगना है इसलिए सरकार को या तो इसका पूरा वितरण अपने हाथ में ले लेना चाहिए या फिर इसकी निगरानी का एक कठोर और प्रभावी तंत्र बनाना चाहिए जो इस वैक्सीन के वितरण का काम देखे.”
मेघनाथ से सवाल करते हुए अतुल कहते है, “इन कंपनियों के बीच चल रही तकरार और भारत बायोटेक के ट्रायल डाटा पर उठ रहे सवालों पर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए क्योंकि वैक्सीन एक गंभीर मसला है, जिसके कई साइड इफैक्ट भी हो सकते है. आप की इस पर क्या राय है.”
मेघनाथ जवाब देते हुए कहते हैं, “जो कोविशील्ड वैक्सीन है उसके तीनों चरणों के डाटा आ चुका है. वहीं भारत बायोटेक का तीसरे चरणों के डाटा नहीं आया है. हमें समझना होगा कि तीन चरणों में कंपनियों पहले दो चरणों में मरीज की सुरक्षा और उनके इम्यूनिटी का टेस्ट होता है. कंपनी यह पता लगाती हैं कि मरीज के शरीर में वायरस से लड़ने की इम्यूनिटी बन रही है या नहीं. भारत बायोटेक को जो मंजूरी दी गई है वह आपातकाल में उपयोग की मंजूरी दी गई है जो की ट्रायल बेस पर है.”
मेघनाद कहते हैं, “जैसा की कई विशेषज्ञों ने बताया वितरण में सबसे पहले कोविशील्ड वैक्सीन को प्राथमिकता दी जाएगी. लेकिन प्रभाव की बात करे तो भारत बायोटेक के वैक्सीन को ज्यादा प्रभावी बताया जा रहा है. जहां तक बात हैं दोनों कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की तो दोनों कंपनियों ने एक बयान भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि दोनों वितरण में मिलकर काम करेंगे.”
यहां अतुल उमाशंकर को चर्चा में शामिल करते हुए कहते हैं, “यह सच है कि भारत बायोटेक ने इतने कम समय में वैक्सीन का निर्माण किया, जिसकी तारीफ की जानी चाहिए. भरोसा पैदा करने के लिए मीडिया की एक बड़ी भूमिका होती है, लेकिन जनता में वैक्सीन के प्रति विश्वास पैदा करने के लिए कंपनियां पत्रकारों का उपयोग कर रही हैं. यह संभवतः पहली बार होगा कि ये कंपनियां पत्रकारों को वैक्सीन लगा रही है जबकि विश्वास दिलाने काम नेताओं का है.”
उमाशंकर जवाब देते हुए कहते है, “यह आप पर निर्भर है कि आप वैक्सीन लगवाते हैं या नहीं. तीसरे चरण को लेकर वैक्सीन लग रहा है. लेकिन यहां एक चीज देखने को मिल रही है कि वैक्सीन लगाने के बाद लोग बोल रहे है बहुत अच्छी हैं जी. मानों यह गुड़ की भेली है जिसको खाने के बाद मुंह मीठा हो गया.”
उमाशंकर कहते हैं, “मान लीजिए मैं आज वैक्सीन लगवाता हूं, खासतौर पर भारत बायोटेक के वैक्सीन की बात रह रहा हूं, जिसके मुताबिक आप को वैक्सीन लगवाने के कई दिनों बाद तक मॉनिटर किया जाता है, उसके बाद आप को वैक्सीनेटेड माना जाता है. जिस तरह से वैक्सीन के निर्णाण में समय लिया गया उसी तरह इसके इस्तेमाल पर हमें समय देना चाहिए और जैसा आप ने कहा हमारी लीडरशिप को वैक्सीन लगवाकर विश्वास जताना चाहिए जैसा कई अन्य देशों में हुआ, वैसा हमारे देश में भी होना चाहिए.”
शार्दूल इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “ज्यादातर जानकारी आप लोगों ने दे दिया है, जहां तक दोनों वैक्सीन के अंतर की बात हैं तो कोविशील्ड वैक्सीन नए तरीके की वैक्सीन है जो प्रोटीन को कैप्चर करके बनाया गया है. जबकि कोवैक्सीन परंपरागत तरीके से तैयार की गई वैक्सीन है. डाटा का रिलीज ना होना बहुत बड़ी परेशानी है. जब लोग पहले से ही इतने परेशान हो उस समय में डाटा का होना उन्हें विश्वास दिलाता है. अब पता नहीं क्या कारण हैं कि सरकार ने बिना डाटा के सामने आए मंजूरी दे दी है.”
