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मानहानि मुकदमा: अंजना ओम कश्यप को दिल्ली हाईकोर्ट का तुरंत राहत देने से इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क की तरफ से दायर मानहानि मुकदमे में फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से मना कर दिया है.
अदालत ने लोकप्रिय शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर और अन्य लोगों को अंतरिम राहत संबंधी आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी.
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में अंजना की तरफ से पेश वकीलों ने अदालत से कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने, भविष्य में ऐसे पोस्ट और वीडियो प्रकाशित करने से रोकने तथा 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की.
इस पर सुनवाई के दौरान प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई. उनका तर्क था कि वर्तमान स्वरूप में यह मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि अंजना ओम कश्यप ने कई अलग-अलग लोगों के खिलाफ विभिन्न कारणों से उत्पन्न विवादों को एक ही याचिका में शामिल कर दिया है. दूसरे पक्ष का कहना था कि इन मामलों को अलग-अलग कानूनी कार्यवाहियों के जरिए उठाया जाना चाहिए.
वहीं, कश्यप की ओर से पेश वकीलों ने अदालत से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कथित अपमानजनक और विषाक्त सामग्री पर ध्यान देने का आग्रह किया. हालांकि, अदालत ने तत्काल कोई राहत देने के बजाय पहले बचाव पक्ष से जवाब दाखिल करने को कहा.
बार एंड बेंच के मुताबिक, विवाद की शुरुआत 29 मई को हुई, जब अंजना ओम कश्यप ने आज तक पर प्रसारित एक शो के दौरान शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण और ऑनलाइन "स्टार टीचर्स" के बढ़ते प्रभाव पर टिप्पणी की थी. कश्यप का कहना है कि यह सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर की गई एक वैध पत्रकारीय टिप्पणी थी.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद 30 मई से 4 जून के बीच खान सर समेत कई लोगों ने उनके और इंडिया टुडे के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक मुहिम चलाई. मुकदमे में खान सर के अलावा शिक्षक अभिनय शर्मा, बबीता त्यागी और अरविंद भदौरिया को भी पार्टी बनाया गया है. इसके अलावा कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स और 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है.
याचिका के मुताबिक इन सब लोगों ने ने वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट आदि में अंजना ओम कश्यप और आज तक को ‘बिकाऊ पत्रकार’, ‘चाटुकार’ जैसे शब्दों से संबोधित किया और उन पर ‘दलाली’ तथा ‘फेक न्यूज की दुकान’ चलाने जैसे मानहानिकारक आरोप लगाए.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि खान सर ने सार्वजनिक रूप से अंजना कश्यप के बच्चे के स्कूल का नाम उजागर किया. याचिका में कहा गया है कि इस जानकारी का विवाद से कोई संबंध नहीं था और इससे परिवार को अनावश्यक सार्वजनिक ध्यान, संभावित उत्पीड़न और सुरक्षा संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है.
पटना में भी विवादों में घिरे हैं खान सर
उल्लेखनीय है कि इस बीच खान सर एक अलग विवाद को लेकर भी चर्चा में हैं. पटना के कदमकुआं इलाके में स्थित उनके संस्थान खान ग्लोबल स्टडीज़ के बाहर 2 जून को हुई हिंसा और गोलीबारी की घटना ने आपराधिक जांच का रूप ले लिया है.
शुरुआत में खान सर ने दावा किया था कि एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों ने उनके संस्थान के बाहर गोलीबारी की थी. जांच के दौरान पुलिस ने पहले एक प्रतिद्वंद्वी संस्थान से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया और बाद में खान सर के दो सुरक्षा गार्डों को भी हिरासत में लिया. पुलिस के अनुसार सुरक्षा गार्डों ने पूछताछ में दावा किया कि उन्होंने खान सर के निर्देश पर गोली चलाई थी.
इसके बाद खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, उनके वकील अरविंद कुमार मौआर ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया है और कहा है कि मामला केवल कथित बयानबाजी पर आधारित है. इस संबंध में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है.
इसके अलावा बिहार अग्निशमन सेवा द्वारा राज्यव्यापी सुरक्षा जांच अभियान के तहत खान ग्लोबल स्टडीज का निरीक्षण भी किया गया. जांच में फायर अलार्म सिस्टम, फायर पंप और पर्याप्त ओवरहेड पानी की टंकी जैसी कई आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी पाई गई. संस्थान को एक सप्ताह के भीतर कमियां दूर करने का नोटिस दिया गया है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का पालन नहीं होने पर संस्थान को सील भी किया जा सकता है.
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