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राजस्थान: यूनिवर्सिटी ने खोजी कोरोना की दवा, प्रशासन को नहीं हवा
राजस्थान में मंगलवार को कोरोना के 400 नए मामले सामने आए इससे राजस्थान में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 11 हजार को पार कर गया. कोरोना मरीजों की बढ़ती तादाद के बाद राजस्थान सरकार ने बुधवार को राज्य का बॉर्डर 7 दिनों के लिए सील करने का फैसला किया है.
एक निजी चैनल से बातचीत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बताया था कि अचानक से एक सप्ताह में ज्यादा केस आए हैं. लॉकडाउन के बाद 8-9 दिन में ही 2500 केस आ गए है. जबकि पहले एक महीने में 6 हजार केस आए थे. इस कारण बॉर्डर सील करने का फैसला किया गया है.
राजस्थान में कोरोना की जो स्थिति है उसमें दायां हाथ क्या कर रहा है, बाएं हाथ को पता ही नहीं है. एक घटना के जरिए हम राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग, और पूरे चिकित्सा तंत्र की स्थिति को समझ सकते हैं. 8 जून को दैनिक भास्कर अखबार के जोधपुर एडिशन में एक ख़बर छपी, जिसका शीर्षक था, “आयुर्वेद विद्यालय ने बनाई कोरोना से बचने की दवा, पॉजिटिव मरीजों पर सकारात्मक परिणाम आए, सरकार को सौंपेंगे रिपोर्ट.” इसके अलावा ख़बर के ऊपर सब-हेड में लिखा था- “गुरुची वटी 500 mgका मरीजों पर सफल प्रयोग, इस माह टेस्टिंग चलेगी, पूरी दुनिया को राहत.”
खबर में बताया गया है कि जोधपुर स्थित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने कोरोना की दवा ढूंढ़ ली है. रिपोर्ट के मुताबिक इसे 4 कैटेगिरी के लोगों पर आजमाया गया है. इसके परिणाम सकारात्मक आए हैं. रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अभिमन्यु कुमार का हवाला देते हुए बताया गया है कि इससे कई मरीज रिकवर हुए हैं और इसकी रिपोर्ट वो सरकार को भेजेंगे.
चूंकि अभी भारत तो दूर, पूरी दुनिया में कोरोना की आधिकारिक तौर पर कोई दवा नहीं बन पाई है. हां! दुनिया भर में इस पर रिसर्च जरूर चल रही है, ऐसे में जोधपुर की इस यूनिवर्सिटी का यह दावा हमें चौंकाता है.
सबसे पहले हमने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिमन्यु कुमार से इस बारे में बातचीत की.
डॉ. अभिमन्यु कुमार न्यूज़लॉन्ड्री को बताते हैं, “जो खबर भास्कर ने छापी है वह सही है. हमने ये प्रयोग देश में कोरोना शुरु होने के समय मार्च में ही शुरु कर दिया था. अब जिन लोगों पर इसे आजमाया गया है उसके सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं. इस दवा का हमने 40 कोविड पॉजिटिव लोगों पर प्रयोग किया. साथ ही कोरोना वॉरियर्स और क्वारंटाइन लोगों को भी इसमें शामिल किया. तो इन लोगों पर इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं.”
इतनी बड़ी खोज अगर आपने कर ली है तो इस ख़बर को नेशनल मीडिया में कहीं नहीं दिखाया गया. अगर ऐसा है तो इस महामारी में यह देश के लिए बहुत बड़ा वरदान होगा. इसके जवाब में डॉ. अभिमन्यु ने कहा, “अभी ये प्रयोग पूरा नहीं हुआ है, इसलिए इसके बारे में हम पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं, जून तक इसके पूरा होने की संभावना है, तब हम इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजेंगे.”
भास्कर में जिस रिपोर्टर ने यह ख़बर लिखी है उनका नाम है मनीष बोहरा. हमने मनीष से पूछा कि कि अगर ये बात सही है तो इतनी बड़ी खबर को भास्कर के अन्य संस्करणों में क्यों नहीं छापा गया. इस पर उन्होंने कहा, अभी ट्रायल जारी है ओर सारी खबरें वो नहीं बता रहे हैं. जब ट्रायल पूरा हो जाएगा तो इस पर 2-3 रिपोर्ट बनेंगी. क्या आपने किसी मरीज से बात की, जिस पर ट्रायल हुआ हो और वो ठीक हुआ हो. इस पर मनीष ने बताया कि इस बारे में यूनिवर्सिटी अभी जानकारी नहीं दे रहा है, उसकी जानकारी वह ट्रायल पूरा होने पर ही देगा.
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के मद्देनजर एक आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का यह दावा कि उसने कोरोना की दवा ढूंढ़ ली है और 40 से ज्यादा लोगों पर इसका सफल प्रयोग भी कर लिया है, यह थोड़ी अजीब बात है. इस कारण हमने राजस्थान के कोरोना वायरस से संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से सम्पर्क कर इस ख़बर के बारे में जानना चाहा.
