Report
विज्ञापन पर खर्च के मामले में मोदी से आगे निकले योगी, यूपी सरकार ने 8 सालों में खर्चे 6812 करोड़ रुपये
8 साल और हर दिन सवा दो करोड़ रुपये से ज्यादा (2.32) का खर्च. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद से अपने प्रचार-प्रसार पर यही औसत खर्च किया है. वित्त वर्ष 2017-18 से 2024-25 के बीच विज्ञापनों पर कुल 6811.94 करोड़ रुपये खर्च हुए है. यह औसत केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विज्ञापन खर्च से भी अधिक है. मालूम हो कि 11 सालों में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर रोजाना करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किया.
दरअसल, साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार में आई. 17 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी. जिसके बाद से वित्त वर्ष 2017-18 से 2024-25 के बीच सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की विभिन्न प्रचार-प्रसार गतिविधियों पर ये खर्च किया गया है. इस खर्च की जानकारी न्यूज़लॉन्ड्री ने प्रदेश सरकार के बजटीय दस्तावेज से हासिल की है.
साल दर साल यूं बढ़ता रहा खर्च
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के अगले वित्त वर्ष 2017-18 में सूचना विभाग ने प्रचार प्रसार पर कुल 294.86 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद खर्च में लगातार वृद्धि हुई. 2018-19 में 330 करोड़ तो 2019-20 में 481.67 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
कोविड महामारी वाले साल 2020-21 में खर्च घटकर 392.88 करोड़ रुपये रह गया. लेकिन इसके बाद खर्च में जबरदस्त उछाल आया.
वित्त वर्ष 2021-22 में प्रचार-प्रसार पर खर्च बढ़कर 1,134.31 करोड़ रुपये हो गया. इसके अलावा इस साल स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस आयोजन के प्रचार पर 1.67 करोड़, पत्रकार कल्याण कोष पर 5.38 करोड़ और फिल्म विकास निधि के लिए 15 करोड़ खर्च किया गया.
वहीं, अगले ही वर्ष 2022-23 में यह खर्च 1,420.03 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो उपलब्ध आंकड़ों में सबसे अधिक है. वहीं इस साल अलग से बजट में फिल्म क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए फिल्म विकास निधि में 15 करोड़, पत्रकारों के कल्याण के लिए पत्रकार कल्याण कोष में 5.52 करोड़ और स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस आयोजनों के लिए 0.99 करोड़ की राशि निर्धारित की गई है.
अगले वित्त वर्ष 2023-24 में खर्च मामूली रुप से घटकर 1,366.34 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2024-25 में फिर 1,391.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए. 2024-25 में बजट में फिल्म विकास निधि के लिए 15 करोड़, स्वतंत्रता एवं गणतंत्र दिवस आयोजन के प्रचार पर 2.98 करोड़ और पत्रकार कल्याण कोष के लिए 0.24 करोड़ खर्च हुई.
वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने इन मदों में कुल 918.83 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है. इस साल कितना खर्च हुआ इसकी जानकारी सामने नहीं आई.
कोविड के बाद विज्ञापन बजट में आया बड़ा उछाल
उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के खर्च का विश्लेषण बताता है कि 2017-18 से 2024-25 के बीच प्रचार-प्रसार के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा ‘विज्ञापन तथा दृश्य प्रचार’ पर खर्च हुआ. यह खर्च अख़बारों, टेलीविजन और दूसरे माध्यमों पर हुआ. इस अवधि में इस मद पर कुल 5,658.16 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कुल व्यय का लगभग 83 प्रतिशत से ज्यादा है.
वित्त वर्ष 2017-18 में विज्ञापन तथा दृश्य प्रचार पर 236.33 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. 2018-19 में यह बढ़कर 271.90 करोड़ रुपये और 2019-20 में 398.23 करोड़ रुपये हो गया. कोविड महामारी के वर्ष 2020-21 में यह खर्च 311.46 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद 2021-22 में इस मद पर 951.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 2022-23 में यह बढ़कर 1,158.06 करोड़ रुपये पहुंच गया. 2023-24 में 1,122.63 करोड़ रुपये और 2024-25 में 1,205.06 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो उपलब्ध वर्षों में सबसे अधिक है.
