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रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और घरों में नजरबंद करके सीजेपी के प्रदर्शन में लखनऊ जाने से रोके गए छात्र
चंद दिनों में सोशल मीडिया से उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) दिल्ली के बाद अब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. इसी कड़ी में सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीप्के 12 जून को लखनऊ पहुंचे थे. जहां लखनऊ समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने उन्हें समर्थन दिया.
हालांकि, उत्तर प्रदेश के कई छात्र ऐसे भी थे जो इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके. उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही या तो हिरासत में ले लिया या फिर स्टेशन और बसों से उतारकर वापस भेज दिया. प्रयागराज के कुछ छात्र भी इस प्रदर्शन में शामिल होना चाहते थे, लेकिन उन्हें पहले ही रोक लिया गया.
22 वर्षीय प्रेमचंद चौधरी महादेव प्रसाद डिग्री कॉलेज (सीएमपी) से बीए की पढ़ाई कर रहे हैं. वह बताते हैं, “मैं अपने दोस्तों हर्ष और इंद्रेश के साथ सीपीजे के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लखनऊ जा रहा था. हमें प्रयाग स्टेशन से सवेरे 5 बजकर 55 मिनट पर चलने वाली गंगा गोमती एक्सप्रेस से जाना था. जैसे ही हम स्टेशन पहुंचे तो वहां नजारा कुछ अलग ही था. भारी तादाद में पुलिस मौजूद थी. वह मेरे जैसे तमाम युवाओं से पूछताछ कर रही थी. क्यों जा रहे हो?, कहां जा रहे हो? किसलिए जा रहे हो? जैसे सवाल पूछे जा रहे थे. किसी पर जरा भी शक होने पर उसे वापस लौटा दिया जा रहा था. हमें भी रोकने की कोशिश हुई. हालांकि, हम दूसरे रास्ते से स्टेशन के अंदर पहुंच गए थे. वहां भी काफी पुलिस थी, जो बोगियों से छात्रों को उतार रही थी. हम किसी तरह छिपते-छिपाते ट्रेन में चढ़ गए, लेकिन फिर आगे मुझे रायबरेली स्टेशन पर उतार लिया गया. यहां स्टेशन पर ही घंटों बैठाकर रखा गया. बाद में वापस आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा क्योंकि आगे जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं थी. पुलिस ने उस दिन मेरे जैसे सैंकड़ों छात्रों को रोका.”
प्रेमचंद बताते हैं कि इस दौरान पुलिस उन्हें कह रही थी कि पढ़ाई पर ध्यान दो, इस सबके चक्कर में मत पड़ो. वह पुलिस के इस रवैये पर सवाल उठाते हैं और कहते हैं, "हम पढ़ लिखकर अब परीक्षा की तैयारी करेंगे, आगे अगर हमारे साथ भी ऐसे ही होगा. तो हमारा साथ कौन देगा. इसलिए मुझे लगता है कि छात्रों का मुद्दा है और लगातार पेपर लीक हो रहे हैं तो मुझे शामिल होना चाहिए. "
23 वर्षीय चंद्र प्रकाश ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक की है. वह कहते हैं, "12 जून को लखनऊ में सीपीजे का प्रदर्शन था लेकिन मुझे 11 जून से ही कर्लगंज थाने और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) के कॉल आने शुरू हो गए. वो मुझसे 12 जून की योजना पूछ रहे थे, साथ ही थाने बुला रहे थे. हालांकि, मैं ऐसा अकेला नहीं था. यहां पर तमाम छात्रों को इस तरह के कॉल किए गए और उनके घरों पर जाकर उनसे पूछताछ की गई. इसकी वजह यह भी है कि मैं पहले से ही यहां छात्रों के मुद्दे उठाता रहा हूं और विभिन्न प्रदर्शनों में शामिल होता रहा हूं. साथ ही छात्र संगठन दिशा से भी जुड़ा हूं."
चंद्र प्रकाश बताते हैं, “वह मुझपर लगातार दबाव बना रहे थे और कह रहे थे कि मैं लखनऊ न जाऊं. मेरे कमरे के बाहर पुलिस घूम रही थी. हालांकि, मेरी खुद की वहां जाने की कोई योजना नहीं थी.”
