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बारिश के बीच देहरादून में जुटे हजारों छात्र, राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम कैसा रहा?
कोटा के बाद एक बार फिर राहुल गांधी शुक्रवार को 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत छात्रों से संवाद करने के लिए देहरादून पहुंचे. यह कार्यक्रम भारी बारिश के बीच देहरादून के सनातन धर्म इंटर कॉलेज (बन्नू) में हुआ. कार्यक्रम स्थल पर हजारों की संख्या में छात्र और कांग्रेस समर्थक पहुंचे. हमने यहां छात्रों से बात कर यह जानने की कोशिश की कि उनके प्रमुख मुद्दे क्या हैं और 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से उन्हें कितनी उम्मीदें हैं.
भारी बारिश के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से छात्रों को रेनकोट बांटे गए. कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले हर छात्र और कार्यकर्ता के हाथ में नीले रंग का एक बैंड बांधा जा रहा था, जिसके बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जा रहा था. वहीं, मीडिया कर्मियों को भी पंजीकरण कराने के बाद ही कार्यक्रम स्थल में प्रवेश की अनुमति दी गई.
अपने तय समय से करीब दो घंटे लेट पहुंचे राहुल गांधी ने यहां छात्रों को संबोधित किया. कोटा की तरह ही देहरादून में भी राहुल गांधी ने नीट के छात्रों से बातचीत की. मंच पर बुलाए गए चार छात्रों से उन्होंने पेपर लीक के अपने अनुभव साझा करने को कहा. इसके अलावा रिया नाम की उस छात्रा के पिता भी मंच पर पहुंचे, जिसने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या कर ली थी. अपनी बेटी का जिक्र करते हुए वे भावुक हो गए.
हॉल के भीतर का माहौल किसी कंसर्ट जैसा था. मंच पर मौजूद गायक लगातार गीत प्रस्तुत कर रहे थे और उनके जरिए कार्यक्रम में मौजूद लोगों में उत्साह का माहौल बनाया जा रहा था. भारी बारिश के बावजूद इस कंसर्ट में कई हजार छात्रों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
राहुल गांधी ने मंच से पेपर लीक को युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया. उन्होंने कहा कि भारत में पेपर लीक होना आम बात बन गई है और पूरा शिक्षा तंत्र इसकी चपेट में है.
बाजपुर डिग्री कॉलेज से आए छात्र महेंद्र सिंह गौरव ने कहा, "हम यहां राहुल गांधी को सुनने आए हैं क्योंकि हम भी छात्र हैं और हम भी उस पीड़ा से गुजरे हैं, जब हमने परीक्षा दी और उसका पेपर लीक हो गया. उत्तराखंड में भी पेपर लीक के मामलों में स्थिति ठीक नहीं है. इसलिए पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून और नियम बनने चाहिए. हम इस मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ हैं."
वहीं, एक अन्य छात्रा प्रतिक्षा साहू ने कहा, "राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, इसलिए उनके हाथ में भी कुछ न कुछ तो होगा. उन्हें भी इस मुद्दे पर कुछ करना चाहिए. यह जरूरी नहीं है कि केवल सत्ता में आने के बाद ही काम किया जाए. जितने भी बड़े नेता हैं, उनके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, लेकिन यहां छात्रों के साथ क्या हो रहा है, इस पर कोई ध्यान नहीं देता."
प्रतिक्षा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होकर सोनम वांगचुक से भी मिलना चाहिए.
कांग्रेस का कहना है कि यह कार्यक्रम राजनीति से ऊपर उठकर पूरी तरह युवाओं, उनकी समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है. यह अभियान शिक्षा, रोजगार, परीक्षा में धांधली और युवाओं की समस्याओं जैसे मुद्दों पर छात्रों की आवाज़ उठाने का मंच बताया जा रहा है.
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