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बेगूसराय: मो. कासिम का दावा, पुलिस अधिकारियों ने हकीकत पर डाला पर्दा
“अगर पुलिस अधिकारी मेरा बयान लिखेंगे ही नहीं, तो हम क्या कर सकते हैं. हमने जो आपको बयान दिया है, सारे मीडिया वालों और पुलिस के सामने भी मेरा यही बयान था. मैं मर सकता हूं, लेकिन झूठ नहीं बोल सकता.”
बेगूसराय के रतनपुर मेन रोड पर स्थित एक निजी नर्सिंग होम के उमस भरे कमरे में भर्ती मो. कासिम ने दर्द से कराहते हुए ये बयान दिया. उनकी पीठ से गोली निकाली जा चुकी है. जख्म सुखाने के लिए पीठ और पेट को घुमाकर पट्टियां लगायी गयी हैं. बाएं हाथ में सूई लगायी गयी है, जिससे सैलाइन चढ़ रहा है.
रविवार, 26 मई को मो. कासिम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. वीडियो में उन्होंने बताया था कि राजीव यादव नाम के एक शख्स ने उनसे उनका नाम पूछा. जब उन्होंने अपना नाम मो. कासिम बताया तो राजीव ने उन्हें भद्दी गाली देते हुए कहा: “तू मुसलमान है. तुझको तो पाकिस्तान में होना चाहिए. और फिर गोली मार दी.”
इस मामले को लेकर बेगूसराय पुलिस की तरफ से बयान आया है कि मो. कासिम ने पुलिस को दिये स्टेटमेंट में मुसलमान और पाकिस्तान का ज़िक्र नहीं किया है. पुलिस का ये भी कहना है कि डिटर्जेंट की खरीद को लेकर दोनों में बकझक हुई और इसी के चलते गोली चलायी गयी.
घटना के सिलसिले में बेगूसराय पुलिस ने 27 मई को एक लंबा ट्वीट कर कहा कि चेरिया बरियारपुर की घटना को लेकर सोशल प्लेटफॉर्म पर जो कुछ कहा जा रहा है, घटना वैसी नहीं है और एक शख्स के कृत्य का सुविधानुसार सामान्यीकरण किया जा रहा है. पुलिस ने ट्वीट में लिखा है, “हमें इस जाल में फंसना नहीं चाहिए. मामले की पूरी छानबीन की जानी चाहिए और दोषी को सजा देनी चाहिए. मगर हम सभी से निवेदन करना चाहते हैं कि वे एक आदमी के कृत्य के आधार पर अफवाह न फैलाएं. यह अहसास होना चाहिए कि ये न केवल एक क्षेत्र व पूरे मुल्क में गलत संदेश दे रहा है, बल्कि दीर्घावधि में यह हमारे सामाजिक ताने-बाने को भी बिगाड़ सकता है.”
एसपी के इस ट्वीट को देखें, तो असल घटना और पुलिस की ओर से बतायी जा रही कहानी मेल नहीं खाती है. वह ट्वीट में कहते हैं कि जो अफवाह (कि राजीव यादव ने मो. कासिम का नाम पूछा और मुस्लिम नाम जानकर उसने कहा कि तू मुसलमान है, तुझको तो पाकिस्तान जाना चाहिए) फैलायी जा रही है, घटना वैसी नहीं है. लेकिन, दूसरे ही पल वे यह भी कह रहे हैं कि किसी एक शख्स के कृत्य का सुविधा के लिए सामान्यीकरण कर दिया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि वो एक शख्स के किस कृत्य के सामान्यीकरण की बात कह रहे हैं?
इधर, बेगूसराय से नवनिर्वाचित सांसद व भाजपा नेता गिरिराज सिंह, जो अक्सर मुख़्तलिफ़ विचारधारा के लोगों व नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल करने वालों को पाकिस्तान जाने की नसीहत देते रहते हैं, ने भी इस घटना को लेकर ट्वीट किया. उनका ये ट्वीट एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस ट्वीट के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने सवाल पूछा था कि कासिम को अपनी जान इसलिए गंवानी पड़ी कि उसने अपना नाम बताया. उन्होंने ये भी पूछा था कि ऐसे लोगों को हिम्मत कहां से मिलती है.