प्रयागराज के ही एक अन्य छात्र संजय कहते हैं कि हम छोटा बघाड़ा में रहते हैं. यह शहर के सबसे प्रमुख और घने इलाकों में से एक है, जो मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए जाना जाता है. यह क्षेत्र संगम के काफी नजदीक और यूनिवर्सिटी क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यहां छात्र रात को चाय टपरी पर जुटते हैं. हमने देखा कि एक दिन पहले ही रात को यहां पुलिस की चहलकदमी थी. छात्रों पर निगरानी रखी जा रही थी कि कहीं वे रात वाली किसी ट्रेन से ही लखनऊ न पहुंच जाएं.
वह बताते हैं, "ज्यादातर छात्रों की योजना गंगा गोमती एक्सप्रेस ट्रेन से जाने की थी. यह सवेरे प्रयागराज संगम पर आती है और प्रयाग से 5 बजकर 55 मिनट पर छूटती है. हम भी करीब 10-15 मिनट पहले ही लखनऊ जाने के लिए स्टेशन पर पहुंच गए थे, हमने वहां देखा कि काफी तादाद में पुलिस की मौजूदगी थी. वह छात्रों से पूछताछ कर रही थी. उनका आधार कार्ड और अन्य आईडी चेक की जा रही थीं. किसी पर जरा भी शक होता तो उसे जाने नहीं दिया जा रहा था. मुझे भी वहां से भगा दिया गया. हमारे कई साथी बस से जा रहे थे तो उनकी बस को रास्ते में ही रोककर बीच में उतार दिया गया."
21 वर्षीय संजय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक तृतीय वर्ष के छात्र हैं और साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. वह बताते हैं कि उनका 10-12 दोस्तों का ग्रुप था, जो लखनऊ जा रहे थे लेकिन किसी को भी नहीं जाने दिया.
वह कहते हैं, “लगातार पेपर लीक हो रहे हैं. ऐसे में छात्रों-मजदूरों के पास क्या ही विकल्प बचा है. मीडिया और जनप्रतिनिधियों का काम है कि वो इन मुद्दों को उठाएं, लेकिन ऐसा तो हो नहीं रहा है. ऐसे में हम भी घर बैठ जाएं तो फिर कैसे होगा?”
इस पूरे मामले को लेकर हमने कर्नलंगज थाने के एसएचओ प्रदीप कुमार सिंह से संपर्क किया. वह ‘कोई जानकारी नहीं है’ कहकर फोन काट देते हैं.
इसके बाद हमने पुलिस उपायुक्त (नगर) अभिषेक भारती से भी बात करने की कोशिश की. हालांकि उनका कोई जवाब नहीं मिला. अगर इस बारे में उनका कोई जवाब मिलता है तो इस खबर को अपडेट किया जाएगा.
गोरखपुर से दिशा छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई
ऐसा नहीं है कि लखनऊ जाने से से सिर्फ प्रयागराज के ही छात्रों को रोका गया बल्कि अन्य शहरों के छात्रों को भी वहां पहुंचने से रोका गया. हमारी बात गोरखपुर के कुछ छात्रों से भी हुई. उनका कहना है कि उन्हें हिरासत में लिया गया और एक दिन पहले से ही उन्हें फोन करके और उनके घर पहुंचकर परेशान किया गया. ऐसे ही एक छात्र धर्मराज हैं.
26 वर्षीय धर्मराज गोरखपुर के जाफरा बाजार के कल्याणपुर में किराए पर रहते हैं. वह गोरखपुर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एम कर रहे हैं. वह बताते हैं, "11 जून की रात को करीब 1 से 2 बजे के बीच दर्जनभर पुलिसकर्मी घर के बाहर दरवाजा पीटने लगे. मैंने खिड़की खोली तो उन्होंने कहा कि बाहर आइए, एसएचओ साहब आपसे मिलना चाहते हैं. हमने दरवाजा खोला तो पुलिस ने हिरासत में ले लिया. मेरे साथ मेरे दो रूम पार्टनर भी थे. हमें चप्पल और कपड़े तक नहीं बदलने दिए गए. गाड़ी से सीधे तिवारीपुर थाने ले गए. वहां रातभर बैठाकर रखा. इसके बाद अगले दिन करीब चार बजे छोड़ा."
