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उत्तम नगर फ़साद की पूरी कहानी, पुलिस छावनी में बदले इलाके में हिंदूवादी गुटों की बेरोकटोक आवाजाही
दिल्ली के उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में होली के दिन, चार मार्च को दो पक्षों के बीच हुए आपसी झगड़े में एक युवक की जान चली गई. साथ ही दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए. घटना के कई दिनों बाद भी इलाके में तनाव और सन्नाटा पसरा रहा. भारी बैरिकेडिंग और पुलिस की आवाजाही के बीच हिंदू संगठनों के बयानों ने स्थानीय लोगों में खौफ का माहौल बना दिया.
दरअसल, होली की रात करीब 10 से 11 बजे के बीच दो समुदायों में विवाद हो गया. इस दौरान 26 वर्षीय दलित युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी पांच मार्च की सुबह अस्पताल में मौत हो गई. इसके बाद यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और इलाके में तनाव की स्थिति बन गई. आरोपी पक्ष अपने घरों में ताले लगाकर वहां से फरार हो गए. इसके बाद बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों का इलाके में आना शुरू हो गया.
छह मार्च की दोपहर में आरोपियों के घर के बाहर खड़े वाहनों में आग लगा दी गई. साथ ही एक घर के परिसर में भी तोड़फोड़ और आगजनी की गई. इसके बाद शाम को हिंदू संगठनों की भीड़ मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा हो गई और नारेबाजी करते हुए धरना-प्रदर्शन करने लगी. भीड़ की मांग थी कि आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाया जाए और हत्या में शामिल सभी लोगों का एनकाउंटर किया जाए. जमा भीड़ ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की. वहीं अगले दिन यह मांग और तेज हो गई. फिर आठ मार्च को एक आरोपी के घर के बाहरी हिस्से को एमसीडी ने अतिक्रमण बताते हुए बुलडोजर से ढहा दिया.
इलाके में लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस ने नाकेबंदी कर दी. हर गली और नुक्कड़ पर भारी बैरिकेडिंग के साथ पुलिस की तैनाती कर दी गई. हालात ऐसे हो गए कि बाहरी लोगों के आने पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी और स्थानीय लोगों को भी आधार कार्ड दिखाने के बाद ही एंट्री मिलने लगी. इस बीच पुलिस ने मीडिया की एंट्री पर भी पूरी तरह रोक लगा दी.
जब हमने घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश की तो हमें हर बैरिकेडिंग पर एक नया रास्ता सुझाया गया. कहा गया कि उस रास्ते से मीडिया को एंट्री मिल जाएगी. इस तरह हमने करीब दो दर्जन बैरिकेडिंग पार कीं और करीब दो से तीन किलोमीटर की दूरी तय की. लेकिन जब हम आखिरी बैरिकेडिंग तक पहुंचे तो वहां भी एंट्री नहीं मिली. हालांकि, हमने पाया कि इतनी किलेबंदी के बावजूद पुलिस कुछ हिंदू नेताओं को अंदर जाने की अनुमति दे रही थी. हमने कुछ मीडिया कर्मियों की गाड़ियों को भी अंदर जाते देखा. पुलिस अधिकारियों से जब हमने इस बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के एंट्री नहीं मिलेगी.
बैरिकेडिंग के एक तरफ पुलिस थी, जबकि दूसरी तरफ यूट्यूबर्स से बातचीत करती हिंदू संगठनों की भीड़. हमने देखा कि वहां मौजूद कुछ नेता लगातार मुसलमानों को गालियां दे रहे थे और उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे. गालियों के साथ वे लगातार मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए यह मांग कर रहे थे कि सभी आरोपियों का एनकाउंटर किया जाए और उनके घर ढहाए जाएं.
पीड़ित पक्ष के वकील सुमित कुमार चौहान ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि उन्होंने वारदात में शामिल 22 लोगों के नाम दिए थे. हालांकि, उनके मुताबिक यह संख्या ज्यादा है, लेकिन जिनकी पहचान हो सकी, उनके ही नाम शिकायत में दिए गए. वकील के मुताबिक, पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इनमें दो नाबालिग और तीन महिलाएं शामिल हैं. साथ ही आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या), एससी/एसटी एक्ट और पॉक्सो समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
तरुण के पिता मेमराज इस घटना का जिक्र करते हुए कहते हैं कि यह पूरा विवाद एक छोटे से गुब्बारे को लेकर हुआ था. वे कहते हैं, “हमारे परिवार की 6–7 साल की एक बच्ची, जो दूसरी मंजिल पर थी, उससे पानी से भरा एक गुब्बारा नीचे गिर गया. इस दौरान हमारी पड़ोसी महिला पर उसके कुछ छींटे पड़ गए. इसके बाद उसने शोर मचाना शुरू कर दिया और उनके परिवार के कई लोग इकट्ठा हो गए. इस पर मेरे छोटे भाई और चाचा ने उस महिला से माफी भी मांगी, लेकिन वे नहीं मानीं और चिल्लाने लगीं. इसके बाद उनके परिवार के लोग लाठी-डंडे और लोहे की रॉड लेकर आए और हम पर हमला कर दिया. उस समय तरुण घर पर नहीं था, जब वह करीब 11 बजे आया तो गली के बाहर ही इन लोगों ने उसे पकड़ लिया और बेरहमी से पीटा, जिसके बाद अगले दिन उसकी मौत हो गई.”
मृतक तरुण का परिवार दावा कर रहा है कि झगड़ा गुब्बारे की घटना से ही शुरू हुआ और उनकी पहले से कोई रंजिश नहीं थी. हालांकि, कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच पहले से विवाद होते रहे हैं.
स्थानीय निवासी इरशाद अहमद बताते हैं कि दोनों परिवार राजस्थान से हैं और पड़ोसी हैं. उनके अनुसार, “इनके बीच आए दिन कभी पार्किंग तो कभी कूड़ा फेंकने को लेकर झगड़े होते रहते थे. यह दोनों परिवारों का आपसी विवाद था लेकिन मीडिया और यहां आने वाले कुछ हिंदू संगठनों के लोगों ने इसे हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा बना दिया.”
तरुण की गली से अगली गली में रहने वाले दिलशाद कहते हैं कि दोनों परिवारों के बीच पहले भी झगड़े होते रहे हैं. “यह इत्तेफाक था कि होली के दिन यह झगड़ा हो गया और तरुण की मौत हो गई. इसके बाद इसे हिंदू-मुस्लिम रंग दिया जा रहा है, जबकि दोनों परिवारों की पुरानी रंजिश थी.”
एक अन्य स्थानीय निवासी राजेंद्र बताते हैं कि दोनों परिवारों के बीच पहले भी झगड़ा हो चुका है. फिलहाल इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है. पुलिस अधिकारी स्थानीय अमन कमेटी के साथ बातचीत कर माहौल को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं.
अमन कमेटी के सदस्य जमील अहमद ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में कहा कि वे स्थानीय लोगों से बात कर उन्हें समझा रहे हैं. साथ ही पुलिस से भी आग्रह कर रहे हैं कि यूट्यूब चैनलों पर चलाई जा रही भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जाए और बाहर से आने वाले उन लोगों को रोका जाए जो यहां आकर माहौल को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं.
देखिए हमारी ये वीडियो रिपोर्ट.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
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