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नौकरी की तैयारी में बीत गई जवानी: झारखंड के बेरोजगार युवाओं की कहानी
झारखंड देश के बड़े प्राकृतिक संसाधनों का केंद्र है, लेकिन इसी राज्य के हजारों युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हुए अपनी जवानी के कई साल गुजार रहे हैं. रांची के छोटे-छोटे कमरों में पांच-पांच लोग रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. कोई 10 साल से परीक्षा का इंतजार कर रहा है, तो कोई गोल्ड मेडल हासिल करने के बावजूद बेरोजगार है.
इस रिपोर्ट में हम उन छात्रों के बीच पहुंचे जो सरकारी नौकरी को अपनी जिंदगी बदलने का सबसे बड़ा रास्ता मानते हैं. लेकिन परीक्षा में देरी, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. कई परीक्षाएं वर्षों से लंबित हैं, जबकि कुछ परीक्षाओं के नतीजों में भी लंबा वक्त लग रहा है. छात्र इसे एक ऐसे ‘एग्जाम ट्रैप’ के तौर पर देखते हैं, जिसमें उनकी उम्र और जिंदगी दोनों निकलती जा रही हैं.
आखिर झारखंड का युवा सरकारी नौकरी के पीछे इतना मजबूर क्यों है? क्या राज्य में उसके लिए पर्याप्त निजी नौकरियां और दूसरे रोजगार के विकल्प मौजूद हैं? और जब परीक्षा ही समय पर न हो, पेपर लीक हो जाए या भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ जाए, तो सालों की मेहनत करने वाले इन युवाओं पर क्या गुजरती है?
इस रिपोर्ट में देखिए झारखंड के उन युवाओं की कहानी, जो नौकरी की उम्मीद में अपनी पढ़ाई, कमाई, रिश्ते और कई बार पूरी जिंदगी को रोककर बैठे हैं.
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