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ऑनलाइन मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म भी अब सरकारी निगरानी के फंदे में
ऑनलाइन सूचना/समाचार और सामग्रियों पर नियंत्रण और निगरानी रखने के लिए मोदी सरकार ने ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलों, ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडरों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने से जुड़ा आदेश जारी किया है. इसके तहत, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत ऑनलाइन फिल्मों के साथ ऑडियो-विज़ुअल कार्यक्रम, ऑनलाइन समाचार और करंट अफेयर्स के कंटेंट आएंगे.
सोमवार, 9 नवम्बर को कैबिनेट ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया है जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का हस्ताक्षर है.
इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति की ओर से अनुच्छेद 77 के खंड (3) के तहत कार्य आवंटन नियम, 1961 में संशोधन किया जा रहा है. इसे कार्य आवंटन 357वां संशोधन नियम 2020 नाम दिया गया है, जो तुरंत लागू होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टीवी, मीडिया के प्रसारण पर नियंत्रण और कंटेंट पर निगरानी के सम्बन्ध में जवाब मांगा था, जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया था कि ऑनलाइन माध्यमों का रेगुलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है.
दरअसल केंद्र सरकार ने बीते 21 सितम्बर को सुदर्शन टीवी के यूपीएससी मामले में सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने कहा कि वेब आधारित डिजिटल मीडिया को पहले कंट्रोल करना होगा, तभी टीवी चैनलों पर नियंत्रण किया जा सकता है. केंद्र ने कहा कि कोर्ट चाहे तो डिजिटल मीडिया को लेकर कानून बनाए या कानून बनाने के लिए इसे सरकार पर छोड़ दे.
बीते अगस्त महीने में आरएसएस और बीजेपी समर्थक सुदर्शन न्यूज़ ने बिंदास बोल कार्यक्रम में ‘यूपीएससी जिहाद’ शीर्षक से एक कार्यक्रम तैयार किया था. यह कार्यक्रम 28 अगस्त को सुबह 8 बजे प्रसारित होने वाला था.
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उसी दिन इस पर रोक लगा दी थी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर जस्टिस नवीन चावला की एकल पीठ ने एक अर्जेंट सुनवाई में यह आदेश दिया था. साथ ही अदालत ने सुदर्शन टीवी को नोटिस जारी किया था.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील शादान फरासात ने शो के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा था कि इसमें कथित तौर पर ऐसा कंटेंट है, जो जामिया मिलिया इस्लामिया, यहां के पूर्व छात्रों और बड़े स्तर पर मुस्लिमों को बदनाम कर सकता है, उन पर हमलावर हो सकता है और उनके खिलाफ नफरत भड़का सकता है.
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने सुरेश चव्हाणके द्वारा शेयर किया गया ट्रेलर देखा है, जिसमें वे खुले तौर पर जामिया के छात्रों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ और मानहानिकारक बातें कह रहे हैं.
छात्रों ने यह भी कहा, ‘चव्हाणके ने गैर-हिंदू दर्शकों को लक्षित करते हुए यह कहकर डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही ‘जामिया के जिहादी’ कलेक्टर और सचिव बनेंगे.’
इस याचिका में यह भी कहा गया है कि इस शो का प्रस्तावित प्रसारण और यह विवादित ट्रेलर केबल टीवी नेटवर्क (रेगुलेशन) कानून के प्रोग्राम कोड का उल्लंघन है. ट्रेलर में हेट स्पीच और मानहानि सामग्री भी है, जो आईपीसी की धारा 153ए (1), 153बी (1), 295ए और 499 के तहत अपराध हैं.
अदालत द्वारा प्रसारण के रोक लगाने के दो सप्ताह से कम समय के भीतर प्रकाश जावेड़कर के अधीन केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के प्रसारण की इजाज़त दे थी.
‘बिंदास बोल’ सुदर्शन टीवी के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके का शो है. यूपीएससी जिहाद वाले एपिसोड के ट्रेलर में चव्हाणके ने हैशटैग यूपीएससी जिहाद लिखकर नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षडयंत्र का बड़ा खुलासा करने का दावा किया था.
आईपीएस एसोसिएशन ने इसका विरोध किया था और इसे निंदनीय सांप्रदायिक पत्रकारिता करार दिया था.
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ ने कहा, ‘इस कार्यक्रम को देखिये, कैसा उन्माद पैदा करने वाला यह कार्यक्रम है कि एक समुदाय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश कर रहा है.’ पीठ ने कहा, ‘देखिये इस कार्यक्रम का विषय कितना उकसाने वाला है कि मुस्लिमों ने सेवाओं में घुसपैठ कर ली है और यह तथ्यों के बगैर ही यह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को संदेह के दायरे में ले आता है.’
अब ऑनलाइन न्यूज़ व अन्य सामग्रियों पर नियंत्रण और नज़र रखने के लिए केंद्र सरकार ने यह नोटिस जारी कर दिया है.
बता दें कि हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माताओं की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए टाइम्स नाउ और रिपब्लिक टीवी को कड़ी फटकार लगाई थी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ को निर्देश दिया है कि पूरे बॉलीवुड को आरोपों के कठघरे में खड़े करने वाले गैर ज़िम्मेदाराना, अपमानजनक या मानहानि करने वाले किसी भी कंटेंट से दूर रहें.