धर्मराज के अलावा इंद्र कुमार उर्फ आकाश और अंबरीश को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था. इंद्र कुमार गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं. वहीं अंबरीश दर्शनशास्त्र में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं. अंबरीश दावा करते हैं कि गोरखपुर से ऐसे दर्जनों छोत्रों को अलग-अलग थानों की पुलिस ने उठाया. वह कहते हैं कि यही नहीं पुलिस ने हमारी मकान मालकिन को भी हाउस अरेस्ट कर लिया था.
हमने इन तीनों से पूछा कि आप लोगों को ही क्यों उठाया गया? तो उन्होंने बताया कि वह दिशा छात्र संगठन से जुड़े हैं.
अंबरीश कहते हैं कि 11 तारीख की सुबह से ही पुलिस और एलआईयू की ओर से उन्हें फोन करके पूछा जाने लगा था कि क्या वे लखनऊ जा रहे हैं. इसके बाद रात को 1 बजे उन्हें घर से उठाकर ले गए. थाने पहुंचते ही उनका फोन जब्त कर लिया गया और अगले दिन छोड़ा गया.
इन छात्रों ने हमें वह सभी नंबर भी साझा किए हैं, जिनसे इन्हें पुलिस और एलआईयू ने कॉल कर संपर्क किया था.
सामाजिक कार्यकर्ता हाउस अरेस्ट
पुलिस ने गोरखपुर से 65 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता शाकंभरी वर्मा उर्फ रूबी को भी हाउस अरेस्ट कर लिया था. वह बताती हैं, "रात को एक से दो के बीच मेरे घर का दरवाजा खटखटाया गया. मैंने पूछा क्या तो कहने लगे कि दरवाजा खोलिए. मैंने घबराकर 112 नंबर पर कॉल कर दिया. फिर जब 112 से पुलिस आई तो फिर मैंने देखा कि उनके साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी. करीब एक घंटे बाद दो महिला पुलिसकर्मी आईं तो मैंने दरवाजा खोला. मुझे बताया गया कि हाऊस अरेस्ट करने आए हैं. मैंने उनसे गुजारिश की कि आप घर के बाहर बैठ जाइए. लेकिन वह दोनों महिला पुलिसकर्मी मेरे कमरे के अंदर आ गईं और रातभर रहीं. मुझे शुगर और अन्य बीमारियां हैं. मैं काफी परेशान रही."
वह आगे कहती हैं, “मैं जागरूक नागरिक मंच नाम से एक संगठन चलाती हूं. जिसमें हम गरीब बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल कैंप लगाने का काम करते हैं. मुझे क्यों हाऊस अरेस्ट किया मुझे समझ नहीं आया. छात्रों का तो समझ में भी आता है कि वह प्रदर्शनों में शामिल होते रहते हैं लेकिन मेरा तो इससे कोई लेना देना ही नहीं था और न ही मैं प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लखनऊ जा रही थी."
उन्होंने हमें 112 नंबर पर की गई कॉल की जानकारी भी साझा की है.
क्या कहती है गोरखपुर पुलिस?
इस पूरे मामले पर हमने गोरखपुर के तिवारीपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ विकास सिंह से फोन पर बात की. वे हमारे सवालों को टालते और अपने आपको व्यस्त बताते हुए नजर आए. सिंह कहते हैं कि ऐसी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है.
65 वर्षीय महिला को भी हिरासत में लिया गया था? इस सवाल पर वे कहते हैं कि ये कहानी हम आपको बाद में बताएंगे कि क्या हुआ था. अभी मैं व्यस्त हूं, एक रेस्क्यू में लगा हूं.
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी देश के अलग अलग हिस्सों में जाकर विरोध प्रदर्शन कर रही है. पार्टी ने 6 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर अपना पहला प्रदर्शन किया था. इसके बाद 11 जून को पुणे में भी प्रदर्शन किया. पुणे से ही पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दीप्के ने आगामी कार्यक्रमों का ऐलान करते हुए लखनऊ, नागपुर, जयपुर, अमृतसर, और फिर आखिर में 20 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की थी.
सीजेपी नीट और परीक्षा घोटालों के मुद्दे पर देशव्यापी प्रदर्शन कर रही है. इनकी मांग है कि शिक्षा मंत्री धंमेंद्र प्रधान अपने पद से जब तक इस्तीफा नहीं देंगे तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेंगे.
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