ओवैसी के जवाब में गिरिराज सिंह ने लिखा, “ओवैसी हर चीज़ पर अपना बयान देना बंद करें. बेगूसराय की घटना सांप्रदायिक घटना नहीं, आपराधिक घटना है. ओवैसी हर चीज़ पर बिना जानकारी के विषवमन न करें. हिन्दुस्तान को शांति से जीने दें और देश को सांप्रदायिकता के आधार पर तोड़ने की कोशिश न करें.”
पीड़ित मो. कासिम के वायरल वीडियो और उस पर पुलिस के बयान ने मामले को और उलझा दिया है.
इसी उलझन को सुलझाने के लिए न्यूज़लॉन्ड्री ने पीड़ित मो. कासिम से निजी नर्सिंग होम में मुलाकात कर पूरी घटना और पुलिस के दावे पर बात की. उन्हें नर्सिंग होम की दूसरी मंजिल के एक कमरे में रखा गया है. डॉक्टरों की ओर से कम बोलने की हिदायत के बावजूद वह चाहते हैं कि उनका पक्ष ईमानदारी से दर्ज़ किया जाये, लोगों के सामने ही नहीं पुलिस के सामने भी.
उन्होंने न्यूज़लॉन्ड्री के साथ बातचीत में पूरी घटना को कई बार दोहराया और हर बार कहानी एक-सी थी.
मो. कासिम मूलतः चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के खाजहांपुर के रहनेवाले हैं. खाजहांपुर मिश्रित आबादी वाला गांव है. विकलांग कासिम ने घटना के पांच दिन पहले ही डिटर्जेंट की फेरी शुरू की थी. वह आसपास के इलाकों में घूम-घूम कर डिटर्जेंट बेचते हैं. इससे पहले वह घूम-घूम कर मच्छरदानी बेचते थे. इससे पहले वह कुछ दिन बाहर भी थे. कासिम के बाकी तीन भाई भी फेरी ही लगाते हैं. कासिम के परिवार के पास खेती लायक भी ज़मीन नहीं है. फेरी से जो कमाई होती है, उसी से घर का चूल्हा जलता है. कासिम के परिजनों ने कहा कि इलाज पर अब तक दो लाख रुपये खर्च हो चुके हैं.
रविवार की सुबह वह डिटर्जेंट बेचने के लिए अपने गांव से करीब आठ किलोमीटर दूर कुंभी में गये थे. सुबह करीब 6.30 बज रहे होंगे. कासिम की मोटरसाइकिल में एक म्यूजिक सिस्टम भी लगा हुआ था, जो अमूमन सभी फेरीवाली गाड़ियों में लगा रहता है. इस म्यूजिक सिस्टम से लगातार प्रचार किया जाता है.
मो. कासिम कहते हैं, “हम प्रचार का गाना बजाते हुए जा रहे थे. तभी राजीव यादव ने हमसे कहा- बंद कर! मैंने म्यूजिक सिस्टम बंद कर दिया. उसके बाद उसने मेरा नाम पूछा. मैंने नाम बताया कि मेरा नाम कासिम है”.
कासिम के मुताबिक, राजीव ने कहा, गाली देते हुए कहा कि तू मुसलमान है. तुझको पाकिस्तान में रहना चाहिए या तेरे को ऊपर जाना चाहिए.”
कासिम ने कहा कि “राजीव ने जैसे ही ऊपर जाने की बात की तो मैं समझ गया कि वह मुझे मारेगा, तो मैं वहां से भागा. भाग कर करीब चालीस कदम दूर सुरेश की पान की दुकान पर पहुंचा और मोटरसाइकिल लेकर भागने की कोशिश की.”
