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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जामिया बना पुलिस और छात्रों का कुरुक्षेत्र
संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब कानून बनने जा रहा है. इस बिल के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन और हिंसा शुरू हो गई है. देश के कई विश्वविद्यालयों में भी इसके खिलाफ माहौल गर्म हो गया है. इसी क्रम में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र भी बीते 3-4 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे थे. 13 दिसम्बर यानि शुक्रवार को छात्रों का साथ देने के लिए जामिया टीचर एसोशिएशन ( जेटीए ) भी प्रदर्शन में शामिल हो गया.
जेटीए और छात्रों ने शुक्रवार को जामिया से संसद भवन तक एक लॉन्ग मार्च निकालने की घोषणा की थी. इस मार्च को पुलिस ने जामिया कैंपस के पास में ही जबर्दस्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा बंदोबस्त करके रोक दिया. यहां पर पर छात्रों और पुलिस के बीच तनातनी हो गई. छात्र लगातार बैरिकेडिंग को हटाने का दबाव डाल रहे थे और अंतत: उन्होंने बैरिकेडिंग को गिरा दिया. इसके बाद पैदा हुई अफरा तफरी में पुलिस ने जमकर लाठियां भाजी और छात्रों ने पत्थरबाजी की. पुलिस द्वारा लगातार आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं. सोशल मीडिया पर सामने आ रहे कुछ वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस जामिया मिल्लिया परिसर के भीतर भी आंसू गैस के गोले दाग रही थी. पुलिस द्वारा ये सिलसिला करीब 3 घंटे तक चला. पुलिस कैंपस के मुख्य द्वार से अंदर घुसकर छात्रों को पीटा.
दूसरी तरफ ऐसी भी तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें छात्रों की पत्थरबाजी से कुछ पुलिस वाले भी जख्मी हुए हैं. शाम को 6:30 बजे के आस पास पुलिस और छात्रों के बीच हुई बातचीत में पुलिस ने कहा, “पुलिस हमेशा ही छात्रों के साथ है, आप लोग शांतिपूर्ण ढंग से प्रोटेस्ट कीजिये, किसी को नुकसान मत पहुंचाइये.” इसके बाद पत्थरबाज़ी और लाठीचार्ज बन्द हो गया. छात्र अभी भी शांतिपूर्ण तरीके से नागरिकता संशोधन विधेयक के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं.
क छात्र अनस खान ने हमें बताया, “हम एक लोकतंत्र में हैं और विरोध प्रदर्शन करना हमारा हक़ है. उसी का इस्तेमाल करते हुए हम विरोध कर रहे थे. हमें रोक कर द्वारा लाठीचार्ज करना बिल्कुल गलत है. सरकार को इसका जवाब देना चाहिए.”
क्या है पूरा मामला
देश के दूसरे हिस्सों की तरह ही जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र भी कैब और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे है. बीते 3 दिनों से अलग-अलग छात्र संगठन और आम छात्रों द्वारा प्रदर्शन, पब्लिक टॉक और फ़्लैश लाईट मार्च का आयोजन किया जा रहा था. इसके बाद छात्रों का साथ देने के लिए जामिया टीचर एसोशिएशन भी आगे आया.
शुक्रवार दोपहर 2 बजे से शुरू हुए इस प्रदर्शन के बाद आम छात्रों द्वारा जामिया से संसद तक मार्च करने का निर्णय लिया गया था. इसके मद्देनज़र मार्च शुरू होने के पहले ही जामिया के आस-पास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करके सभी रास्तों को बंद कर दिया गया था.
प्रदर्शन मार्च शुरू होते ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जामिया में ही रोक दिया. इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा बैरिकेट पर चढ़कर आगे बढ़ने और उसे तोड़ने की कोशिश की. छात्रों द्वारा बैरिकेट तोड़ने की कोशिश करने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज करना शुरू कर दिया. पुलिस ने कैम्पस के अन्दर घुस कर छात्रों को मारना शुरू किया. इसके साथ ही पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागना शुरू कर दिया. पलट कर छात्रों ने भी पत्थरबाजी शुरू कर दी है.
विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा के नागरिकता संशोधन विधेयक संविधान की मूलभावना व मौलिक ढांचे के विरुद्ध है इसलिए हम इस बिल का विरोध कर रहे हैं. पुलिस द्वारा की गयी बर्बरता और इस विधेयक के बारे में बात करते हुए जामिया से हिंदी में स्नातक कर रहे छात्र भविष्य शर्मा ने बताया, “पुलिस और प्रशासन हमारे साथ ऐसे बर्ताव कर रहा है जैसे हम विद्यार्थी नहीं आतंकवादी हैं. सबसे दुःखद बात ये है की सरकार लोकतंत्र में रहकर लोकतांत्रिक आवाज़ों को सुनने तक के लिए तैयार नहीं है.”
वजाहत जामिया में पोलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के छात्र हैं. न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए वो कहते हैं, “पुलिस ने मुझे लाठी से मारा. मैं पुलिस से बचने के लिए स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में घुस गया. वहां पिछले गेट से निकल कर मैं यहां (गेट नंबर 7) पर आया हूं. हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालना चाहते थे मगर दिल्ली पुलिस हमें दौड़ा-दौड़ा कर पीट रही है.”
