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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को किया बरी
बाबरी मस्जिद को ढ़हाने के आरोप में बुधवार को 28 साल बाद फैसला सुनाया गया. स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने इस आपराधिक मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत कई अन्य नेता दोषी थे. सीबीआई की विशेष अदालत के जज एसके यादव ने यह फैसला सुनाया.
जज एसके यादव ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि यह यह विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था बल्कि आकस्मिक घटना थी. अभियुक्तों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया गया. वहीं जज ने कहा कि इस ढ़ाचे को 32 आरोपियों ने नहीं बल्कि कुछ अराजकतत्वो ने गिराया था. जिसके बाद विशेष अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व कल्याण सिंह सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया. बता दें कि जज एसके यादव का यह अंतिम दिन है. उन्हें इस मामले की सुनवाई के लिए एक साल का एक्सटेंशन दिया गया था.
गौरतलब हैं कि 29 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने 49 लोगों को आरोपी बनाया था. जिसमें से 17 की मौत हो चुकी है. 32 आरोपियों में से 26 आरोपी बुधवार को कोर्ट में मौजदू थे. इस दौरान लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी बढ़ती उम्र के कारण अदालत में पेश नहीं हुए, वहीं उमा भारती और कल्याण सिंह कोरोना वायरस के कारण पेश नहीं हो सके.
क्या हुआ था 6 दिंसबर को
6 दिसंबर, 1992 को कारसेवकों ने सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए बाबरी मस्जिद के अंदर घुस गए. इस दौरान पुलिस, कारसेवकों के सामने बेबस दिखी, जिसके बाद कारसेवकों का जत्था बाबरी मस्जिद की मुख्य गुंबद पर चढ़ गया और कुदाल, फावड़े और लोहे की छड़ों से ढांचे पर वार करने लगे.
आरोप हैं इस यह पूरी घटना विश्व हिंदु परिषद के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत कई अन्य नेताओं के भड़काने के बाद हुई.
बाबरी मस्जिद के विध्वंस मामले में दो केस दर्ज किए गए थे. इस मामले का पहला केस सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया था जिसके बाद राममंदिर के निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अगस्त को भूमि पूजन किया था. यह दूसरा मामला था, जिसमें फैसला आना बाकी था.
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