Khabar Baazi
गुजरात: बजरंग दल के नेता द्वारा न्यूज़ एंकरों को त्रिशूल बांटने का सच
गुजरात का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. एक न्यूज़रूम में बजरंग दल के एक नेता महिला पत्रकारों को त्रिशूल देते हुए दिखते हैं. महिला पत्रकार त्रिशूल लेती हैं और फिर उससे गला काटने का इशारा करती दिखाई देती हैं.
यह वीडियो गुजराती न्यूज़ चैनल ‘प्रदेश 24 गुजराती’ का है. वीडियो में दिखाई दे रही महिला पत्रकारों में चैनल की प्रमुख भूमि पटेल और एंकर प्रिया गड़वी शामिल हैं. वहीं, पत्रकारों को त्रिशूल बांटने वालों का नेतृत्व बजरंग दल के ज्वलित मेहता कर रहे हैं. मेहता गुजरात में बजरंग दल के वाइस प्रेसिडेंट हैं.
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर कई तरह के दावे वायरल हुए. इन दावों की पड़ताल कर हमने पाया कि वीडियो का असली संदर्भ बिल्कुल अलग है.
न्यूज़ रूम में त्रिशूल क्यों बांटें गए?
करीब डेढ़ साल पहले शुरू हुए गुजराती न्यूज़ चैनल ‘प्रदेश 24 गुजराती’ ने हरियाणा के विवादित धार्मिक नेता और फिलहाल जमानत पर बाहर रामपाल को लेकर कुछ स्टोरी की थीं. इनमें से एक वीडियो में प्रिया गढ़वी ने एंकरिंग की थी.
चैनल के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल सिंह ने हमें बताया कि बीते कई सप्ताह से प्रिया को, जो सिर्फ़ 21 साल की हैं, रामपाल के शिष्यों की ओर से धमकियां मिल रही हैं. लेकिन हद तब हो गई जब प्रिया को धमकी दी गई कि एआई की मदद से उनकी न्यूड तस्वीरें बनाकर वायरल कर दी जाएगी और उन्हें बदनाम कर दिया जाएगा. उन्हें रामपाल से जुड़ी स्टोरी न करने की चेतावनी दी गई.
सिंह के अनुसार यह सिलसिला 30 अगस्त से शुरू हुआ था. उस खेडा जिले के एक गांव में रामपाल के शिष्य एक किताब ‘ज्ञान गंगा’ बांट रहे थे. किताब में हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी थीं. गांव वालों ने विरोध किया और रामपाल के शिष्यों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. चैनल ने इस घटना की रिपोर्ट की.
इसके बाद पहले उनसे वीडियो हटाने को कहा गया. राहुल कहते हैं, ‘‘हमने तो सिर्फ़ रिपोर्ट किया था. जिसके बाद वो हमें लगातार कॉल करके धमकी दे रहे थे. सुबह से शाम तक कॉल किया. उनकी मांग थी कि भगवान का आदेश है. इस चैनल को रिपोर्ट करना है.’’ रामपाल के शिष्य उन्हें ‘भगवान’ मानते हैं.
‘‘जब धमकियां बढ़ीं, तो चैनल ने रामपाल के समूह को एक डिबेट का प्रस्ताव दिया, जिसमें एक पक्ष से हिंदू धर्म के धार्मिक नेता और दूसरे पक्ष से रामपाल के समूह का प्रतिनिधि होता, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए. धमकियां जारी रहीं. जिसके बाद चैनल ने रामपाल के अतीत पर एक वीडियो बनाया, जिसे प्रिया ने एंकर किया. उसके बाद वे लोग प्रिया को निशाना बनाने लगे. 14 सितंबर के बाद यह सिलसिला तेज़ हो गया. परेशान होकर चैनल और प्रिया दोनों ने अहमदाबाद साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई.’’ राहुल हमें बताते हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस मामले में ज्वलित मेहता से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने तबीयत खराब होने का हवाला देकर बात नहीं की. विवाद सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने चैनल को अपना समर्थन दिया. चैनल ने भी इस समर्थन को अपने टिकर पर बार-बार चलाया.
