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पल्टीमार नेताओं पर जनता ने क्या कहा?
क्या भारत में दल-बदल अब सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि सत्ता की मलाई खाने की रणनीति बन चुका है? संसद के मानसून सत्र से पहले पश्चिम बंगाल के कई सांसदों ने एनडीए को समर्थन दे दिया. महाराष्ट्र में शिवसेना में एक बार फिर से टूट हो गई. उत्तर प्रदेश में भी गाहे-बगाहे समाजवादी पार्टी तोड़ने या कहिए टूटने के इशारे मिल रहे हैं. खुलेआम हो रही नेताओं की इस अदला-बदली को जनता कैसे देखती है?
इस वीडियो में हमने लोगों से कुछ ऐसे ही सवाल पूछे. जैसे कि क्या सांसदों का पार्टी बदलना लोकतंत्र के लिए खतरा है या यह सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है? क्या एजेंसियों का दबाव, सत्ता का आकर्षण और बड़े विधेयकों को पास कराने की राजनीति इसके पीछे है? या फिर यह सिर्फ कमजोर होती पार्टियों का नतीजा है?
बातचीत के दौरान बेरोज़गारी, महंगाई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, भ्रष्टाचार, चुनावी राजनीति और नागरिकों की भूमिका जैसे कई अहम मुद्दों पर भी लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी.
वीडियो में व्यक्त विचार पूरी तरह प्रतिभागियों के निजी विचार हैं और उनका उद्देश्य सार्वजनिक विमर्श को सामने लाना है.
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