Video
खराब हाइड्रोलिक और आग बुझाने में देरी बनी पालम में 9 लोगों की मौत का कारण?
दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक भयंकर हादसा सामने आया. यहां करीब 6:30 बजे एक इमारत में भीषण आग लग गई. चार मंजिला इमारत की नीचे की दो मंजिलों पर कॉस्मेटिक और गारमेंट्स की दुकानें थीं, जबकि ऊपर की दो मंजिलों पर परिवार रहता था.
हादसे में इस परिवार के 12 लोग चपेट में आ गए. जिनमें से 9 की मौत हो गई. मृतकों में 2 पुरुष, 4 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल हैं. वहीं, 3 का इलाज अभी जारी है. पुलिस के मुताबिक, उन्हें सुबह 7 बजकर 4 मिनट पर हादसे की सूचना मिली. जिसके बाद राहत-बचाव का काम शुरू किया गया.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं और मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवज़ा देने की घोषणा की है. नाबालिगों के लिए 5 लाख रुपये और घायलों के लिए 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति दिए जाएंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये प्रति व्यक्ति आर्थिक सहायता देने की घोषणा हुई है.
हादसे के बाद आम आदमी पार्टी (आप) नेता सौरभ भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे. उल्लेखनीय है कि हादसे का शिकार परिवार आम आदमी पार्टी से जुड़ा है. फिलहाल मामले की जांच जारी है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक लिफ्ट समय पर नहीं खुल पाई, जिससे समय रहते लोगों को बाहर नहीं निकाला जा सका. इस दौरान आग और ज्यादा फैल गई.
स्थानीय निवासी योगेश ने बताया, “मेरा बेटा सुबह 6 बजे कॉलेज जा रहा था, उसी ने सबसे पहले आग देखी और मुझे फोन किया. मैं तुरंत पहुंचा और पिताजी से कहा कि फायर ब्रिगेड को कॉल करें. उस समय आग छोटे हिस्से में थी. हम ऊपर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बहुत धुआं था. एक लड़का कूद गया था, जो करीब 25% तक जल गया."
वहीं, राम चौक मार्केट प्रधान महेश ने बताया कि उन्होंने फायर ब्रिगेड, पुलिस और बिजली विभाग को तुरंत कॉल कर दिया था. पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंच भी गई. हालांकि, इस दौरान फायर ब्रिगेड का पानी खत्म हो गया और दूसरी गाड़ी करीब 20 मिनट बाद पहुंची.
देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
Also Read
-
A trail of grief, little accountability: The Marion Biotech story after 68 children deaths
-
Extreme heat is quietly pushing women out of work
-
Mission Vatican in Kashi: The battle between ideology and faith
-
Ring of concrete: The seven flyovers that will cost Hyderabad a national park
-
‘Nothing short of a miracle’: How primetime TV lost its mind over a one-rupee toffee