प्रकाशन पर भी सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च
‘विज्ञापन तथा दृश्य प्रचार’ के बाद सबसे अधिक खर्च प्रकाशन मद पर हुआ. इसमें सरकार बुकलेट, पैंफलेट और सरकार के विकास संबंधी कामों के बारे में किताबें प्रकाशित करती है. 2017-18 से 2024-25 के बीच इस मद पर कुल 896.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
अगर साल दर साल की बात करें तो 2017-18 में 29.69 करोड़, 2018-19 पर 27.51, 2019-20 में 47.12, 2020-21 में 52.50 करोड़ खर्च हुए. वहीं उसके बाद इसमें भी काफी बढ़त देखने को मिली. 2021-22 में प्रकाशन पर 149.97 करोड़ रुपये और 2022-23 में 227.44 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो इस अवधि का उच्चतम स्तर है. इसके बाद 2023-24 में यह खर्च 209.14 करोड़ रुपये और 2024-25 में 153.15 करोड़ रुपये रहा.
क्षेत्र प्रचार, फोटो सेवाएं और फिल्म निर्माण पर अपेक्षाकृत कम खर्च
आठ वर्षों के दौरान क्षेत्र प्रचार पर कुल 220.49 करोड़ रुपये खर्च किए गए. वहीं, फोटो सेवाओं पर 7.73 करोड़ रुपये, सामुदायिक रेडियो एवं टेलीविजन पर 11.46 करोड़ रुपये और फिल्म निर्माण पर 20.32 करोड़ रुपये खर्च हुए.
2025-26 में भी विज्ञापनों पर सबसे बड़ा दांव
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की विभिन्न गतिविधियों पर 918.83 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा फिर से विज्ञापन तथा दृश्य प्रचार के लिए रखा गया है.
बजट के अनुसार विज्ञापन तथा दृश्य प्रचार के लिए 705.14 करोड़ रुपये, क्षेत्र प्रचार के लिए 37.14 करोड़ रुपये, फोटो सेवाओं के लिए 0.88 करोड़ रुपये, प्रकाशन के लिए 171.12 करोड़ रुपये, सामुदायिक रेडियो एवं टेलीविजन के लिए 1.81 करोड़ रुपये और फिल्म निर्माण के लिए 2.74 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं.
यदि 2025-26 का पूरा बजट खर्च होता है, तो 2017-18 से 2025-26 के बीच सूचना एवं जनसंपर्क विभाग पर कुल व्यय 7,730.77 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा. इनमें अकेले विज्ञापन तथा दृश्य प्रचार का हिस्सा 6,360.56 करोड़ रुपये होगा यानि कुल खर्च का अधिकांश हिस्सा विज्ञापन आधारित प्रचार पर केंद्रित रहेगा.
किसे मिल रहा कितना विज्ञापन
सरकार विभिन्न माध्यमों में किसे कितना विज्ञापन दे रही है, इस बात की जानकारी के लिए न्यूज़लॉन्ड्री ने कई बार उत्तर प्रदेश सरकार से सूचना के अधिकार के जरिए जानकारी मांगी. हालांकि, प्रदेश सरकार के सूचना विभाग ने कोई जानकारी नहीं दी. हमारे आवेदन का कभी जवाब नहीं आया और कभी-कभी जवाब आया तो यह कहकर आवेदन खारिज कर दिया गया कि इस सूचना को एकत्रित करने में काफी समय लगेगा.
हालांकि, न्यूज़लॉन्ड्री ने साल 2021 में सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. जिसमें सामने आया था कि योगी सरकार ने एक साल में टीवी विज्ञापनों पर 160 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. जिसमें मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले नेटवर्क 18 ग्रुप को 28.82 करोड़ रुपये हासिल किए थे.
विज्ञापनों की भरमार, यूपी सरकार का अथाह प्रचार
आज भी आप कोई भी न्यूज़ चैनल खोलें, किसी वेबसाइट पर जाएं, पढ़ने के लिए अखबार या पत्रिका उठाएं, या फिर उत्तर प्रदेश के किसी शहर से लेकर राजधानी दिल्ली तक कहीं भी निकलें, हर जगह आपको उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञापन दिखाई देंगे.
दैनिक जागरण के लखनऊ एडिशन में इस जुलाई महीने के 29 दिनों में कुल 54 विज्ञापन छपे हैं. जिसमें से पूरे पन्ने के तीन, आधे पन्ने के 32 और पन्ने के चौथाई हिस्से में 19 विज्ञापन छपे हैं. यानि इस महीने दैनिक जागरण में हर रोज कम से कम दो विज्ञापन यूपी सरकार के छपे हैं.