इसके अलावा भी अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई साथ ही अमेरिकी संसद में कई गई तोड़तोड़ पर भी पैनल ने विस्तार से अपनी राय रखी. इसे पूरा सुनने के लिए हमारा पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
1:05 - प्रस्तावना और हेडलाइन
4:47 - कोरोना वैक्सीन
26:08 - अमेरिकी संसद पर हमला
1:02:01 - सलाह और सुझाव
क्या देखा पढ़ा और सुना जाए.
मेघनाथ
प्रतीक गोयल की लव जिहाद रिपोर्ट
मेघनाथ का लव जिहाद एक्पेलेनर
शार्दूल कात्यायन
प्रतीक गोयल की लव जिहाद रिपोर्ट
मंजीत ठाकुर की न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी पर प्रकाशित रिपोर्ट
स्टीवन लेविटस्काय की किताब - हाउ डेमोक्रेसी डाय
डोनाल्ड ट्रंप पर ट्रेवर नोह का शो
उमाशंकर सिंह
अशोक कुमार पांडे की किताब - उसने गांधी को क्यों मारा
न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट्स को देखे, पढ़े और सुने
अतुल चौरसिया
अमेरिका की मौजूदा स्थिति पर प्रताप भानू मेहता का इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित लेख
***
प्रोड्यूसर- आदित्य वारियर
रिकॉर्डिंग - अनिल कुमार
एडिटिंग - सतीश कुमार
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह.
एनएल चर्चा के 149वें एपिसोड में डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा अमेरिकी संसद पर किया गया हमला, ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया द्वारा दो वैक्सीन के आपात उपयोग की मंजूरी, किसान संगठनों द्वारा ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया, भारत सरकार ने बर्ड फ्लू के फैलाव की खबर आदि का विशेष जिक्र हुआ.
इस बार चर्चा में एनडीटीवी इंडिया के फॉरेन अफेयर एडिटर उमाशंकर सिंह, न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस और सह संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
वैक्सीन के मुद्दे पर अतुल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “पूरे विश्व में एक बार फिर से कोरोना को लेकर स्थिति गंभीर हो रही है. दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया स्ट्रेन तेजी से फैल रहा है, तो वही जापान में भी लॉकडाउन लगाना पड़ा.” भारत की बात करते हुए वो आगे कहते हैं “ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने यहां दो वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है. पहली वैक्सीन हैं सीरम इंस्टीट्यूट की जो ऑक्सफ़ोर्ड जेनेका का स्वदेशी संस्करण है जिसकी वैक्सीन का नाम हैं कोविशील्ड, वहीं दूसरी वैक्सीन का निर्माण भारतीय कंपनी भारत बायोटेक ने किया है जिसका नाम हैं कोवैक्सीन.”
भारत बायोटेक के इस वैक्सीन की प्रभाव क्षमता को लेकर कई सवाल उठ रहे है. कुछ विशेषज्ञों का कहना हैं कि बिना तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किए, सरकार ने जल्दबाजी में इसे मंजूरी दे दी है. इन सबके बीच हमने देखा कि भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट के बीच एक कॉरपोरेट वार भी शुरू हो गया है. एक कंपनी ने दूसरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमारी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है बाकि कंपनियों की वैक्सीन पानी की तरह सुरक्षित है. इन बयानों से ऐसा लग रहा हैं वैक्सीन के बड़े बाजार और मुनाफ़े को देखते हुए दोनों कंपनियों में होड़ लग गई है. अतुल कहते हैं, “कोरोना वैक्सीन बहुत ही महत्वपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है, पूरे देश के नागरिकों को इसे लगना है इसलिए सरकार को या तो इसका पूरा वितरण अपने हाथ में ले लेना चाहिए या फिर इसकी निगरानी का एक कठोर और प्रभावी तंत्र बनाना चाहिए जो इस वैक्सीन के वितरण का काम देखे.”
मेघनाथ से सवाल करते हुए अतुल कहते है, “इन कंपनियों के बीच चल रही तकरार और भारत बायोटेक के ट्रायल डाटा पर उठ रहे सवालों पर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए क्योंकि वैक्सीन एक गंभीर मसला है, जिसके कई साइड इफैक्ट भी हो सकते है. आप की इस पर क्या राय है.”
