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देवरिया: ‘सफेद व काली कार से जाती थी लड़कियां, रोते हुए लौटती थी’
‘शाम को सफेद व काली कार में बालिका गृह से लड़कियां ले जायी जाती थी, भोर में वे रोते हुये लौटती थी और उनकी आंखें सूजी हुई होती थी.’
यह बयान कथित तौर पर 10 वर्ष की एक मासूम लड़की का है. यह लड़की देवरिया के एक बालिका गृह ‘मां विंध्यवासिनी देवी समाज सेवा व प्रशिक्षण संस्थान’ के नरक से किसी तरह निकलकर 5 अगस्त को वहां के महिला थाने पहुंची थी.
इस बालिका गृह की कहानी बिल्कुल बिहार के मुजफ्फरपुर की तरह ही है, जिसे लेकर सड़क से संसद तक माहौल गरम है.
मासूम बच्ची के बयान दिल दहलाने वाले हैं. गैर सरकारी संस्था मां विंध्यवासिनी देवी समाज सेवा व प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संचालित इस बालिका गृह पर देवरिया पुलिस ने पांच तारीख की देर रात छापेमारी कर 24 लड़कियों और महिलाओं को मुक्त करवाया. यह बालिका गृह देवरिया के स्टेशन रोड पर स्थित है.
मां विंध्यवासिनी बालिका गृह से जुड़ी चौंकाने वाली जानकारी यह भी है कि इसकी अनियमितताओं की जांच पूर्व में सीबीआई ने की थी और अनियमितताओं के आधार पर जून 2017 में ही इसकी मान्यता रद्द कर दी थी. देवरिया के जिला प्रोबेशन अधिकारी ने हफ्ते भर पहले ही अवैध तरीके से चल रही इस संस्था की संचालिका और अधीक्षिका के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था.
इसके बावजूद इस बात पर यकीन कर पाना मुश्किल है कि एक अवैध तरीके से संचालित हो रही संस्था में नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के बावजूद जिला प्रशासन को इस बात की भनक नहीं थी.
पुलिस की कार्रवाई के बाद देवरिया के एसपी रोहन पी कनय ने 5 अगस्त को रात पौने ग्यारह बजे ही एक पत्रकार वार्ता कर मीडिया को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा, “बालिका गृह से भाग कर आई एक बच्ची ने आरोप लगाया था कि उससे झाड़ू पोछा कराया जा रहा था. उसी आधार पर पुलिस की चार टीमों ने महिला कांस्टेबल के साथ छापेमारी की है. बालिका गृह के पांच कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.”
कनय ने आगे बताया, “प्रथम दृष्टया लड़कियों के यौन शोषण की बात भी सामने आ रही है. पूरे मामले की छानबीन की जा रही है.” एसपी ने बताया कि संस्था के रिकार्ड के मुताबिक यहां कुल 42 लड़कियां और महिलाएं रह रही थीं. जिसमें से 24 मौके पर मिली हैं. बाकी लड़कियां फिलहाल लापता हैं. पुलिस उनका पता लगा रही है.
24 में से 21 बच्चियां मां विंध्यवासिनी बालिका गृह के स्टेशन रोड ब्रांच से छुड़ाई गईं और तीन लड़कियां एक अन्य केन्द्र रजला से बरामद हुई हैं.
दैनिक हिंदुस्तान के गोरखपुर संस्करण की एक ख़बर में बताया गया है कि शहर के स्टेशन रोड पर मां विंध्यवासिनी देवी समाज सेवा एवं प्रशिक्षण संस्थान के तत्वावधान में बाल गृह, बालिका गृह एंव शिशु गृह का संचालन होता है. करीब तीन वर्षों से इसे सरकारी अनुदान नहीं मिल रहा था. यह मामला कोर्ट में भी है. जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय ने संस्था को अवैध बताते हुए इसे नोटिस जारी किया था. करीब एक सप्ताह पूर्व उन्होंने पुलिस की मदद से यहां पर रखी गई लड़कियों को मुक्त कराने का प्रयास किया तो संस्था के लोग हिंसक विरोध पर उतारू हो गए थे. जिसके बाद टीम को वापस लौटना पड़ा था.
इसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडेय ने संस्था की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी और अधीक्षिका कंचनलता के खिलाफ कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराया था. रविवार की रात करीब साढ़े नौ बजे पुलिस ने संस्था पर छापेमारी की. कार्रवाई शुरू होते ही हड़कंप मच गया. इस दौरान 24 लड़कियों और महिलाओं को मुक्त कराते हुए अपनी कस्टडी में ले लिया गया.