कोरोना के मामले में इलाज से लेकर टेस्टिंग तक, सभी प्रक्रिया एक निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत होती है. एक सेंट्रलाइज़ सिस्टम में इसके संक्रमित, रिकवर, मौतों का डाटा रखा जाता है. इसी तरह इसके पीड़ितों के लिए इलाज के केंद्र भी तयशुदा हैं. सवाल उठता है कि क्या जोधपुर की यह आयुर्वेद यूनिवर्सिटी कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए अधिकृत है.
अगर यूनिवर्सिटी ऐसा कर रही है तो स्थानीय और राज्य के स्वास्थ्य प्रशासन की भी इसमें जरूर कुछ न कुछ भूमिका होगी. लेकिन हमारी अथक कोशिशों के बावजूद भी हमें राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, उल्टे उनका बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया नजर आया.
हमने इसकी शुरुआत राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा से. हमने जब रघु शर्मा को फोन लगाया तो हमारी बात उनके पीए से हुई. उन्होंने हमारा परिचय लेकर काम पूछा, फिर कहा, “मैं उनका पीए बोल रहा हूं और मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता. बाकि आपकी बात मैं साहब तक पहुंचा दूंगा.”
यहां से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर हमने राज्य के चीफ एडिशनल सेक्रेटरी मेडिकल हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डॉ. रोहित कुमार सिंह के दफ्तर में फोन किया तो बताया गया कि वे लंच के लिए गए हैं. लंच के बाद हमने उनके पर्सनल मोबाइल नंबर पर कई बार कॉल किया, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला. आखिरकार शाम में चीफ एडिशनल सेक्रेटरी ने हमारा फोन उठाया. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कोरोना संबंधी दावे के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने कहा, “मैं अभी मीटिंग में हूं.”
हमने कहा कि सर कोई सही समय बता दीजिए जब मैं कॉल कर सकूं. इसके जवाब में उन्होंने थोड़ा जोर देते हुए कहा, “जब मीटिंग खत्म होगी, तभी तो बात करोगे.” इसके बाद हमने अपने सवाल उन्हें व्हाटसएप पर भी भेजे. जो उन्होंने रीड भी किए, लेकिन अभी तक उनका कोई जवाब नहीं मिला है.
चूंकि ये घटना जोधपुर जिले की है, जो खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का क्षेत्र है. इसलिए हमने जोधपुर के चीफ मेडिकल ऑफिसर बलवंत मांडा, जो इलाके में हो रही स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं के लिए सीधे जिम्मेदार होते हैं, से भी सम्पर्क की कोशिश की.
सुबह से शाम तक कई बार हमने उन्हें फोन किया. लेकिन कभी वे फोन काट देते, कभी उनको फोन बिजी बताता, खैर हमें उनका जवाब भी नहीं मिला.
बाद में हमने सीएमओ बलवंत मांडा को भी अपने सवाल व्हाटसएप पर भेजे दिया. लेकिन उन्होंने भी अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब टीवी चैनल से बात कर रहे थे तब लगे हाथ उन्होंने अपनी सरकार की तारीफ भी कर डाली. उन्होंने जोड़ा, “हमारे लगातार प्रयासों से राजस्थान में कोरोना पॉजिटिव लोगों के ठीक होने की दर 74 प्रतिशत से ज्यादा है. साथ ही मृत्यु दर 2.25 प्रतिशत तथा केस दोगुने होने की समयावधि 22 दिन है, जो कि राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है.”
उसी शाम मुख्यमंत्री गहलोत ने 2-3 लगातार टवीट कर संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए लिखा, “प्रदेश में आगे भी कोरोना संक्रमण का फैलाव नहीं हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क पहनने सहित अन्य हेल्थ प्रोटोकॉल की भी सख्ती से पालना करवाई जाए.”
निर्देश दिए कि आवागमन को नियंत्रित करने के संबंध में गृह विभाग विस्तृत गाइडलाइन जारी करे.
लेकिन राज्य में और खुद मुख्यमंत्री के गृहनगर में कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग और उसके अधिकारी कितने लापरवाह और गैर जवाबदेह हैं, यह घटना उसे बताने के लिए पर्याप्त है. उनकी नाक के नीचे एक यूनिवर्सिटी यह दावा कर रही है कि उसने कोरोना की दवा ईजाद कर ली, 40 से ज्यादा लोगों पर उसका सफल प्रयोग भी कर लिया और पूरा जोधपुर का प्रशासन इस मसले पर चुप्पी साधे बैठा है.
जो अधिकारी किसी विश्वविद्यालय द्वारा कोरोना की दवा खोजने जैसे बड़े दावे की पुष्टि या खारिज करने के लिए मीडिया में उपलब्ध नहीं है, वो कोरोना के असली पीड़ितों के लिए कितना सजग होंगे, इसकी बात करना ही बेमानी है.
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