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कॉकरोच जनता पार्टी: सोनम वांगचुक के आने से जंतर-मंतर पर क्या बदला?
जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन अब अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. सोनम वांगचुक का आमरण अनशन जारी है और उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत लगातार बिगड़ने की खबरें सामने आ रही हैं. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि लंबे उपवास की वजह से कई लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है. वहीं दूसरी तरफ इस आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छिड़ गई है.
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी को लेकर अब ‘फेल’ और ‘पास’ होने की चर्चाएं होने लगी हैं. आलोचकों का कहना है कि आंदोलन अपने दावों के मुताबिक व्यापक जनसमर्थन हासिल नहीं कर पाया है और इसकी वास्तविक पहुंच सोशल मीडिया के दायरे से आगे नहीं बढ़ सकी है.
वहीं सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीप्के और उनके समर्थकों का दावा है कि आंदोलन लगातार बड़ा हो रहा है. उनका कहना है कि देशभर से छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों के लोग इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.
इन सबके बीच एक और सवाल खड़ा होता है. जिस आंदोलन को उसके समर्थक युवाओं की सबसे बड़ी आवाज बता रहे हैं, वह मुख्यधारा के टीवी मीडिया से लगभग गायब क्यों है? राष्ट्रीय चैनलों पर इसकी कवरेज बेहद सीमित दिखाई देती है. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या आंदोलन वास्तव में उतना बड़ा नहीं है, जितना दावा किया जा रहा है या फिर इसकी अनदेखी की जा रही है?
एक तरफ आंदोलन के कमजोर पड़ने के दावे हैं. दूसरी तरफ इसके लगातार विस्तार की बात कही जा रही है. इन दोनों दावों के बीच सच्चाई आखिर क्या है. क्या सोनम वागंचुक के भूख हड़ताल करने का कोई असर हो रहा है? जंतर-मंतर पर असल में क्या हो रहा है? कितने लोग शामिल हो रहे हैं? वह क्या सोच रहे हैं? और, आंदोलन की दिशा क्या है?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने एक और दिन जंतर-मंतर पर बिताया. प्रदर्शनकारियों, छात्रों और वहां मौजूद लोगों से बात की.
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
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