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जंतर-मंतर: सरकार से वार्ता और वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी क्यों सुलग रहा है छात्रों का गुस्सा?
सरकार से दो दौर की मुलाकात, सोनम वांगचुक के 26 दिनों बाद भूख हड़ताल खत्म करने और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक पर कड़े कानून का भरोसा देने के बावजूद जंतर-मंतर पर डटे युवाओं का आक्रोश शांत नहीं हो पाया है.
कॉकरोच जनता पार्टी ने ऐलान किया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा. लेकिन आंदोलन को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं.
मसलन, जंतर-मंतर की जमीन पर दिन-रात डटे इन आम छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के इस बड़े दावे और नेतृत्व पर कितना भरोसा है?
सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल खत्म किए जाने के फैसले को ये आंदोलनकारी छात्र किस नजरिए से देख रहे हैं? लगातार बंद होते दिल्ली मेट्रो स्टेशनों, इंटरनेट की पाबंदी और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच दिल्ली पुलिस और सरकार के रवैये पर इनका क्या कहना है? संसद में जारी मानसून सत्र में वो विपक्ष के नेताओं से क्या उम्मीद करते हैं और उनसे क्या कहना चाहते हैं?
इन्हीं सब सवालों के इर्द-गिर्द जंतर-मंतर पर ग्राउंड जीरो से की गई इस खास और बेबाक बातचीत में हमने प्रदर्शनकारी छात्रों के समूह से इन सभी सवालोंं सहित प्रदर्शन के संवेदनशील और अहम पहलुओं पर खुलकर बात की.
इस सीधे संवाद में छात्रों ने बिना किसी लाग-लपेट के आंदोलन के हर एक पहलू पर अपनी बेबाक राय रखी है. देखिए हमारी यह खास बातचीत.
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