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राजस्थान: हर दिन सरकारी प्रचार पर 30 लाख खर्च, पीएम मोदी के ‘स्वागत’ और 'थैंक्यू' पर करीब 5 करोड़
बीते 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान गए थे. वहां उन्होंने कुछ कामों का शिलान्यास और उद्घाटन किया. उस दिन राजस्थान और दिल्ली के सभी अखबारों में भर-भर पेज का विज्ञापन छपा. दो दिन बाद 6 जुलाई को इस उद्घाटन और शिलान्यास की बधाई प्रधानमंत्री को देने के लिए एक बार फिर से भर-भर पेज का विज्ञापन छपा.
यह पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले भी राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत और उनको ‘धन्यवाद’ कहने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है. यहीं नहीं, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्वागत में भी विज्ञापन जारी किए गए हैं, जिसपर लाखों रुपये खर्च हुए हैं.
दिसंबर, 2023 में भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. उसके बाद सरकार ने 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच यानि सिर्फ दो साल में विज्ञापनों पर 217 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. यानि हर दिन करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए. यह जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में दी है. यह सवाल कांग्रेस की विधायक इंद्रा ने पूछा था. अपने जवाब में बताया कि इसमें सूचना विभाग द्वारा 90.03 करोड़ रुपये और दूसरे विभागों द्वारा 127 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.
विधायक ने अपने सवाल में पूछा था कि किन संस्थानों को कितने रुपये का विज्ञापन दिया गया. जवाब में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम पर हुए खर्च की जानकारी तो दी गई लेकिन किन अख़बारों और न्यूज़ चैनलों पर ये खर्च हुआ, उसकी जानकारी नहीं दी गई है.
जवाब से पता चलता है कि प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से ज्यादा प्रिंट मीडिया में विज्ञापन दिया है. 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच प्रिंट मीडिया पर भाजपा सरकार ने 137.25 करोड़ रुपये और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 79.75 करोड़ रुपये खर्च किए है.
प्रिंट मीडिया में किन विज्ञापनों पर ज़्यादा हुआ खर्च
आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी विज्ञापन के खर्च का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा आयोजनों और सरकार की छवि से जुड़े अभियानों पर केंद्रित रहा. सबसे अधिक 14.87 करोड़ रुपये केवल ‘राइजिंग राजस्थान-2024’ के प्रचार पर खर्च किए गए. यह राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित किए जाना वाला इन्वेस्टर समिट है. इसके अलावा ‘भजनलाल सरकार’ के शपथ ग्रहण को लेकर दिए गए विज्ञापन 4.38 करोड़ रुपये खर्च हुआ.
राजस्थान सरकार गैस पर सब्सिडी देती है. इसको लेकर विज्ञापन पर 3.56 करोड़ रुपये खर्च हुआ. वहीं सरकार ने ‘एडवर्टोरियल’ पर 3.19 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. यह ख़बरों के रूप में विज्ञापन होता है. जो सरकार अलग-अलग अख़बारों में प्रकाशित कराती है.
राजस्थान सरकार ‘प्रवासियों’ को लुभाने के लिए हर साल एक आयोजन करती है. इसके प्रचार पर भी सरकार ने जमकर खर्च किया है. अकेले प्रिंट मीडिया में इसके प्रचार पर 2.64 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीकानेर आए थे, उनके स्वागत में जो विज्ञापन छपा उसपर 1.96 करोड़ रुपये खर्च हुए. वहीं, बांसवाड़ा आए तो 1.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसके अलावा ‘थैंक यू पीएम’ वाले विज्ञापन अभियान पर भी 1.23 करोड़ रुपये खर्च दर्ज हैं. इस तरह पीएम का स्वागत करने और उनको थैंक्यू करने पर राजस्थान सरकार ने कुल 4.89 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
इलेट्रॉनिक मीडिया पर भी जमकर खर्च
राजस्थान सरकार ने इस मीडियम में सबसे बड़ा हिस्सा ‘राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एवं निर्णय’ के प्रचार पर खर्च किया है. इस पर 22.96 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. यह प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के लिए फैसलों का प्रचार था.
विज्ञापन खर्च के मामले में दूसरे स्थान पर 'ई-ऑक्शन' से जुड़े विज्ञापन रहे, जिन पर सरकार ने 14.14 करोड़ रुपये खर्च किए. ई-ऑक्शन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत सरकार खनिज ब्लॉक, खनन पट्टे, जमीन, वाहन, कबाड़, शराब की दुकानें और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी करती है. इन नीलामियों में भाग लेने के लिए इच्छुक लोगों और कंपनियों को जानकारी देने और आवेदन आमंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ये विज्ञापन जारी करती है.
इसके बाद ‘बिजली, पानी, सड़क’ के प्रचार पर 2.56 करोड़ रुपये, ‘ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविर’ पर 1.89 करोड़ रुपये, ‘स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0’ पर 1.81 करोड़ रुपये और 'मातृत्व स्वास्थ्य' पर 1.65 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.
दस्तावेज के मुताबिक, ‘हरियालो राजस्थान’ के प्रचार पर 1.46 करोड़ रुपये, वहीं प्रदेश सरकार की ‘एक वर्ष की उपलब्धियां’ गिनवाने पर 1.42 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इसके अलावा एक वर्ष पूरा होने पर म्यूजिकल विज्ञापन अलग से बना. जिस पर 1.14 करोड़ रुपये खर्च हुए. इस तरह एक वर्ष पूरा होने पर 2.56 करोड़ रुपये खर्च किए गए. वहीं सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर कई गाने बनाए गए. जिसपर लगभग 2.1 करोड़ रुपये खर्च हुए.
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ‘राइजिंग राजस्थान-2024’ पर 1.32 करोड़ रुपये खर्च हुए. इसके अलावा अयोध्या को लेकर राजस्थान सरकार ने विज्ञापन दिया, जिसपर 46.43 लाख खर्च हुए. वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरा होने पर भाजपा की प्रदेश सरकारों ने उत्सव मनाया, जिसपर राजस्थान सरकार ने 26.67 लाख रुपये खर्च किए.
यह खर्च उस राजस्थान का जहां एक तरफ़ मनरेगा में मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है. आरजीएचएस के बकाया भुगतान को लेकर निजी अस्पताल इलाज बंद करने की चेतावनी दे चुके हैं. आदिवासी क्षेत्रों के लिए घोषित बजट भी पूरी तरह जारी नहीं हो पाया. लेकिन दूसरी तरफ़ राजस्थान सरकार प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.
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