उन्होंने आगे कहा, “राजीव भी वहां पहुंच गया और पिस्तौल निकाल कर कनपटी पर लगा दिया. जब वह हैमर पीछे चढ़ा रहा था, तो हम समझ गये कि अब हमको गोली मार देगा. हमने अपना सर हटा लिया तो गोली पीठ में लगी. वह दूसरी गोली लोड कर रहा था, तभी मैंने सर से उसे धक्का दिया और गांव की तरफ भागा. गांव के ही कुछ लोगों ने मुझे सरपंच के पास जाने की हिदायत दी, तो वहां से भाग कर मैं सरपंच के पास पहुंचा.”
मो. कासिम का वीडियो वायरल होने के बाद बेगूसराय के एसपी अवकाश कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि उनकी जांच में पता चला है कि सामान के मोलभाव को लेकर हुए विवाद में कासिम को गोली मारी गयी थी.
पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज़ करते हुए कासिम रुआंसा होकर कहते हैं, “हम लरका-बच्चा का कसम खाकर कहते हैं, कभी उसकी ( राजीव यादव) शक्ल नहीं देखे हैं. अंजान में गोली मारा है. मुसलमान जान कर गोली मारा है. हमारा बिज़नेस लेडिज से जुड़ा है. घर-घर जाकर सर्फ बेचते हैं. एक सौ रुपये में तीन किलो. राजीव से डिटर्जेंट की खरीद-बिक्री हुई ही नहीं थी. हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है. कोई बिज़नेस का लाइन नहीं. एक रुपये का लटपट नहीं है उससे.”
मो. कासिम ने आगे कहा, “एसपी, डीएसपी साहब जो बोल रहे हैं, वो बना रहे हैं. जो हकीकत है, वो दुनिया को दिखा नहीं रहे हैं.”
आरोपित का नाम कैसे मालूम हुआ? इस सवाल पर कासिम कहते हैं, “जब वह (आरोपी ) मुझे गालियां दे रहा था, तो उस वक्त आसपास कुछ लोग मौजूद थे. वे लोग उसे राजीव कह कर पुकार रहे थे और मुझे परेशान नहीं करने को कह रहे थे. वहीं से उसका नाम पता चला.”
इस संबंध में एसपी अवकाश कुमार को जब फोन किया गया, तो उनके किसी कर्मचारी ने फोन उठाया और कहा कि घटना के बारे में वे थाना प्रभारी से बात कर लें. उक्त कर्मचारी ने चेरिया बरियारपुर थाने के एक पुलिस अधिकारी का एक नंबर दिया. उस नंबर पर फोन करने पर जिस पुलिस अधिकारी ने कॉल रिसीव किया, उसने साफ लफ़्ज़ों में कहा कि उन्हें कोट न किया जाए.
न्यूजलान्ड्री के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मो. कासिम का बयान लिया, तो उसमें उसने “मुसलमान” होने व पाकिस्तान जाने की धमकी देने का ज़िक्र नहीं किया. उन्होंने मो. कासिम के बयान के संबंध में पूछने पर कहा, “कासिम ने बताया कि राजीव यादव ने आकर उसका नाम पूछा. कासिम ने अपना नाम बताया. राजीव शराब पिये हुए था. वह गाली-गलौज करने लगा. इस पर कासिम ने मना किया कि वह गालियां क्यों बक रहा है. इसी पर उसने गोली चला दी. इसके बाद उसने कुछ नहीं कहा.”
पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “उसने बयान में जो कहा, वही दर्ज़ किया गया. अगर कुछ और लिखा गया होता, तो वह हस्ताक्षर ही नहीं करता. मैंने बयान लिखकर उसके परिजनों को दिखाया. सभी ने कहा कि ठीक है.”
पुलिस अधिकारी ने ये भी कहा कि बयान लेते वक़्त कासिम के परिजन भी मौजूद थे. उनसे इसकी तस्दीक की जा सकती है.
इस रिपोर्टर ने कासिम के साथ ही उसके भाई मो. जावेद, मामा मो. मुख्तार व अन्य परिजनों से भी बातचीत की. सभी ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस के सामने दिये गये बयान में कासिम ने मुसलमान होने और पाकिस्तान चले जाने की धमकी देते हुए फायरिंग करने की बात कही थी.
