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नासिर- जुनैद हत्याकांड: मोनू मानेसर को जमानत, तीन साल से ट्रायल का इंतजार करता पीड़ित परिवार
फरवरी, 2023 में राजस्थान के भरतपुर जिले में हुए नासिर- जुनैद हत्याकांड में एक अहम आरोपी ‘गौरक्षक’ मोनू मानेसर को राजस्थान हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है. 5 मार्च को हाईकोर्ट ने मोनू मानेसर को जमानत दे दी. इसके बाद जहां एक तरफ मोनू के समर्थकों ने जेल से बाहर आने पर पटाखे फोड़कर और फूल बरसाकर उसका स्वागत किया, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवारों में इस फैसले को लेकर गहरी निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है.
नासिर और जुनैद के परिजनों का कहना है कि इस फैसले ने उन्हें न्याय व्यवस्था से और दूर कर दिया है. जुनैद के बड़े भाई मोहम्मद इस्माइल हमसे बातचीत में कहते हैं, “मेरे भाई को जिंदा जलाकर मार देने के बाद भी मोनू मानेसर को जमानत मिल गई, यह अन्याय है. शायद हम गरीब हैं और मुसलमान हैं इसलिए हमारे साथ यह अन्याय हो रहा है.”
उल्लेखनीय है कि राजस्थान के भरतपुर के घाटमिका गांव के रहने वाले नासिर और जुनैद को कथित तौर पर गौरक्षकों ने पहले अगवा किया था. परिवार और पुलिस के अनुसार दोनों को बेरहमी से पीटा गया और बाद में हरियाणा के भिवानी जिले में उनके जली हुई गाड़ी से शव बरामद हुए थे. इस घटना ने पूरे देश में भारी विवाद और राजनीतिक बहस को जन्म दिया था.
इस मामले में राजस्थान पुलिस ने कुल 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. इनमें से पांच लोगों मोनू मानेसर, अनिल मुल्तान,गोगी, रिंकू सैनी और मोनू राणा को गिरफ्तार किया गया था. मामला फिलहाल राजस्थान के कामा सेशन कोर्ट में विचाराधीन है.
इसी बीच पहले सुप्रीम कोर्ट से अनिल मुल्तान को जमानत मिली. फिर इस जमानत और ट्रायल में हो रही देरी देरी आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने मोनू मानेसर को भी जमानत दे दी. लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला राहत नहीं बल्कि एक नई चिंता लेकर आया है.
हमसे बातचीत में नासिर के छोटे भाई हामिद ने बताया कि नासिर के जाने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर आ गई है. वह ट्रक चलाने का काम करते हैं और नासिर के दोनों बच्चों की जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं. वह कहते हैं, “बड़ा भाई बाजू जैसा होता है, उसके जाने के बाद हमारा घर बिखर गया है.”
जुनैद की पत्नी साजिदा भी इस फैसले से बेहद आहत हैं. वह कहती हैं, “प्रधानमंत्री कहते हैं बेटी बचाओ तो क्या हम इस देश की बेटी नहीं है? हमारे साथ न्याय क्यों नहीं हो रहा है?”
साजिदा ने हमें यह भी बताया कि जुनैद की मौत के गम में उनकी बड़ी बेटी की मौत हो गई है. करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी यह मामला अदालत में चल रहा है और पीड़ित परिवारों को अब भी न्याय का इंतजार है. एक तरफ आरोपी की जमानत पर समर्थकों के जश्न की तस्वीरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर घाटमिका गांव में पीड़ित परिवारों के घरों में अब भी मातम पसरा हुआ है.
देखिए हमारी यह वीडियो रिपोर्ट.
मणिकर्णिका घाट से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक, उजड़े (ढहा दिए गए) घरों और खामोश हो चुके मोहल्लों के बीच यह सीरीज़ बताएगी कि कैसे तोड़फोड़ की राजनीति बनारस की सिर्फ़ इमारतें नहीं, उसकी आत्मा को भी बदल रही है. बनारस पर हमारे इस सेना प्रोजेक्ट को सपोर्ट करिए.
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