NL Tippani
Gen-Z के सदमे में अमीश का लवणेन भोज्यम, अमन का उड़ा गर्दा
जेन-ज़ी लौंडों ने जब से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया है तब से बहुतेरे एंकर एंकराओं को रात में नींद नहीं आ रही है. बहुतेरों को जंतर मंतर पर इस्तेमाल हुई भाषा से संस्कार और संस्कृति का संकट पैदा हो गया है. मर्यादा की दुहाई दी जा रही है.
इस मसूमियत पर भला कौन नहीं मर जाए. जिन लोगों के कुशल संचालन में देखते-देखते टीवी के न्यूज़रूम और स्टूडियो खुलेआम गाली-गलौज, मारपीट का अड्डा बन गए. वो Gen Z युवाओं के एक हिस्से की जुबान पकड़ कर पूरे आंदोलन को गरियाने में लगे हैं. ये सब यूं ही नहीं बिलबिला रहे हैं, दरअसल चोट इनके पप्पा को लगी है, दर्द इन्हें हो रहा है.
ये वो जेन ज़ी युवा थे जिन्होंने शायद इसके पहले किसी भी आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया था. मगर जब वो सड़क पर उतरे तो गोदी मीडिया के चरण चंपकों ने इन फर्स्ट टाइम आंदोलनकारियों को 'उपद्रवी, दंगेबाज़ और गुंडे' घोषित करने में कोई कसर नही छोड़ी.
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