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किसने चुराया राम मंदिर का चंदा? अयोध्या बोली- कभी पता नहीं चलेगा
साल 2024 में अयोध्या में जिस राम मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी, वह अब दो साल बाद एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में है. वजह है श्रद्धालुओं के चढ़ावे और चंदे का कथित रूप से चोरी होना. इस कथित चोरी की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए जा रहे हैं. हालांकि, किसी भी सटीक आकंड़े के लिए जरूरी है कि मामले की जांच हो और उसके लिए जरूरी है कि एफआईआर दर्ज हो, जो कि अभी तक दर्ज नहीं हुई है.
वहीं, मामला गरमाता देख राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर इस कथित चोरी की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की गई. जिसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है. यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है.
उधर, दूसरी तरफ यूपी के मुख्यमंत्री ने करीब-करीब धमकी भरे अंदाज में कहा कि चंदा चोरी को लेकर कोई ऐसी बात न करें कि किसी रामभक्त की भावना आहत हो, अगर किसी के पास कोई सबूत हो तो वह सीधा एसआईटी को भेजे. योगी ने दावा किया कि एसआईटी इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी.
हालांकि, चंदा चोरी के इस मामले में सीएम योगी की दलील से लोग कम ही इत्तेफाक रखते नजर आए. अयोध्या वासियों का मानना है कि इस मामले में कोई खास कार्रवाई नहीं होने वाली. जैसा कि अभिषेक पाठक हमसे बातचीत में कहते हैं, “अगर एक रुपये की भी चोरी हुई है तो वो भी गलत है और यहां तो बात अब हजारों करोड़ तक की हो रही है… अब किसी ने आवाज उठा दी तो सबको दिक्कत है कि चोरी पर बात क्यों कर रहे हो.. हमें पूर्ण विश्वास है कि जितने दोषी हैं.. सब बचे रहेंगे.. छोटे लोग फंसेगे और बड़े बच जाएंगे”
वहीं, हनुमानगाढ़ी के महंत धर्मदास का कहना है कि इस घटना की वजह से हिंदू समाज का सर नीचे झुक गया है. दूसरी ओर इस मुद्दे को सबसे पहले उठाने वाले समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडे का आरोप है कि एसआईटी का गठन इस मामले को सिर्फ ठंडा करने के लिए किया गया है.
इस कथित चंदा चोरी मामले में राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम चर्चा में है. उनके अलावा कई और लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जो या तो आरएसएस से जुड़े हैं या फिर चंदे की गणना से संबंधित काम देखते थे.
अब सवाल यह है कि ये कथित चोरी हुई कैसे?
जानने के लिए देखिए बसंत कुमार की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट.
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