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रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली: क्या सिर्फ ‘वोट चोरी’ था लोगों का मुद्दा?

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को इंडिया गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की. विपक्षी दलों के नेताओं की इस रैली का मकसद चुनावी सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ गठबंधन के विरोध को आगे बढ़ाना था.

गठबंधन ने पहले मिंटो ब्रिज से रामलीला मैदान तक मार्च निकालने का ऐलान किया था. हालांकि, राहुल गांधी दोपहर करीब 2:30 बजे अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव के साथ एक गाड़ी में सवार होकर सीधे रैली स्थल पहुंचे. वहां उन्होंने विशाल जनसभा को संबोधित किया. उनके अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भी सभा को संबोधित किया.

रैली में शामिल नेताओं और लोगों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की. बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए लोगों ने बताया कि जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं. वहीं, कुछ लोगों ने महंगाई, प्रदूषण और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए. इससे साफ था कि रैली का दायरा केवल ‘वोट चोरी’ के आरोपों तक सीमित नहीं था.

न्यूज़लॉन्ड्री ने इस रैली में कई राज्यों से आए राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ऐसे आम लोगों से भी बात की, जिनका किसी राजनीतिक दल से कोई जुड़ाव नहीं है. हमारे अनुमान के मुताबिक, रैली में कम से कम एक लाख लोग शामिल हुए. मैदान के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिन्हें अंदर जगह नहीं मिल सकी.

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