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केन-बेतवा लिंकिंग व्यावहारिक परियोजना नहीं है- अमित भटनागर
केन-बेतवा लिंक परियोजना दो नदियों के गठजोड़ का अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिसमें स्वयं प्रधानमंत्री रुचि ले रहे हैं.
केन नदी, मध्य प्रदेश के इलाके में बहती है और बेतवा नदी, उत्तर प्रदेश के इलाके में बहती है. इस परियोजना में दोनों नदियों पर बांध बनाकर एक नई नहर निकालने की योजना है. दरअसल, इन दोनों नदियों के बीच एक बड़ा इलाका ऐसा है, जहां पानी की किल्लत है.
सरकार का दावा है कि यह परियोजना सूखे से प्रभावित बुंदेलखंड के इलाकों तक पानी पहुंचाएगी, खेती को बढ़ावा देगी और हरियाली लाएगी, वहीं दूसरी ओर इस परियोजना से प्रभावित स्थानीय लोग और आदिवासी अपनी जमीन, जंगल और आजीविका को लेकर चिंतित हैं. उनका कहना है कि उन्हें मुआवजे के रूप में बहुत कम रकम दी जा रही है. साथ ही सरकार ने पुनर्वास को लेकर भी कोई बात नहीं की है.
इस परियोजना को लेकर बीते दिनों बड़े मौलिक और अनोखे तरीके के विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं. सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ग्रामीणों के इस संघर्ष की अगुवाई कर रहे हैं.
इस इंटरव्यू में हमने उनसे इस योजना से प्रभावित लोगों के संघर्ष, उनकी पीड़ा और अपनी जमीन-जंगल को बचाने की लड़ाई को समझने की कोशिश की.
अमित भटनागर बताते हैं कि देश के सबसे गर्म इलाकों में इस परियोजना को शुरू करने वाली सरकार के पास हाल का कोई डाटा नहीं है. उनका कहना है कि इसे नदी जोड़ो परियोजना कहा जा रहा है, लेकिन असल में सिर्फ केन का पानी बेतवा में ले जाया जाएगा, बेतवा का पानी केन में नहीं आएगा. उनके मुताबिक इससे केन नदी के खत्म होने का खतरा है.
भटनागर कहते हैं कि सरकार और संबंधित अधिकारी स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हैं. उनके अनुसार, कागजों पर दिखने वाली यह नदी जोड़ो परियोजना जमीन पर कुछ और ही कहानी दिखाती है.
देखिए अमित भटनागर से यह पूरी बातचीत.
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