Khabar Baazi
जंतर-मंतर प्रदर्शन की कवरेज कर रहे न्यूज़लॉन्ड्री के तीन पत्रकार और इंटर्न हिरासत में, फोन भी छीने, बाद में छोड़ा
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस ने न्यूज़लॉन्ड्री के तीन पत्रकारों अश्वनी कुमार सिंह, आस्था सव्यसाची और अनमोल प्रितम के साथ ट्रेनी पत्रकार अंशु को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने अनमोल और अंशु के फोन जब्त कर लिए, जबकि अश्वनी के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई और उनका फोन छीन लिया गया. ये तीनों फोन न्यूज़लॉन्ड्री के आधिकारिक डिवाइस हैं, जिनका इस्तेमाल रिपोर्टिंग के लिए किया जा रहा था. पत्रकारों ने जब पुलिस को बताया कि वे मीडिया से हैं, तो कथित तौर पर उनसे कहा गया, “कोई मीडिया नहीं है.”
प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों समेत करीब 30 लोगों को एक ही बस में बैठाकर उत्तर दिल्ली स्थित छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया. न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकारों ने इंस्पेक्टर धन सिंह मलिक की पहचान उस पुलिस अधिकारी के रूप में की, जिसने फोन छीने.
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने न्यूज़लॉन्ड्री से जुड़े सभी लोगों को फिलहाल छोड़ दिया है.
स्क्रॉल के पत्रकार आयुष तिवारी भी हिरासत में
स्क्रॉल के खोजी पत्रकार आयुष तिवारी को भी दिल्ली पुलिस ने आईटीओ के पास हिरासत में ले लिया. संस्थान की एग्जीक्यूटिव एडिटर सुप्रिया शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी.
शर्मा ने लिखा, “मेरे सहयोगी और भारत के बेहतरीन खोजी पत्रकारों में से एक आयुष तिवारी को दिल्ली पुलिस ने आईटीओ के पास हिरासत में ले लिया है.”
उन्होंने बताया कि आयुष जंतर-मंतर पर भी नहीं थे और उन्होंने अपना प्रेस कार्ड स्पष्ट रूप से लगा रखा था. पुलिस को कई बार यह बताने के बावजूद कि वे पत्रकार हैं, उन्हें जबरन एक वैन में बैठाकर ले जाया गया.
कंटेंट क्रिएटर काव्या और उनकी टीम को भी हिरासत में लिए जाने की खबर
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और स्वतंत्र पत्रकार काव्या और उनकी टीम को भी दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर है. वे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन की कवरेज के लिए जा रही थीं. मालूम हो कि काव्या, केके क्रिएट की संस्थापक हैं.
गौरतलब है कि ये हिरासतें राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस की व्यापक कार्रवाई के बीच हुई हैं. प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंध लगाए जाने और उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं.
जंतर-मंतर के पास द पार्क होटल में क्या हो रहा है?
जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के पिछले प्रदर्शन के दौरान कई इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर जंतर-मंतर के पास स्थित पार्क होटल में रुके थे और वहीं से प्रदर्शन को कवर किया था. इस बार भी वे होटल पहुंचे, लेकिन हालात अलग थे.
होटल में सुबह से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी रही. होटल के कर्मचारियों ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि पुलिसकर्मी पिछली रात से ही वहां मौजूद थे और उन्हें निर्देश दिया गया था कि बिना बुकिंग के किसी को होटल में प्रवेश न दिया जाए. जिन लोगों ने कमरे बुक किए थे, उन्हें भी पुलिस बैरिकेडिंग के कारण होटल में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था.
न्यूज़लॉन्ड्री को यह भी पता चला कि होटल में कमरा लेकर ठहरे इन्फ्लुएंसर हर्ष यादव के कमरे का इंटरनेट बंद कर दिया गया. पुलिस की हिरासत से बचने के लिए वह कथित तौर पर अपने कमरे में बंद हो गए हैं. वहीं, अन्य इन्फ्लुएंसरों को भी होटल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
पुलिस यूट्यूबर्स और पारंपरिक मीडिया के बीच कर रही है फर्क
प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पुलिस यूट्यूब पर काम करने वाले पत्रकारों और पारंपरिक मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के बीच फर्क करती दिख रही है. यूट्यूबर्स को प्रदर्शन कवर करने से रोके जाने की खबरें हैं, जबकि पारंपरिक मीडिया के पत्रकारों को प्रवेश दिया जा रहा है.
पुलिसकर्मियों द्वारा मीडियाकर्मियों से सीधे पूछा जा रहा है कि क्या वे यूट्यूबर हैं. जवाब हां होने पर उन्हें प्रवेश देने से इनकार किया जा रहा है. इसके अलावा, पुलिस पत्रकारों से प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) या सरकार द्वारा जारी अन्य मान्यता-पत्र भी मांग रही है.
मीडिया की शिकायत करना आसान है. उसे बेहतर बनाने के लिए कुछ क्यों नहीं किया जाता? स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करने के लिए आज ही न्यूज़लॉन्ड्री को सब्स्क्राइब करें.
Also Read
-
‘Today I only see denuded land’: Mango orchards give way to Adani’s power plant
-
Will Gen Z vote out the BJP in ’27? Sreenivasan Jain asks UP’s youth
-
A pristine forest, wildlife, over 32,000 trees at risk: Anger grows over Torrent project in Maharashtra
-
TV Newsance 355 | ‘Aap itne democratic kyun ho gaye?’ Arnab’s Diwali question
-
उत्तराखंड: समय-सीमा खत्म होने के बाद चुनाव अधिकारियों ने दर्ज की 2 हजार से ज्यादा आपत्तियां