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गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकराई पत्रकार रवि नायर की अंतरिम जमानत याचिका
गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी समूह की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर की अंतरिम रिहाई की याचिका ठुकरा कर दी है. बार एंड बेंच ने इसकी जानकारी दी है.
कोर्ट ने इससे पहले अडाणी एंटरप्राइजेज को नायर की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था. मामले की सुनवाई तब 23 सितंबर तक टाल दी गई थी. बुधवार को जस्टिस एमके ठक्कर ने नायर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने कहा कि वह अगले बुधवार को आदेश सुनाएगा.
अडाणीवॉच डॉट ओआरजी के लिए लिखने वाले नायर को गांधीनगर की न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) की अदालत ने फरवरी में मानहानि का दोषी ठहराया था. मामला अडाणी समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार, क्रोनी कैपिटलिज्म और सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़े उनके ट्वीट्स और लेखों का था. अदालत ने उन्हें एक साल की साधारण कैद और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी.
इसके बाद सेशंस कोर्ट ने उनकी अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगा दी थी और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था. हालांकि, इसके लिए उन्हें नियमित रूप से अदालत में पेश होने और अपना पासपोर्ट जमा कराने जैसी शर्तों का पालन करना था.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद नायर को दोबारा हिरासत में ले लिया गया.
वहीं, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 3 सितंबर के सेशंस कोर्ट के आदेश में पहले कहा गया था कि नायर लापता हैं और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहे हैं. इसके बाद 17 सितंबर के आदेश में अदालत ने वारंट रद्द करने की उनकी मांग खारिज कर दी और उन्हें जेल भेजने का निर्देश दिया. इसके बाद नायर ने रिहाई के लिए हाईकोर्ट का रुख किया.
बीते सोमवार को जस्टिस एमके ठक्कर की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अडाणी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मितेश अमीन ने मामले में “कुछ कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं” को रिकॉर्ड पर रखने के लिए थोड़े समय की मांग की. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नायर के वकील अधिवक्ता अभिक चिमनी ने इसका विरोध किया और अंतरिम राहत की मांग की.
चिमनी ने दलील दी कि मामला पहले ही अपील के चरण में है और सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला उनके मुवक्किल के पक्ष में है. बार एंड बेंच के मुताबिक, उन्होंने अदालत में कहा, “मुझे जेल में एक दिन भी क्यों बिताना चाहिए?”
इस दौरान कोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को अतिरिक्त समय तो दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि मामले में आगे कोई और देरी नहीं होने दी जाएगी.
मालूम हो कि अडाणी एंटरप्राइजेज ने सितंबर, 2021 में नायर के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था. कंपनी का आरोप था कि अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच नायर की ओर से अडाणी समूह के बारे में किए गए ट्वीट्स से निवेशकों और नियामकों के बीच समूह की प्रतिष्ठा को गलत तरीके से नुकसान पहुंचा.
नायर का कहना है कि उनके पोस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित थे और उन्हें जनहित में की गई पत्रकारिता के तौर पर देखा जाना चाहिए.
‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं.
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