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फर्रूखाबाद: एलपीजी की लाइन में लगे लोगों का वीडियो दिखाने पर पत्रकार के ऊपर एफआईआर
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक पत्रकार पर गैस एजेंसी के बाहर कतार में खड़े लोगों का वीडियो दिखाने को लेकर मामला दर्ज किया गया है. ये वीडियो 13 मार्च को साझा किए गए. संयोग से उसी दिन एक 70 वर्षीय व्यक्ति की एलपीजी सिलेंडर के लिए लाइन में इंतज़ार करते हुए दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई.
नोएडा स्थित हिंदी खबर चैनल के रिपोर्टर अनुभव मिश्रा को 13 मार्च को कमालगंज की गैस एजेंसियों में सिलेंडर की कथित कमी से जुड़े वीडियो एक स्थानीय स्ट्रिंगर से मिले थे. उन्होंने उसी दिन ये वीडियो अपने चैनल के व्हाट्सऐप ग्रुप में भेज दिए. ये वीडियो मूल रूप से 11 मार्च को शूट किए गए थे. मिश्रा की जानकारी के आधार पर हिंदी खबर ने बाद में एक ट्वीट भी किया.
हालांकि, पुलिस का कहना है कि ये वीडियो भ्रामक थे क्योंकि यह दो दिन पुराने थे. 13 मार्च को फर्रुखाबाद के कमालगंज थाने में पत्रकार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353(1)(b) के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से झूठी सामग्री और अफवाह फैलाने से संबंधित है. वहीं, चैनल ने ये ट्वीट डिलीट कर दिया है.
फर्रुखाबाद प्रशासन का कहना है कि जिले में न तो सिलेंडर की कोई कमी है और न ही कोई संकट की स्थिति है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को एलपीजी वितरण सुचारू रखने और अफरा-तफरी रोकने के निर्देश दिए थे. एक मीडिया रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि “स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी अफवाहों के जरिए दिखाई जा रही है.”
न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में हिंदी खबर चैनल के एडिटर-इन-चीफ अतुल अग्रवाल ने कहा कि यह “रिपोर्टर की गलती” थी. उन्होंने कहा, “पहली बात, स्टोरी में कुछ समस्याएं थीं, साथ ही इसे तीन दिन पहले भेजा गया था और एक प्रशिक्षु (ट्रेनी) ने ट्वीट कर दिया. दूसरी बात, हमारे जिला रिपोर्टर अनुभव मिश्रा को यह पूरी तरह समझ नहीं थी कि स्टोरी असल में किस बारे में थी.”
अग्रवाल ने कहा कि एफआईआर की संभावना की जानकारी मिलने के बाद चैनल ने जांच की और पाया कि “फर्रुखाबाद में ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम में दिक्कतों के कारण लोग घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) कर रहे हैं.” उन्होंने कहा, “हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कई नकारात्मक खबरें की हैं, लेकिन इस मामले में मैं मानता हूं कि यह हमारे रिपोर्टर की गलती थी.”
ट्वीट के बाद एफआईआर
गौरतलब है कि मिश्रा की जानकारी के आधार पर हिंदी खबर ने फर्रुखाबाद में कथित गैस संकट पर ट्वीट किया था, जिसमें कमालगंज गैस एजेंसी के बाहर कतार में खड़े लोगों का वीडियो दिखाया गया था. इस पोस्ट में कहा गया था कि एलपीजी सप्लाई को लेकर अफरा-तफरी है, बुकिंग नंबर काम नहीं कर रहे, उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, और कर्मचारी सर्वर समस्या का हवाला दे रहे हैं, जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है.
मिश्रा के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने से पहले एसपी के मीडिया सेल ने वीडियो हटाने को कहा था और स्थानीय पुलिस ने उन स्ट्रिंगरों से भी संपर्क किया था जिन्होंने सबसे पहले वीडियो साझा किए थे. रात 8:39 बजे एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटों बाद यह ट्वीट एक्स (ट्विटर) से हटा दिया गया.