इसी दौरान एक शो में चैनल की हेड भूमि पटेल और बजरंग दल के ज्वलित मेहता साथ बैठे नज़र आए. भूमि पटेल के हाथ में त्रिशूल था. भूमि ने मेहता से पूछा कि उन्होंने त्रिशूल क्यों दिया. जवाब में ज्वलित मेहता ने कहा, ‘‘हमें जानकारी मिली है कि रामपाल के शिष्यों ने आपके एंकर को धमकी दी है. रामपाल जैसे राक्षस से बचने के लिए हिंदू धर्म के प्रतीक त्रिशूल को गिफ्ट के तौर पर दिया है. हम जानते हैं कि आप महिलाएं खुद की रक्षा कर सकती हैं, लेकिन आप अकेली नहीं हैं. हम आपके साथ हैं.’’
वायरल वीडियो में त्रिशूल से गला काटने जैसा सांकेतिक इशारा भी किया गया. सोशल मीडिया पर इसे कुछ लोगों ने 2002 के गुजरात दंगे और मुस्लिम समुदाय के विरोध से जोड़ दिया.
हालांकि, इसको लेकर राहुल कहते हैं, ‘‘लोग इसे अलग-अलग तरह से देख रहे हैं. बिना वीडियो का सच जाने वो इधर-उधर जोड़ रहे हैं. आप हमसे सहमत या असहमत हो सकते हैं लेकिन सच यह है कि हमारी साथी ने यह इशारा रामपाल के लोगों के लिए किया था. गुजरात की महिलाएं खुद की रक्षा करने में सक्षम हैं, लेकिन बजरंग दल के लोगों ने सांकेतिक तौर पर त्रिशूल दिया है.’’
संत रामपाल से बीते 25 साल से जुड़े अहमदाबाद के श्याम सुंदर ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, ‘‘खेड़ा जिले में ग्रामीणों ने बोला कि ज्ञान गंगा किताब में गलत लिखा हुआ है. जिसे चैनल की तरफ से चलाया गया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि रामपाल संत कहलाने के लायक नहीं है. जिससे भक्तों में नाराजगी हुई. तो उन्होंने फोन किया कि आप बताओ कि किताब में कहां गलत लिखा हुआ है.’’
वहीं महिला पत्रकार को धमकी देने और उनकी एआई से तस्वीर बनाये जाने के आरोप में श्याम ने कहा कि उनको इसकी जानकारी नहीं है.
बजरंग दल में ‘त्रिशूल दीक्षा’
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) में त्रिशूल बांटने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. इसे 'त्रिशूल दीक्षा' कहा जाता है. ऐसे कार्यक्रमों में शामिल युवाओं की कमर के पास छोटे आकार के त्रिशूल लटके दिखाई दे सकते हैं.
ऐसा माना जाता है कि त्रिशूल दीक्षा की शुरुआत गुजरात से हुई थी. 2003 में टाइम्स ऑफ इंडिया ने गुजरात वीएचपी के तत्कालीन महासचिव कौशिक मेहता के हवाले से लिखा था कि ऐसा पहला कार्यक्रम 1989 में सुरेंद्रनगर में हुआ था.
त्रिशूल बांटने को लेकर कई बार विवाद भी हुए हैं. 2003 में राजस्थान सरकार ने त्रिशूल के वितरण पर प्रतिबंध लगाया था. इसके कुछ ही दिन बाद, 13 अप्रैल 2003 को अजमेर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को त्रिशूल बांटने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. उसी साल वीएचपी के तत्कालीन नेता प्रवीण तोगड़िया को भी राजस्थान में त्रिशूल वितरण पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने के बाद गिरफ्तार किया गया था.
हालांकि, आज भी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को त्रिशूल दीक्षा की खबरें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं.
Also Read
-
‘I didn’t know my name was deleted’: Voters in Okhla on the pre-SIR ‘clean-up’
-
ECI revises SIR notices after Indian Express report — and puts out a unity photo
-
‘Just colleagues disagreeing’: How the Election Commission rift played out on TV news
-
Long queues, voters in limbo: In Delhi seat with largest SIR deletions
-
‘हमें एंटी-नेशनल और कॉकरोच कहा’: कोलकाता फिल्म इंस्टीट्यूट में हुए बवाल का पूरा हाल