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क्या थार बन गई है 'मर्दानगी' का सिंबल? लड़कियों ने क्या कहा
थार सिर्फ एक गाड़ी नहीं रह गई है. भारत के कई शहरों और कस्बों में यह एक खास तरह के वर्चस्व का प्रतीक बनती जा रही है. सोशल मीडिया पर थार के वीडियो देखें तो अक्सर एक पैटर्न दिखाई देता है. तेज रफ्तार, खतरनाक स्टंट, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और इन सबके साथ एक आक्रामक रवैया भी थार और उसके मालिकों की छवि से जुड़ा है.
बड़ी गाड़ी, ऊंची सीट और दमदार इंजन कुछ लोगों के लिए सुविधा का नहीं, बल्कि सड़क पर वर्चस्व दिखाने का माध्यम बन जाते हैं. कई बार यह व्यवहार उस पुरुषवादी सोच से भी जुड़ जाता है जिसमें आक्रामकता को मर्दानगी का प्रतीक माना जाता है. मानो थार महज एक गाड़ी नहीं, बल्कि ‘मर्द होने’ का एक स्टेटमेंट हो.
लेकिन असल सवाल यह है कि महिलाएं थार के बारे में क्या सोचती हैं? क्या वो थार चलाने वालों को जज करती हैं? क्या बड़ी गाड़ी सचमुच किसी की पर्सनैलिटी को ज्यादा आकर्षक बना देती है? क्या आक्रामक ड्राइविंग को महिलाएं आत्मविश्वास समझती हैं या असुरक्षा की निशानी? क्या सड़क पर दबंगई दिखाना प्रभाव छोड़ता है या नकारात्मक छवि बनाता है? और सबसे अहम, क्या थार की लोकप्रिय छवि पुरुषों की कल्पना है या महिलाओं की भी यही राय है?
इस वीडियो में हम इन्हीं सवालो का जवाब जानने की कोशिश कर रहे हैं.
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