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क्या-क्या करें भारतीय पत्रकार कोरोना वायरस से बचाव के लिए
कोरोना वायरस महामारी के बीच भी कुछ ऐसे पेशे हैं जैसे कि स्वास्थ्यकर्मी, पुलिस, सशस्त्रबल और पत्रकार, जो काम करना बंद नहीं कर सकते हैं.
हम पत्रकारों के लिए नई जानकारियां, सलाह और आंकड़े ही सार्वजानिक सेवा का रूप ले लेते हैं. यहां पर मैं यह स्वीकार करना चाहती हूं कि जब हम युद्ध जैसी चीज़ों को कवर कर रहे होते हैं तो हमारे अंदर एक अलग तरह की भावना हिलोरे मार रही होती है. इसके बावजूद, और इस बात को ध्यान रखते हुए कि पत्रकारिता एक सार्वजानिक सेवा है, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमे सिर्फ तथ्यों को दिखाना है और किसी चीज़ को सनसनीखेज नहीं बनाना है.
प्रशंसा और तारीफ़ पाने के लिए काम करना हमारे पेशे के लिए बहुत नुकसानदेह है. जब कोई डॉक्टर किसी मरीज की जान बचाने की कोशिश कर रहा होता है तो वो किसी की प्रशंसा या तारीफ की उम्मीद नहीं करता. वो सिर्फ अपने काम पर ध्यान देता है. ग्लैमर से सराबोर एंकर और संपादकों के बीच रिपोर्टर किसी सैनिक की तरह होता है.
लेकिन रुकिए. ज्यादातर पत्रकार उस मानसिकता के साथ इस पेशे से नहीं जुड़ते जैसे कि एक सैनिक जो कि हर वक्त किसी भी तरह की लड़ाई के लिए और मौत को गले लगाने के लिए तैयार रहते हैं, या फिर किसी डॉक्टर की तरह जो कि भली-भांती जानते हैं कि किसी भी संक्रामक बीमारी को ठीक करने के दौरान वो भी उसकी चपेट में आ सकते हैं या उससे उनकी मौत भी हो सकती है.
यह तो सबको पता रहता है कि यदि आप आर्मी में जाते हैं तो अपनी जान को दांव पर लगा रहे हैं. एक पत्रकार ऐसा बिलकुल नहीं सोच सकता है कि उसके पेशे में उसकी जान जा सकती है. सच्चाई यह है कि भले ही यह लोकतंत्र की रक्षा में पहली सीमा रेखा है (खासकर आज के समय में) जिसमें उच्च स्तर के बलिदान या उत्साह की अपेक्षा रखी जाती है लेकिन ज्यादातर रिपोर्टर इस तरह के जोखिम के ध्यान में रखकर इस पेश में नहीं आते हैं. यह सच्चाई है.
यह कहना तथ्यात्मक रूप से बिल्कुल गलत होगा कि यह 19वीं शताब्दी का प्लेग नहीं है और लोग उस समय इसलिए मर गए थे क्योंकि तब एंटीबायोटिक्स ईजाद नहीं हुआ था. कोरोना वायरस वास्तव में प्लेग जैसी ही स्थिति है. उस समय प्लेग का कोई इलाज नहीं था आज हमारे पास कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है. यह एक वायरस है और जैसा कि हम सभी जानते हैं एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ लिए काम नहीं करते. कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने और इसका इलाज ढूंढ़ने के लिए पूरी दुनिया में शोध चल रहा है.
संयुक्त राज्य में एबीसी न्यूज़ के दो पत्रकार कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. रोम में रहने वाले सीबीएस न्यूज़ के पत्रकार सेथ डोयने के साथ साथ इसी मीडिया कंपनी के पांच अन्य पत्रकार कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार रिचर्ड विल्किन्स जिन्होंने कोरोना वायरस से पीड़ित टॉम हैंक्स की पत्नी रीटा विल्सन का साक्षात्कार किया था भी इससे संक्रमित पाए गए हैं.