एक अन्य अख़बार अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक पुलिस से शिकायत करने वाली 10 वर्षीय बालिका के हवाले से बताया गया है कि बालिका गृह में शाम को चार बजे के बाद रोजाना काली और सफेद कारों में कुछ लोग आते थे और कुछ लड़कियों को लेकर चले जाते थे. लड़कियां देर रात तक वापस लौटती थीं. उसने यह भी बताया कि लड़कियों को ले जाते वक्त मैडम (संचालिका) भी साथ होती थीं. बालिका गृह में बच्चियों के साथ गलत काम होता है. लड़की के मुताबिक उससे भी झाडू़-पोछा तथा घर के अन्य काम कराये जाते थे.
अपनी प्रेस वार्ता में एसपी कनय ने बताया कि बालिका गृह के रजिस्टर में अलग-अलग आयु वर्ग की 42 बालिकाओं और महिलाओं के नाम दर्ज हैं. मिलान करने पर 18 लड़कियां मौके पर नहीं मिली. इस संबंध में संस्था की संचालिका श्रीमती गिरिजा त्रिपाठी और उनके पति मोहन त्रिपाठी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
तीन साल में बालिका गृह में आई 930 बालिकायें
दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर पर भरोसा करें तो बालिक गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी ने पुलिस व प्रशासन की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं.
पुलिस की हिरासत में मौजूद गिरिजा त्रिपाठी से जब मीडिया ने सवाल किया तो उनका तीखा जवाब एक सवाल के रूप में आया. उन्होंने कहा- यदि उनकी संस्था अवैध थी तो पुलिस ने पिछले तीन साल में बालिका गृह में 930 बालिकाओं को क्यों भेजा था. गिरिजा ने कहा, “तीन साल से मैं अपने संसाधनों के दम पर बालिका गृह चला रही हूं. जब अपने खर्च का बिल प्रशासन को भेजा तो बिल का भुगतान न करना पड़े, इसलिये छापे की कार्रवाई की गयी है.”
गिरिजा त्रिपाठी के इस सवाल का जवाब पुलिस प्रशासन के पास भी नहीं है. अधिकारी इस सवाल से ये कह कर कन्नी काटते नज़र आये कि जांच कराई जा रही है कि यह सब कैसे हुआ.
प्रशासन पर गिरी गाज
बालिका गृह पर कार्रवाई के मामले में लापरवाही बरतने के आरोपी देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया है. देवरिया का नया डीएम अमित किशोर को बनाया गया है. इस मामले में मौजूदा डीपीओ प्रभात कुमार पूर्व डीपीओ अभिषेक पांडेय को भी निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा दो अंतरिम डीपीओ नीरज कुमार और अनूप सिंह पर भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिये गए हैं.
इस बीच देवरिया की घटना ने सूबे में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. विपक्षी दलों के हमले तेज हो गये हैं. सरकार ने इस मामले में आनन-फानन कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी का बयान आया है कि बालिका संरक्षण गृह अनधिकृत रूप से चल रहा था. कई बार इस संरक्षण गृह को बंद करने के लिए नोटिस दिए गए. मामला बेहद गंभीर है, हर बिंदु पर जांच की जाएगी. इस बात की शिनाख्त होगी कि यहां देह व्यापार होता था या नहीं?
डॉ रीता जोशी ने कहा कि हमने लखनऊ से एक टीम वहां भेजी है. प्रमुख सचिव, महिला और बाल कल्याण से भी रिपोर्ट मांगी गई है.
इस बीच ताजा जानकारी यह है कि सरकार के आदेश पर हेलिकॉप्टर से अगले दिन शाम चार बजे अपर मुख्य सचिव बाल कल्याण विभाग रेणुका कुमार और एडीजी महिला हेल्प लाइन अंजू गुप्ता जांच के लिये देवरिया पहुंच गयीं. इन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ लगभग दो घंटे बैठक कर मामले के सभी पहलुओं की जानकारी ली.
बैठक से बाहर निकलने के बाद मीडियाकर्मियों से रेणुका कुमार ने कहा कि मामले की जांच चल रही है. जांच के बाद ही कुछ बताया जा सकता है.
6 अगस्त को पूरे दिन पूरा प्रशासनिक अमला बालिका गृह से संबंधित जानकारियों को खंगालने में जुटा रहा. जांच भी शुरू हो गयी है. एसडीएम ने बालिका गृह से मुक्त कराई गयी बालिकाओं और महिलाओं से पूछताछ की. इनका जिला अस्पताल में मेडिकल कराया गया. उधर बालिका गृह की संचालिका और उनके पति से पुलिस के आला अफसरों ने पूछताछ की. लखनऊ और देवरिया में राजनीतिक सरगर्मी तेज रही. विपक्षी दलों ने इस घटना को बिहार के मुजफ्फरपुर कांड का विस्तार बताया और आरोप लगाया कि मान्यता स्थगित होने के बावजूद भी पुलिस द्वारा रेस्क्यू की गयी लड़कियों और महिलाओं को इस बालिका गृह में भेजा जाता रहा. जो यहां की संचालिका के राजनीतिज्ञों और नौकरशाही के साथ गहरे संबंध की ओर इशारा करती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की पुख्ता जांच के आदेश दिए हैं.
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