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महिला पत्रकारों ने लगाए दिल्ली पुलिस पर हिरासत में मारपीट के गंभीर आरोप, प्रेस संगठनों ने की निंदा
दिल्ली की दो महिला पत्रकारों ने गुरुवार को आरोप लगाया कि दक्षिणी दिल्ली में समाचार कवरेज (रिपोर्टिंग) के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की.
फिलहाल इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की कोई आधिकारिका प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. वहीं, साकेत थानाध्यक्ष दिनेश कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में इस मामले में किसी भी प्रकार की टिप्पणी से इनकार कर दिया.
सोशल मीडिया पर पोस्ट 4पीएम न्यूज़नेटवर्क के वीडियो में पत्रकार शाहीन खान एक थाने में दिखाई दे रही हैं. जहां वह मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगा रही हैं. साथ ही वह अपनी एक महिला साथी नफीसा के शरीर पर भी चोट के निशान दिखा रही हैं.
इस वीडियो के साथ 4 पीएम न्यूज़ नेटवर्क ने एक लंबा पोस्ट भी किया है. जिसमें लिखा है, “क्या मुख्यमंत्री से सवाल पूछना अब इतना बड़ा अपराध हो गया है कि पत्रकार को पुलिस बेरहमी से पीटेगी? आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ जो हुआ, वह बेहद गंभीर और डराने वाला है.”स
पोस्ट में आगे लिखा है, “शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं. शाहीन का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते थाने ले गई. उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुना, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई.”
शाहीन के अलावा पत्रकार नफीसा खान से भी मारपीट की बात सामने आई है. न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में इन दोनों से जुड़े एक शख्स ने बताया कि साकेत मैक्स अस्पताल के नए भवन का उद्घाटन था. इस दौरान ये दोनों पत्रकार रिपोर्टिंग के लिए पहुंची थी. जहां से दोनों को हिरासत में ले लिया गया.
इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) ने इस घटना को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है. आप नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “दो महिला रिपोर्टरों को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने पर दिल्ली पुलिस ने बहुत बेरहमी से पीटा है. महिला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, यह शर्मनाक है.”
वहीं, दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री और आप नेता सोमनाथ भारती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है. शाहीन एक पत्रकार होने के साथ-साथ मेरे विधानसभा क्षेत्र की निवासी भी हैं और इस घटनाक्रम से मैं बेहद स्तब्ध हूं. मैं माननीय उपराज्यपाल से अनुरोध करता हूं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और इसमें शामिल पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करें. इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और पत्रकार को अपना कर्तव्य निभाने के दौरान बर्बरता का शिकार बनाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए.”
वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “BJP सरकार और दिल्ली पुलिस की गुंडई. 4PM की पत्रकार शाहीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और मारपीट की. शाहीन का कहना है- जब पुलिसवालों को पता चला कि वो मुसलमान हैं तो उन्हें और बेरहमी से मारा गया. उनके शरीर पर जख्म हैं.. कैमरापर्सन भी बेसुध पड़ी है. एक पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव कतई सही नहीं है, दोषी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि, इसकी उम्मीद कम है, क्योंकि- BJP सरकार में सवाल पूछना गुनाह हो चला है.”
प्रेस संगठनों की निंदा
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. साथ ही उन्होंने साकेत थाने में तैनात मामले से संबंधित पुलिसकर्मियों और थानाध्यक्ष के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा कि शाहीन खान और नफीसा खान साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के नए भवन के उद्घाटन पर रिपोर्टिंग कर रहे थे. जिसका उद्घाटन गृहममंत्री अमित शाह ने आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में किया.
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