द टाइम्स (यूके) का भी एक पत्रकार इससे संक्रमित पाया गया है. न्यूयॉर्क के एनबीसी न्यूज़ के लिए प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में काम करने वाले लैरी एजवर्थ की 19 मार्च, 2020 को इस बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई. बेंगलुरु के कलबुर्गी में कोरोना वायरस की वजह से जिस व्यक्ति का निधन हुआ था उसके पुत्र का साक्षात्कार करने वाले चार पत्रकारों को क्वारंटाइन में डाला गया है.
इन सबके बावजूद, दुनिया भर के पत्रकारों की तरह भारतीय पत्रकारों ने भी काफी साहस दिखाया है. जब किसी मीडिया संस्थान के मालिक को अपने यहां काम करने वाले पत्रकारों को यह विश्वास दिलाते हुए सुनती हूं कि अगर काम के दौरान उसकी मृत्यु भी हो गई तो दूसरे पत्रकार हैं जो उस स्टोरी को पूरा कर देंगे, तब परेशान होना वाजिब है.मुझे यकीन है कि इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं बल्कि एक किस्म की अशिष्टता या अहंकार है.
आने वाले दिनों में मीडिया कंपनी के मालिक और सम्पादक कोरोना वायरस से संबंधित ख़बरों को कवर करने के लिए रिपोर्टरों को भेजेंगे. रिपोर्टरों को ऐसे वक्त में फील्ड में उतरने से पहले क्या तैयारियां और ऐहतियात बरतना चाहिए:
1. ऐहतियात बरतने से ही बचाव संभव है. मास्क पहनिए और जैसे ही ये गीला हो जाए इसको बदल दी जिये. इसमें लगे इलास्टिक बैंड से इसको छूएं और सीधे-सीधे मास्क को हाथ न लगाएं. नया मास्क पहनने के लिए भी उसको इलास्टिक बैंड से ही छूएं. आपको एन-95 मास्क आपकी कंपनी द्वारा मिलना चाहिए.
2. अपने साथ हर समय हैंड सैनिटाइज़र रखें. जितनी बार हो सके अपने हाथों को साबुन से धोएं और फिर सैनिटाइज़र लगाएं. अगर पानी न मिले तो वाइप्स द्वारा हाथ साफ़ करके फिर सैनिटाइज़र का उपयोग करें. अपने हाथों को बार-बार नियमित अंतराल पर धोएं. जो भी सैनिटाइज़र आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें कम से कम 70 प्रतिशत अल्कोहल की मात्रा होनी ही चाहिए औरअपने मोबाइल फ़ोन को भी सैनिटाइज़ करना ना भूलें.
3. जब भी कोई राजनेता कोई बयान दे रहा हो, तो आप सब आपस में यह तय कर लें कि आप लोग आपस में कम से कम छः फ़ीट की दूरी बना कर रखेंगे. घेरा बना कर ना खड़े हों जिससे कि आप सबके कपड़े एक दूसरे से ना छूएं. यह कितना संभव है यह तो मुझे नहीं पता लेकिन हमारे सामने नई मुसीबत आन पड़ी है इसलिए खुद को बचाने के लिए हमें इस तरह के नए नियमों को मानना पड़ेगा. इससे भी बेहतर होगा कि आप नेताओं को डिजिटल प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए राजी करलें जहां पत्रकार अपने प्रश्न लाइव पूछ लें. आज के दौर में ऐसा करने के लिए हमारे पास पर्याप्त तकनीक उपलब्ध है.
4. माइक को बिलकुल ना छूएं. यदि संभव हो तो माइक की सफाई करें और उन्हें वापस करते समय डिसइंफेक्ट करें. माइक छूने के बाद अपने हाथों को धोएं और सैनिटाइज़ करें. सभी उपकरण खासकर ट्राइपॉड को भी साफ करके उसे डिसइंफेक्ट करें.
5. क्लिप-ऑनमाइक का प्रयोग करने से बचें. जितना संभव होडाइरेक्शनल माइक का उपयोग करें. अपनी कंपनी को बताएं कि ये सब जरूरी है.
