Khabar Baazi

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल दुष्कर्म मामले में दोषी करार, सजा का ऐलान भी आज ही

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया. अदालत ने चार साल पहले आए सत्र अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें तरुण तेजपाल को बरी कर दिया गया था. अब हाईकोर्ट आज दोपहर में ही सजा की अवधि पर फैसला सुनाएगा. सजा तय होने से पहले तरुण तेजपाल ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की है. यह मामला नवंबर 2013 का है.

तब तहलका पत्रिका में काम करने वाली एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि तरुण तेजपाल ने दो अलग-अलग रातों में उसके साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया. साल 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था.

सत्र अदालत का कहना था कि घटना के बाद महिला का व्यवहार उस तरह का नहीं था, जैसा किसी यौन उत्पीड़न की पीड़िता से अपेक्षित माना जाता है. अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि महिला ने घटना के बाद तरुण तेजपाल को कुछ संदेश भेजे थे. सत्र अदालत ने माना कि इन संदेशों से यह नहीं लगता कि महिला डरी हुई थी या सदमे में थी. इसी आधार पर अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर माना और तेजपाल को बरी कर दिया.

इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी. सरकार ने कहा कि निचली अदालत ने यह मान लिया कि किसी यौन उत्पीड़न की पीड़िता को एक तय तरीके से ही व्यवहार करना चाहिए. सरकार का कहना था कि अदालत ने पीड़िता के व्यवहार को लेकर अपनी एक अलग कसौटी बना ली, जो कानून के अनुरूप नहीं है. गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा.

उन्होंने कहा कि इस मामले में सुनवाई के दौरान आरोपी और पीड़िता की भूमिकाएं जैसे उलट दी गई थीं. उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता से जिरह के दौरान ऐसे सवाल पूछे गए, जिनका मामले से कोई संबंध नहीं था. इन सवालों में उसके सहमति से बने यौन संबंधों पर विचार, शराब और सिगरेट पीने की आदत, और दोस्तों के साथ उसकी निजी बातचीत जैसे विषय शामिल थे.

तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को इन बातों पर विचार नहीं करना चाहिए था. वहीं, तरुण तेजपाल की ओर से कहा गया कि महिला के बयान में कई विरोधाभास हैं. बचाव पक्ष ने दलील दी कि महिला का बयान इतना भरोसेमंद नहीं है कि केवल उसी के आधार पर दोष सिद्ध किया जा सके. बचाव पक्ष ने होटल के सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया. उनका कहना था कि फुटेज से यह साबित नहीं होता कि तरुण तेजपाल ने महिला को खींचकर या जबरदस्ती लिफ्ट में ले जाया था.

इस पर तुषार मेहता ने अदालत को उस ईमेल की याद दिलाई, जो कथित घटना के कुछ दिन बाद तरुण तेजपाल ने महिला को भेजा था. उस ईमेल में तरुण तेजपाल ने अपने व्यवहार पर अफसोस जताया था और इसे अपनी "गलत निर्णय क्षमता" बताया था. गोवा सरकार का कहना था कि यह ईमेल इस बात का संकेत है कि दोनों के बीच कोई घटना हुई थी.

क्या मीडिया सत्ता या कॉर्पोरेट हितों के बजाय जनता के हित में काम कर सकता है? बिल्कुल कर सकता है, लेकिन तभी जब वह धन के लिए सत्ता या कॉरपोरेट स्रोतों के बजाय जनता पर निर्भर हो. इसका अर्थ है कि आपको खड़े होना पड़ेगा और खबरों को आज़ाद रखने के लिए थोड़ा खर्च करना होगा. सब्सक्राइब करें.

Also Read: मानहानि मामला: बिना शर्त माफी मांगेंगे तरुण तेजपाल और अनिरुद्ध बहल

Also Read: तरुण तेजपाल: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का सरकारी ट्विस्ट और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का गुस्सा