एफआईआर में कहा गया है कि पोस्ट की गई तस्वीरें दो दिन पुरानी थीं और भारत गैस एजेंसी के अनुसार कुछ लोग बिना केवाईसी और बुकिंग प्रक्रिया पूरी किए वहां इकट्ठा हो गए थे, जिन्हें आवश्यक औपचारिकताओं की जानकारी देकर वापस भेज दिया गया. शिकायत में यह भी कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है और जिलाधिकारी ने भी यही बात कही है.
सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने कहा, “जैसा बताया जा रहा है वैसा कोई संकट नहीं है. जब हम मौके पर पहुंचे तो वहां कोई लंबी लाइन नहीं थी.” उन्होंने यह भी कहा कि पुराने वीडियो दिखाना भी गलत है.
दूसरी ओर, अनुभव मिश्रा इन आरोपों से असहमत हैं. उनका कहना है कि फर्रुखाबाद की कई गैस एजेंसियों में इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं- लंबी कतारें, ओटीपी न आना, सर्वर का काम न करना, केवाईसी की मांग और उपभोक्ताओं की परेशानी. उन्होंने कहा, “अगर खबर में कुछ तथ्यात्मक गलती थी तो नोटिस भेजा जा सकता था. सीधे एफआईआर करना गलत है.”
उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में वीडियो भेजने के दौरान कभी-कभी देरी हो जाती है और उन्हें ये वीडियो 13 मार्च को ही मिले थे, जिसके बाद उन्होंने आगे साझा किए.
एसपी के मीडिया सेल ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
‘वह लाइन में खड़े-खड़े ही मर गए’
उल्लेखनीय है कि 13 मार्च को ही 70 वर्षीय मुख्तियार अहमद कमालगंज गैस एजेंसी के बाहर बेहोश होकर गिर पड़े और उनकी मौत हो गई.
मुख्तियार को छह महीने पहले दिल की बीमारी का पता चला था और उनका इलाज कानपुर के सरकारी अस्पताल में चल रहा था. 12 मार्च को उन्होंने मोबाइल से सिलेंडर बुक करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई कन्फर्मेशन मैसेज नहीं मिला. इसके बाद वे लाल सराय स्थित भारत गैस एजेंसी गए, जहां उन्होंने 930 रुपये जमा किए और उन्हें एक पर्ची देकर अगले दिन आने को कहा गया.
13 मार्च की सुबह वे 7 बजे घर से निकले. करीब 9:30 बजे परिवार को आसपास के लोगों से फोन आया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्थानीय लोग उन्हें सीपीआर देने की कोशिश करते दिख रहे हैं. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
परिवार का कहना है कि उन्हें लगभग दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा. उनके दामाद मोहम्मद शाहिद ने कहा, “गैस एजेंसी हमारे घर से 10 मिनट की दूरी पर है. वह सुबह 7 बजे गए थे और 9:30 बजे फोन आया. यानी उन्हें लगभग दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा.”
परिवार का आरोप है कि गैस आपूर्ति की अव्यवस्था उनकी मौत का कारण बनी. उनका कहना है कि वीडियो में भी कतारें साफ दिख रही हैं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं थी.
हालांकि, जिला आपूर्ति अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने इस दावे को खारिज किया. उन्होंने कहा, “न तो कोई कमी है और न ही कहीं लाइन है. हमारी जानकारी के अनुसार वह सुबह 8:30 बजे निकले थे और 9:15 बजे उनकी तबीयत खराब हुई.”
होम डिलीवरी को लेकर उन्होंने कहा, “लोग घबराहट में खुद एजेंसी पहुंच रहे हैं. अगर वह इंतजार करते तो सिलेंडर एक दिन बाद घर पहुंच जाता.” सर्वर फेल होने पर उन्होंने कहा कि ज्यादा बुकिंग के कारण सर्वर क्रैश हो गया था, जिससे डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड नहीं बन पाया, लेकिन एजेंसी ने पर्ची जारी कर दी थी.
मुख्तियार अपने पीछे दो बेटे और छह बेटियां छोड़ गए हैं, जिनमें से पांच की शादी हो चुकी है.
परिवार ने अभी तक इस मामले में पुलिस के पास कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है.
घटना के बाद जब प्रशासनिक अधिकारी परिवार से मिलने पहुंचे, तो मुख्तियार की मौत के कुछ घंटों बाद उनके घर सिलेंडर पहुंचा दिया गया.
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