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एक हफ्ते में दो घटनाएं, एसआरएफटीआई में पढ़ाई रुकी: छात्र बोले- ‘पहले सुरक्षा, फिर क्लास’
“मैं कुछ देर पहले ही अस्पताल से वापस आई हूं. मुझ पर मेरी हथेली जितना बड़ा पत्थर फेंका गया था. वो पत्थर नहीं, ईंट थी.”
सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई), कोलकाता की एक छात्रा ने न्यूज़लॉन्ड्री से यह बात उस घटना के अगले दिन बताई, जिसमें उसके मुताबिक कॉलेज गेट के बाहर से पत्थर फेंके गए. वह उन दो छात्राओं में शामिल हैं, जिन्हें 4 अक्टूबर की घटना में चोट लगी. एक छात्रा के सिर में चोट आई, जबकि दूसरी को डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी है.
पिछले एक हफ्ते में एसआरएफटीआई में दो बार तनाव और झड़प की स्थिति बन चुकी है. 27 सितंबर को कॉलेज कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम के विरोध के दौरान छात्रों और कार्यक्रम में शामिल लोगों के बीच मारपीट हुई थी.
इसके ठीक एक हफ्ते बाद, 4 अक्टूबर को हिंदू जागरण मंच से जुड़ी रैली कॉलेज के गेट तक पहुंची. छात्रों का आरोप है कि इस दौरान गेट तोड़ने की कोशिश हुई और बाहर से पत्थर और पानी की बोतलें फेंकी गईं.
इन घटनाओं के बाद छात्रों ने प्रशासन से सुरक्षा और हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कॉलेज में पढ़ाई शुरू नहीं की जाएगी.
एक हफ्ते में दो घटनाएं
गौरतलब है कि 27 सितंबर को कॉलेज प्रशासन ने आरएसएस से जुड़ी संस्था अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) को कैंपस में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी थी. स्टूडेंट काउंसिल ने इसका विरोध किया. छात्रों की आपत्ति थी कि कॉलेज के संसाधनों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक विचारधारा से जुड़ी संस्था के कार्यक्रम के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
विरोध के दौरान छात्रों और कार्यक्रम में शामिल लोगों के बीच झड़प हुई. छात्रों का आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें दौड़ाकर पीटा गया. इस घटना में कई छात्र घायल हुए थे. न्यूज़लॉन्ड्री ने इस घटना पर पहले भी रिपोर्ट की है.
इस घटना के बाद 4 अक्टूबर को ‘बोंगियो हिंदी जागरण जादवपुर जिला’ नाम के एक फेसबुक पेज पर अजय नगर चौराहे से एसआरएफटीआई तक मार्च निकालने का पोस्टर साझा किया गया. पोस्ट में बंगाली हिंदुओं को जागृत करने की अपील की गई थी.
स्टूडेंट काउंसिल के सदस्य नचिकेत के मुताबिक, छात्रों को इस रैली की जानकारी दो दिन पहले ही मिल गई थी. उन्होंने बताया कि छात्रों ने इसकी जानकारी वाइस चांसलर, पुलिस अधिकारियों और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को दी थी.
नचिकेत के मुताबिक, रैली वाले दिन छात्रों ने वीसी से मुलाकात कर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उनके अनुसार, वीसी ने कहा कि रैली आएगी और इसे रोकना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है. नचिकेत का यह भी आरोप है कि छात्रों से उनके नाम सामने आने को लेकर धमकी भरे अंदाज में बात की गई.
कॉलेज गेट पर पहुंची भीड़
4 अक्टूबर को निकली रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. छात्रों के मुताबिक, कई लोगों के हाथों में भगवा झंडे थे और कुछ के पास डंडे भी थे. छात्रों का आरोप है कि भीड़ में आपत्तिजनक और हिंसक नारे लगाए गए.
करीब शाम 3 बजे भीड़ कॉलेज गेट के सामने पहुंची. छात्रों के मुताबिक, कुछ लोगों ने गेट तोड़ने की कोशिश की. पहले से दी गई सूचना के चलते पुलिस कॉलेज के बाहर मौजूद थी और उसने भीड़ को कैंपस में प्रवेश करने से रोक दिया.
मौके पर मौजूद नचिकेत ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “वो लोग गेट पर पहुंचकर गेट तोड़ने लगे और बाहर से पानी की बोतलें और पत्थर फेंकने लगे. हम वहीं खड़े थे और उनके जवाब में ‘जय भीम’ और ‘इंकलाब’ के नारे लगाने लगे.”
छात्रों के मुताबिक, पत्थरबाजी में दो छात्राएं घायल हुईं. कुछ अन्य छात्रों को भी मामूली चोटें आईं.
एक हफ्ते से बंद हैं क्लास और वर्कशॉप
छात्रों का कहना है कि 27 सितंबर की घटना के बाद से कॉलेज में क्लास, लैब और वर्कशॉप नहीं हुए हैं. छात्रों ने वीसी के सामने कई मांगें रखी हैं. इनमें 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की घटनाओं में छात्रों पर हमला करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना और कॉलेज के वीसी, रजिस्ट्रार तथा एओ के इस्तीफे की मांग शामिल है.
छात्रों का कहना है कि इन मांगों पर कार्रवाई के बाद ही वे कैंपस में पढ़ाई दोबारा शुरू करेंगे. इस बीच उन्होंने एक सॉलिडैरिटी मार्च भी निकाला.
एसआरएफटीआई के छात्रों ने सोशल मीडिया पर 4 अक्टूबर की रैली की जानकारी साझा की थी. उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की थी. एफटीआईआई पुणे, एसआरएफटीआई कोलकाता और एफटीआईआई ईटानगर के छात्र संघों ने भी प्रशासन से छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी.
“हम वापस आएंगे…”
नचिकेत का दावा है कि रैली के दौरान हिंदू जागरण मंच से जुड़े लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया.
फिलहाल, दो घटनाओं के बाद छात्र अब कैंपस में सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले ही प्रशासन और पुलिस को संभावित रैली की जानकारी दे दी थी, इसके बावजूद 4 अक्टूबर को भीड़ कॉलेज गेट तक पहुंची और पत्थरबाजी हुई.
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस मामले में कॉलेज प्रशासन का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की. खबर लिखे जाने तक हमारी कॉल का जवाब नहीं मिला था.
हालांकि, एसआरएफटीआई ने 4 अक्टूबर की घटना पर चिंता जताते हुए एक बयान जारी किया. बयान में कहा गया कि कैंपस के बाहर जमा भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था बाधित की, जिसके बाद पुलिस की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया. इसके अलावा संस्थान ने हिंसा और डराने-धमकाने की निंदा करते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और घायल छात्रों को हरसंभव सहायता देने की बात कही है.
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