प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए जेएनयू से जामिया आई श्रेया कहती हैं, “कैब के जरिए सरकार असम सहित पूरे देश में जो दहशत मचा रही है उसके खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए हम लोग यहां जमा हुए थे. मार्च को शुरू हुए 15 मिनट भी नहीं हुआ था कि पुलिस ने छात्रों पर टियर गैस का इस्तेमाल शुरु कर दिया. हजारों की संख्या में छात्र सड़क पर थे जिनपर लाठीचार्ज किया गया है.”
पुलिस पर महिलाओं के साथ बदतमीजी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बदरपुर थाने ले जाया गया. हालांकि छात्रों को यह नहीं बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है. प्रदर्शनकारी छात्रों में से एक वक़ार कहते हैं, ”पुलिस द्वारा जो लाठीचार्ज किया गया है उससे कई छात्रों को चोट आई है, उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा है. पुलिस वालों ने महिलाओं के साथ बदतमीजी की है और उन्हें मारा है.”
जामिया के इकोनोमिक्स डिपार्टमेंट के छात्र तेज प्रकाश भारद्वाज भी टियर गैस के चपेट में आने के कारण ज़ख़्मी हो गए. न्यूज़लॉन्ड्री को उन्होंने बताया, “जैसे ही हम आगे गए पुलिस ने हम पर टियर गैस के गोले छोड़े. जब हम पीछे हटने लगे तो उन्होंने हमें क़रीब 500 मीटर तक दौड़ा-दौड़ा कर मारा.” पोलिटेक्निक विभाग के छात्र शोयब अकरम ने बताया कि छात्रों की पत्थरबाजी का जवाब पुलिस ने खुद पत्थरबाजी, लाठीचार्ज और आंसूगैस के गोले दागकर दिया.
“कैब एंटी पीपल बिल है”
जामिया के एजुकेशन डिपार्टमेंट से हाल ही में रिटायर हुई सर्वत अली भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने पहुंची थीं. वह मौजूदा सरकार को फासीवादी कहती हैं. वह कैब को ‘एंटी पीपल’ बताते हुए कहती हैं, “ये बिल मुस्लिम नौजवानों पर बुरा असर डालेगा. जिस तरह से देश में अल्पसंख्यकों और दलितों की लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं उसको देखते हुए यह बात तय है कि ये सरकार नागरिकता के बहाने उन्हें परेशान करेगी.”
अली आगे कहती हैं “सरकार द्वारा लाया गया ये बिल नफरत फ़ैलाने का काम करेगा. इसकी आंच सिर्फ मुसलमानों तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह बाद में हिंदुओं के निचले तबके तक भी पहुंचेगी.” अली के अनुसार यह बिल भारत को ब्राह्मण राष्ट्र बनाने के लिए लाया गया है.
जामिया की शिक्षिका मनीषा सेठी कहती हैं, “यह बिल भाजपा और संघ के हिन्दु राष्ट्र के एजेंडे को आकार देने के लिए लाया गया है.” अमित शाह द्वारा के बयान कि, इस बिल से भारतीय मुसलमानों को डरने की ज़रूरत नहीं है, पर टिप्पणी करते हुए सेठी कहती हैं, “अमित शाह के इतिहास को देखते हुए भारतीय मुसलमान केवल उनके शब्दों के कारण कोई राहत महसूस नहीं करेगा. यह बिल देश को बांटने वाला है.”
आपको बता दें कि गुरुवार की रात को जामिया की गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं द्वारा फ्लैश लाईट मार्च का आयोजन किया गया था जिसमें हज़ार से भी अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था. उनके द्वारा सड़क जाम करके नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज करवाया गया था. शुक्रवार रात करीब दस बजे यह रिपोर्ट लिखे जाने तक क़रीब दो सौ छात्र जामिया के बाहर जमे हुए थे.
प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि जब तक यह बिल वापस नहीं लिया जाता वो लोग सड़कों पर डटे रहेंगे. प्रदर्शनकारियों ने न्यायालय में इस बिल को चुनौती देने की बात भी कही है. जामिया के छात्र संगठनों ने 14 दिसंबर को ‘यूनिवर्सिटी लॉकडाउन’ और परीक्षाओं का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. शनिवार सुबह छात्रों ने कैम्पस में इकट्ठा होकर परीक्षा को रद्द करने की मांग शुरू कर दी. क़रीब घंटा भर प्रदर्शन करने के बाद जामिया प्रशासन ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है.
जामिया आइसा के महासचिव चंदन कुमार न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहते हैं, “कैब के विरोध में प्रदर्शन करने पर कल पुलिस ने छात्रों पर जो करवाई की है उसके विरोध में हमने हड़ताल करने का निर्णय लिया था. हमारे प्रदर्शन करने के बाद प्रशासन ने अभी परीक्षा रद्द कर दिया है.” चंदन आगे कहते हैं कि आज छात्र यूनिवर्सिटी कैम्पस के अंदर प्रदर्शन करके कैब के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करवाएंगे.
इस मामले में जामिया के कंट्रोलर ऑफ एग्ज़ामिनेशन द्वारा जारी बयान में 14 दिसंबर के दिन आयोजित सभी परीक्षा को करने की बात कही गई है. फिलहाल जामिया कैम्पस के आस-पास के इलाके में धारा 144 लगा दी गई है.
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