(साभार- जनपथ)
ऑनलाइन सूचना/समाचार और सामग्रियों पर नियंत्रण और निगरानी रखने के लिए मोदी सरकार ने ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टलों, ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडरों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने से जुड़ा आदेश जारी किया है. इसके तहत, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत ऑनलाइन फिल्मों के साथ ऑडियो-विज़ुअल कार्यक्रम, ऑनलाइन समाचार और करंट अफेयर्स के कंटेंट आएंगे.
सोमवार, 9 नवम्बर को कैबिनेट ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया है जिस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का हस्ताक्षर है.
इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति की ओर से अनुच्छेद 77 के खंड (3) के तहत कार्य आवंटन नियम, 1961 में संशोधन किया जा रहा है. इसे कार्य आवंटन 357वां संशोधन नियम 2020 नाम दिया गया है, जो तुरंत लागू होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से टीवी, मीडिया के प्रसारण पर नियंत्रण और कंटेंट पर निगरानी के सम्बन्ध में जवाब मांगा था, जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया था कि ऑनलाइन माध्यमों का रेगुलेशन टीवी से ज्यादा जरूरी है.
दरअसल केंद्र सरकार ने बीते 21 सितम्बर को सुदर्शन टीवी के यूपीएससी मामले में सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने कहा कि वेब आधारित डिजिटल मीडिया को पहले कंट्रोल करना होगा, तभी टीवी चैनलों पर नियंत्रण किया जा सकता है. केंद्र ने कहा कि कोर्ट चाहे तो डिजिटल मीडिया को लेकर कानून बनाए या कानून बनाने के लिए इसे सरकार पर छोड़ दे.
बीते अगस्त महीने में आरएसएस और बीजेपी समर्थक सुदर्शन न्यूज़ ने बिंदास बोल कार्यक्रम में ‘यूपीएससी जिहाद’ शीर्षक से एक कार्यक्रम तैयार किया था. यह कार्यक्रम 28 अगस्त को सुबह 8 बजे प्रसारित होने वाला था.
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उसी दिन इस पर रोक लगा दी थी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर जस्टिस नवीन चावला की एकल पीठ ने एक अर्जेंट सुनवाई में यह आदेश दिया था. साथ ही अदालत ने सुदर्शन टीवी को नोटिस जारी किया था.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील शादान फरासात ने शो के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा था कि इसमें कथित तौर पर ऐसा कंटेंट है, जो जामिया मिलिया इस्लामिया, यहां के पूर्व छात्रों और बड़े स्तर पर मुस्लिमों को बदनाम कर सकता है, उन पर हमलावर हो सकता है और उनके खिलाफ नफरत भड़का सकता है.
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने सुरेश चव्हाणके द्वारा शेयर किया गया ट्रेलर देखा है, जिसमें वे खुले तौर पर जामिया के छात्रों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ और मानहानिकारक बातें कह रहे हैं.
छात्रों ने यह भी कहा, ‘चव्हाणके ने गैर-हिंदू दर्शकों को लक्षित करते हुए यह कहकर डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही ‘जामिया के जिहादी’ कलेक्टर और सचिव बनेंगे.’
इस याचिका में यह भी कहा गया है कि इस शो का प्रस्तावित प्रसारण और यह विवादित ट्रेलर केबल टीवी नेटवर्क (रेगुलेशन) कानून के प्रोग्राम कोड का उल्लंघन है. ट्रेलर में हेट स्पीच और मानहानि सामग्री भी है, जो आईपीसी की धारा 153ए (1), 153बी (1), 295ए और 499 के तहत अपराध हैं.
अदालत द्वारा प्रसारण के रोक लगाने के दो सप्ताह से कम समय के भीतर प्रकाश जावेड़कर के अधीन केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के प्रसारण की इजाज़त दे थी.
‘बिंदास बोल’ सुदर्शन टीवी के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके का शो है. यूपीएससी जिहाद वाले एपिसोड के ट्रेलर में चव्हाणके ने हैशटैग यूपीएससी जिहाद लिखकर नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षडयंत्र का बड़ा खुलासा करने का दावा किया था.
आईपीएस एसोसिएशन ने इसका विरोध किया था और इसे निंदनीय सांप्रदायिक पत्रकारिता करार दिया था.
इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ ने कहा, ‘इस कार्यक्रम को देखिये, कैसा उन्माद पैदा करने वाला यह कार्यक्रम है कि एक समुदाय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश कर रहा है.’ पीठ ने कहा, ‘देखिये इस कार्यक्रम का विषय कितना उकसाने वाला है कि मुस्लिमों ने सेवाओं में घुसपैठ कर ली है और यह तथ्यों के बगैर ही यह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को संदेह के दायरे में ले आता है.’
अब ऑनलाइन न्यूज़ व अन्य सामग्रियों पर नियंत्रण और नज़र रखने के लिए केंद्र सरकार ने यह नोटिस जारी कर दिया है.
बता दें कि हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माताओं की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए टाइम्स नाउ और रिपब्लिक टीवी को कड़ी फटकार लगाई थी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ को निर्देश दिया है कि पूरे बॉलीवुड को आरोपों के कठघरे में खड़े करने वाले गैर ज़िम्मेदाराना, अपमानजनक या मानहानि करने वाले किसी भी कंटेंट से दूर रहें.
(साभार- जनपथ)
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