मो. मुख्तार ने कहा, “पुलिसवाले इस मामले में पर्दा डाल रहे हैं. कासिम ने जो बयान मीडिया के सामने दिया है, वही बयान पुलिस को भी दिया.” कासिम के एक अन्य परिजन ने नाम नहीं छापने की शर्त पर मो. मुख्तार की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि कासिम ने अपने बयान में मुसलमान होने और पाकिस्तान चले जाने की धमकी की बात कही थी, लेकिन पुलिस ने उसे दर्ज़ नहीं किया.
पुलिस से जब हमने कासिम के बयान की कॉपी मांगी, तो उन्होंने कहा कि एसपी के आदेश के बिना वे कॉपी नहीं दे सकते हैं. पुलिस ने पीड़ित व्यक्ति के परिजनों को भी बयान की कॉपी उपलब्ध नहीं करायी है.
पुलिस के अनुसार, सुबह 7.10 बजे कुंभी के सरपंच ने उन्हें फोन कर जानकारी दी कि एक शख्स को गोली मार दी गयी है. उन्होंने कहा, “हमने पहले कासिम को अस्पताल ले जाना उचित समझा ताकि जान बच जाये और बाद में बयान लेने का सोचा.”
सबसे पहले कासिम को बेगूसराय सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां से डाक्टरों ने उसे निजी नर्सिंग होम में रेफर कर दिया, तो सदर अस्पताल के निकट ही स्थित एक नर्सिंग होम में उसे भर्ती कराया गया.
मो. कासिम का कहना है कि घटना के वक्त कुंभी में बहुत सारे लोग थे और वे राजीव यादव को मना भी कर रहे थे कि वह क्यों गरीब आदमी को परेशान कर रहा है. इस रिपोर्टर ने जब कुंभी में दुकानदारों से बात की, तो उन्होंने गोलीबारी की जानकारी होने की बात कही, लेकिन किन वजहों से यह घटना हुई, ये बताने से बचते नज़र आये.
पुलिस ने बताया कि राजीव यादव के ख़िलाफ़ चेरिया बरियारपुर थाने में हत्या की कोशिश की धारा और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज़ कर गिरफ़्तार लिया गया है. हेट क्राइम के मामलों में भारतीय दंड संहिता की दफा 153(ए) भी लगती है. इस धारा के तहत अपराध सिद्ध होने पर अभियुक्त को अधिकतम तीन वर्ष की सज़ा या जुर्माना या फिर सज़ा और जुर्माना दोनों हो सकता है. मो. कासिम के मामले में ये धारा नहीं लगायी गयी है.
कासिम के साथ हुई घटना हाल के दिनों में देश में मज़हबी नफ़रत के चलते बढ़ी हिंसक घटनाओं की लंबी फेहरिस्त का हिस्सा है. विगत 3 मई को बेगूसराय के ही तेघरा थाना क्षेत्र के धनकौल गांव में मो. इश्तेखार नाम के शख्स की बीफ ले जाने के संदेह में बेरहमी से पिटाई की गयी थी. बुजुर्ग मो. इश्तेखार ने न्यूजलॉन्ड्री को बताया कि “वह शाम के वक़्त लौट रहे थे कि रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और बैग खोलकर दिखाने की मांग की. उन्होंने बैग खोलकर दिखाया, तो उन लोगों ने उनकी पिटाई की.”
इस मामले में आरोपितों ने इश्तेखार के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज़ करायी और इश्तेखार ने उनके ख़िलाफ़. इश्तेखार को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया और ठीक होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार लिया था. बाद में उन्होंने जमानत ले ली. जांच के लिए मीट के सैंपल को फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है. जांच की रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी है.
इश्तेखार को न्याय का इंतजार है और इधर दर्द से कराहते कासिम भी न्याय की उम्मीद लगाये बैठे हैं.
कासिम से बात कर जब हम कमरे से बाहर निकलने लगे, तो उन्होंने सिफ़ारिश की, “गरीब को न्याय दिलाइये, सर! चौदह किलो सर्फ बेचने के लिए गया था. देखिये, मुसलमान के नाम पर क्या हो जाता है.”
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