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जेन ज़ी के आगे झुके शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा भेजा, सरकार की मंजूरी बाकी
आखिरकार युवाओं और छात्रों की जीत हुई. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है. इस बात की जानकारी उन्होेंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दी. हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनका इस्तीफा मंजूर हुआ है या नहीं.
प्रधान ने लिखा, "जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है."
उन्होंने लिखा, "पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है. देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है."
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक के चलते धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बीते 36 दिन से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन चल रहा था. युवा आंदोलनकारियों का कहना था कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से कम में वह नहीं मानेंगे. बीते 20 जुलाई से कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया था. जब उन्होंने संसद मार्च का ऐलान किया और भारी संख्या में देशभर से लोग जंतर-मंतर पहुंचे. इसके बाद सरकार पर दवाब बढ़ने लगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दो दिनों में युवाओं को संबोधित करते कहा कि वह पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए कड़ा कानून लाएंगे. साथ ही मामले को फास्टट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा.
'पहले दिन से ली जिम्मेदारी'
प्रधान ने इस्तीफे के पत्र में लिखा, "पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा. मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे. 16 जुलाई को घोषित नीट- यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली. परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ."
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