मेघनाथ जवाब देते हुए कहते हैं, “जो कोविशील्ड वैक्सीन है उसके तीनों चरणों के डाटा आ चुका है. वहीं भारत बायोटेक का तीसरे चरणों के डाटा नहीं आया है. हमें समझना होगा कि तीन चरणों में कंपनियों पहले दो चरणों में मरीज की सुरक्षा और उनके इम्यूनिटी का टेस्ट होता है. कंपनी यह पता लगाती हैं कि मरीज के शरीर में वायरस से लड़ने की इम्यूनिटी बन रही है या नहीं. भारत बायोटेक को जो मंजूरी दी गई है वह आपातकाल में उपयोग की मंजूरी दी गई है जो की ट्रायल बेस पर है.”
मेघनाद कहते हैं, “जैसा की कई विशेषज्ञों ने बताया वितरण में सबसे पहले कोविशील्ड वैक्सीन को प्राथमिकता दी जाएगी. लेकिन प्रभाव की बात करे तो भारत बायोटेक के वैक्सीन को ज्यादा प्रभावी बताया जा रहा है. जहां तक बात हैं दोनों कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की तो दोनों कंपनियों ने एक बयान भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि दोनों वितरण में मिलकर काम करेंगे.”
यहां अतुल उमाशंकर को चर्चा में शामिल करते हुए कहते हैं, “यह सच है कि भारत बायोटेक ने इतने कम समय में वैक्सीन का निर्माण किया, जिसकी तारीफ की जानी चाहिए. भरोसा पैदा करने के लिए मीडिया की एक बड़ी भूमिका होती है, लेकिन जनता में वैक्सीन के प्रति विश्वास पैदा करने के लिए कंपनियां पत्रकारों का उपयोग कर रही हैं. यह संभवतः पहली बार होगा कि ये कंपनियां पत्रकारों को वैक्सीन लगा रही है जबकि विश्वास दिलाने काम नेताओं का है.”
उमाशंकर जवाब देते हुए कहते है, “यह आप पर निर्भर है कि आप वैक्सीन लगवाते हैं या नहीं. तीसरे चरण को लेकर वैक्सीन लग रहा है. लेकिन यहां एक चीज देखने को मिल रही है कि वैक्सीन लगाने के बाद लोग बोल रहे है बहुत अच्छी हैं जी. मानों यह गुड़ की भेली है जिसको खाने के बाद मुंह मीठा हो गया.”
उमाशंकर कहते हैं, “मान लीजिए मैं आज वैक्सीन लगवाता हूं, खासतौर पर भारत बायोटेक के वैक्सीन की बात रह रहा हूं, जिसके मुताबिक आप को वैक्सीन लगवाने के कई दिनों बाद तक मॉनिटर किया जाता है, उसके बाद आप को वैक्सीनेटेड माना जाता है. जिस तरह से वैक्सीन के निर्णाण में समय लिया गया उसी तरह इसके इस्तेमाल पर हमें समय देना चाहिए और जैसा आप ने कहा हमारी लीडरशिप को वैक्सीन लगवाकर विश्वास जताना चाहिए जैसा कई अन्य देशों में हुआ, वैसा हमारे देश में भी होना चाहिए.”
शार्दूल इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “ज्यादातर जानकारी आप लोगों ने दे दिया है, जहां तक दोनों वैक्सीन के अंतर की बात हैं तो कोविशील्ड वैक्सीन नए तरीके की वैक्सीन है जो प्रोटीन को कैप्चर करके बनाया गया है. जबकि कोवैक्सीन परंपरागत तरीके से तैयार की गई वैक्सीन है. डाटा का रिलीज ना होना बहुत बड़ी परेशानी है. जब लोग पहले से ही इतने परेशान हो उस समय में डाटा का होना उन्हें विश्वास दिलाता है. अब पता नहीं क्या कारण हैं कि सरकार ने बिना डाटा के सामने आए मंजूरी दे दी है.”
इसके अलावा भी अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई साथ ही अमेरिकी संसद में कई गई तोड़तोड़ पर भी पैनल ने विस्तार से अपनी राय रखी. इसे पूरा सुनने के लिए हमारा पॉडकास्ट सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
1:05 - प्रस्तावना और हेडलाइन
4:47 - कोरोना वैक्सीन
26:08 - अमेरिकी संसद पर हमला
1:02:01 - सलाह और सुझाव
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मेघनाथ
प्रतीक गोयल की लव जिहाद रिपोर्ट
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अशोक कुमार पांडे की किताब - उसने गांधी को क्यों मारा
न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट्स को देखे, पढ़े और सुने
अतुल चौरसिया
अमेरिका की मौजूदा स्थिति पर प्रताप भानू मेहता का इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित लेख
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प्रोड्यूसर- आदित्य वारियर
रिकॉर्डिंग - अनिल कुमार
एडिटिंग - सतीश कुमार
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह.
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