Video
11 सालों में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर खर्च किए 5987 करोड़, जानिए किसे मिले कितने रुपये
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 में दिल्ली में भाषण देते हुए कहा था कि वो भी विज्ञापनों पर अपना चेहरा चमका सकते थे, लेकिन उन्होंने जनता के लिए काम करने का रास्ता चुना. पीएम ऐसा कहकर दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर हमला बोल रहे थे.
लेकिन केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े एक अलग कहानी सामने रखते हैं. लोकसभा में सपा सांसद इकरा हसन समेत अन्य सांसदों के एक सवाल के जवाब में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने केंद्र सरकार के बीते 11 सालों के विज्ञापन खर्च का ब्यौरा दिया. मंत्री ने बताया कि साल 2014-15 से 2024-25 के बीच विज्ञापनों पर केंद्र सरकार ने कुल 5,987.46 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. अगर इसे औसत में देखें तो यह खर्च करीब डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिदिन आता है.
2014-15 में जहां विज्ञापन खर्च 765.83 करोड़ रुपये था, वहीं 2015-16 में यह बढ़कर 879.80 करोड़ और 2017-18 में 889.34 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके बाद खर्च में गिरावट भी देखी गई, 2020-21 में यह 281.71 करोड़ और 2021-22 में 214.94 करोड़ रुपये तक आ गया. हालांकि, 2023-24 में फिर यह बढ़कर 353.98 करोड़ रुपये हो गया.
इसके अलावा सरकार की ओर से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खर्च तेजी से बढ़ा है. गूगल इंडिया/यू-ट्यूब को 2023-24 से 2025-26 के बीच कुल 120 करोड़ 13 लाख रुपये से अधिक के विज्ञापन दिए गए, जबकि मेटा ( फेसबुक और इंस्ट्रग्राम की पैरेंट कंपनी ) को इसी अवधि में करीब 24 करोड़ 45 लाख रुपये प्राप्त हुए. यह दर्शाता है कि सरकार का विज्ञापन फोकस अब पारंपरिक माध्यमों के अलावा डिजिटल माध्यमों की ओर भी तेजी से शिफ्ट हो रहा है.
सरकार ने प्रिंट और टीवी मीडिया पर कितने रुपये खर्च किए हैं और किस मीडिया हाउस को कितने रुपये मिले हैं, ये जानने के लिए देखिए हमारी ये वीडियो रिपोर्ट.
पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव घोषित हो चुके हैं. इस बार की चुनावी कवरेज एक बड़ा और दो-तीन टीमों का साझा प्रयास है: श्रीनिवासन जैन विशेष इंटरव्यूज़ और ज़मीनी रिपोर्ट लेकर आ रहे हैं; 'द न्यूज़ मिनट' दक्षिण भारत से आपको हर सियासी अपडेट देगा और 'अनदर इलेक्शन शो' के साथ-साथ हमारे रिपोर्टर, बंगाल और असम की गहराई से पड़ताल करेंगे. इन कहानियों को आप तक लाने में हमारे चुनावी सेना प्रोजेक्ट को सहयोग करें.
Also Read
-
A city under siege by its own guardians: The Delhi of October 9 and 10
-
‘Koi media nahi hai’: Inside the Delhi police’s October 10 crackdown on journalists
-
Delhi Police vs protesters: The extraordinary cat-and-mouse chase across the capital
-
Delhi sealed, journalists detained: Inside the CJP protest on October 10
-
Around Jantar Mantar in 15,967 steps