वहीं, दैनिक हिंदुस्तान के लखनऊ एडिशन में में इस बीच कुल 49 विज्ञापन यूपी सरकार के छपे थे. जिसमें 3 पूरे पन्ने, 29 आधे पन्ने और 17 पन्ने के चौथे हिस्से के थे. ऐसे ही अन्य अख़बारों में भी देखने को मिलता है. हर रोज विज्ञापन छपते हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री को जानकारी मिली है कि एशियानेट न्यूज़ डॉट कॉम को अपनी वेबसाइट पर 30 दिन बैनर के रूप में विज्ञापन लगाने के लिए कुल 94.40 लाख रुपये मिले हैं. यह विज्ञापन 14 मार्च 2026 से 30 दिनों तक के लिए वेबसाइट पर चलाया गया. जिसमें स्वावलंबन उद्यम, यूपी में महिला सक्षम है और सुपरफास्ट रफ्तार का बैनर लगाना था. ठीक इसी समय यही विज्ञापन वनइंडिया डॉट कॉम को भी जारी हुआ. उन्हें भी 94.40 लाख का भुगतान हुआ.
जनवरी, 2026 को सूचना विभाग ने मिशन शक्ति और उज्ज्वला योजना के प्रचार के लिए अमर उजाला की वेबसाइट पर बैनर लगाने के लिए एक महीने का काम दिया. जिसकी एवज में 70.80 लाख का भुगतान हुआ. न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि यूपी सरकार ने शेयरचैट जैसे प्लेटफॉर्म तक विज्ञापन बांटे हैं.
अब तक जिन विज्ञापनों का हमने जिक्र किया, वे सूचना विभाग की ओर से दिए गए थे. लेकिन उत्तर प्रदेश में दूसरे विभाग भी अपने स्तर पर विज्ञापन जारी करते हैं. न्यूज़लॉन्ड्री को सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी मिली है कि उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन विभाग ने 2024-25 और 2025-26 के बीच प्रचार-प्रसार पर 60 करोड़ रुपए खर्च किए. जिसमें से लगभग 12 करोड़ प्रयागराज कुंभ के दौरान प्रचार पर खर्च हुआ.
न्यूज़लॉन्ड्री के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक, उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय ने जुलाई, 2025 में योअर स्टोरी वेबसाइट के साथ करार किया था. दस्तावेज के अनुसार, योअर स्टोरी को 70 लाख रुपये दिए जाएंगे. इसके तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) उद्यमियों, कारीगरों और इनोवेटर्स की 100 से अधिक सफलता की कहानियां रिकॉर्ड कर प्रदर्शित करना, स्थानीय विरासत, रोजगार, कारीगरों के सशक्तिकरण और ‘मेड इन यूपी’ ब्रांड के वैश्विक प्रभाव पर एक विजुअल वीडियो फिल्म बनाना, सभी 75 जिलों की अनूठी शिल्पकला, नवाचार और विरासत को दर्शाने वाली 500 कॉफी टेबल बुक्स तैयार करना और स्थानीय कारीगरी को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में रील्स और वीडियो फीचर तैयार करना शामिल है.
न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि योअर स्टोरी ने ऐसा किया भी. योअर स्टोरी की वेबसाइट पर यूपी में ओडीओपी को लेकर दर्जनों खबरें प्रकाशित हुई है. इसमें से कुछ तो एआई के जरिए प्रकाशित हैं.
इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
क्या मीडिया सत्ता या कॉर्पोरेट हितों के बजाय जनता के हित में काम कर सकता है? बिल्कुल कर सकता है, लेकिन तभी जब वह धन के लिए सत्ता या कॉरपोरेट स्रोतों के बजाय जनता पर निर्भर हो. इसका अर्थ है कि आपको खड़े होना पड़ेगा और खबरों को आज़ाद रखने के लिए थोड़ा खर्च करना होगा. सब्सक्राइब करें.
Also Read
-
One year after Dharali: The growing cost of building in a fragile Himalaya
-
‘Feels like career over’: The online campaign to intimidate women part of CJP protest
-
Rs 2.3 crore a day, 8 years: Yogi outspends Modi when it comes to ads
-
PTI apologises to Priyank Kharge for misreporting remarks on police constable exam
-
Modi govt spent Rs 910 crore on print ads in 5 years; Times of India biggest beneficiary