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लाठीचार्ज, आंसू गैस और अफरा-तफरी में कहां 'गायब' थी सीजेपी लीडरशिप
करीब एक महीने से जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन 20 जुलाई को संसद मार्च के साथ निर्णायक मोड़ पर पहुंचा. शाम होते-होते जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल पूरी तरह खाली और क्षतिग्रस्त नजर आया तो आंदोलन के खत्म होने की बात होने लगी. लेकिन रात में जनता वापस लौटी और धरना स्थल भी वापस पा लिया.
न्यूज़लॉन्ड्री की टीम बीते पूरे दिन संसद मार्च के दौरान ग्राउंड पर मौजूद रही और घटनाक्रम को करीब से देखा. सुबह हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे, लेकिन संसद की ओर बढ़ते ही कई जगह पुलिस ने बैरिकेड लगाए. प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड तोड़े, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस दौरान कई प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और कुछ पत्रकार भी घायल हुए.
बड़ी संख्या में देशभर से आए युवाओं को आंदोलन के नेतृत्व की ओर से स्पष्ट दिशा नहीं मिलने का मलाल दिखा. इंटरनेट बंद होने और स्थानीय रास्तों की जानकारी न होने के कारण कई प्रदर्शनकारी भ्रमित होते रहे. कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच घंटों तक टकराव चलता रहा.
ग्राउंड पर मौजूद रिपोर्टर अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि कैसे आंसू गैस, लाठीचार्ज और अफरा-तफरी के बीच रिपोर्टिंग की गई, और किस तरह प्रदर्शनकारियों ने इस आंदोलन को अपने लोकतांत्रिक अधिकार के इस्तेमाल के रूप में देखा. कई युवाओं का कहना था कि भले ही उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने अपनी आवाज़ सत्ता तक पहुंचाने की कोशिश की.
वीडियो में संसद मार्च के पूरे घटनाक्रम, पुलिस कार्रवाई, नेतृत्व को लेकर उठे सवाल और सीजेपी आंदोलन के भविष्य पर विस्तृत चर्चा की गई है. अगर आप जानना चाहते हैं कि 20 जुलाई को दिल्ली में आखिर क्या हुआ और इस आंदोलन का आगे क्या असर हो सकता है, तो देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
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