6. अगर आप किसी प्रदूषित जगह पर हैं तो अपने उपकरणों को फर्श पर ना रखें. हाथ में पकड़ कर ही इस्तेमाल करें.
7. हर एक असाइनमेंट के बाद अपने कपड़े तुरंत बदल दें. हो सके तो नहा भी लें. अपने कपड़ों को गर्म पानी से धोएं और उनको डिसइंफेक्ट करें. बाहर आने जाने के लिए एक जोड़ी जूते जो कि अपने दरवाजे के बाहर ही रखें. जब भी हो सके उनको भी धोएं. घर के अंदर पहनने के लिए एक जोड़ी जूते या चप्पल अलग रखें.
8. अगर आप सार्वजानिक परिवहन का उपयोग कर रहे हैं, तो जैसे ही आप उससे उतरें, तुरंत अपने हाथों पर सैनिटाइज़र लगाएं और हाथ साफ़ करें. अपने हाथों से अपने चेहरे को न छूएं.
9. किसी भी असाइनमेंट के दौरान स्थानीय रूप से पके हुए भोजन का ही प्रयोग करें.
10. अपने दफ्तर में मास्क पहन कर रखें. आपको कोई अंदाज़ा नहीं है कि कौन कहां-कहां गया है और कौन इसकी चपेट में आ चुका है.
11. किसी प्रेस कांफ्रेंस में यह प्रयास करें की दो लोगों के बैठने के बीच में कम से कम एक सीट खाली हो. अगर यह संभव नहीं है तो यथासंभव दूरी बना कर खड़े हों.
12. बीच बीच में फल खाते रहे, स्वस्थ आहार लेते रहें और भोजन करना ना भूलें चाहे असाइनमेंट का कितना ही दबाव क्यों न हो.
13. जितना हो सके उतना फ़ोन और इंटरनेट पर काम करें. कम से कम अगले कुछ हफ़्तों लिए जितना हो सके उतना कम बाहर निकलें और खतरे से खुद को बचाएं.
14. आपको अपने न्यूज़रूम के अंदर भी स्वच्छता बनाये रखनी है. जहां आप बैठे हैं उस टेबल को दिन में कम से कम दो बार सैनिटाइज़र से साफ़ करें.सभी लैपटॉप, डेस्कटॉप, मशीन इत्यादि को डिसइंफेक्ट करते रहना चाहिए.
15. सबसे जरूरी यह है कि अगर आपको ज़रा सा भी यह महसूस हो कि आपमें कोरोना वायरस के लक्षण हैं तो अपने कार्यालय को तुरंत बताएं और खुद को सेल्फ-आइसोलेट कर लें.
सिर्फ एक पल की लापरवाही से आपके द्वारा ली हुई सभी सावधानियां बेकार साबित हो सकती हैं. इन नियमों का पालन करना कोई मूर्खता नहीं हैबल्कि समझदारी भरा निर्णय है. उन लोगों से शर्माने की या डरने की जरूरत नहीं है जो इन एहतियातों का मजाक उड़ाते हैं. आपका जीवन न सिर्फ आपके लिए बल्कि आपके परिवार के लिए भी बहुमूल्य है. अपना काम अच्छे से करें. सावधानी बरतें और सुरक्षित रहे.
आईजीनेट ने ऐसे सुझावों की एक सूची तैयार की है जो कि उन रिपोर्टरों के लिए है जो कोरोना वायरस से संबंधित ख़बरों को कवर करने जा रहे हैं. इस सूची को तैयार करने के लिए उन पत्रकारों से सलाह ली गई है जिन्होनें कोरोना वायरस से संबंधित रिपोर्टिंग की है.
सोसाइटी ऑफ़ प्रोफेशनल जर्नलिस्ट ने भी कोरोना वायरस से संबंधित ख़बरों को कवर करने के लिए संसाधनों का एक टूलबॉक्स तैयार किया है.
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